May 28, 2026

सुरों की 'मैदान' छोड़ गईं आशा भोसले: क्रिकेट की दुनिया ने कहा- "आपके जैसा 'ऑलराउंडर' फिर नहीं होगा"

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नई दिल्ली। भारतीय संगीत जगत की दिग्गज और सदाबहार आवाज की मालकिन आशा भोसले के निधन से पूरे देश में शोक की लहर है। 92 वर्ष की आयु में मुंबई में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके जाने से न सिर्फ संगीत जगत बल्कि खेल जगत में भी गहरा दुख देखने को मिला। खासतौर पर भारतीय क्रिकेट जगत के कई बड़े खिलाड़ियों और दिग्गजों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनकी विरासत को याद किया।

क्रिकेट सितारों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

भारतीय टीम के हेड कोच गौतम गंभीर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि आशा भोसले की बेजोड़ प्रतिभा और शालीनता हमेशा याद रखी जाएगी। वहीं पूर्व कप्तान अनिल कुंबले ने उन्हें भारतीय संगीत की अमर आवाज बताते हुए उनके परिवार के प्रति संवेदना जताई।

दिग्गज स्पिनर हरभजन सिंह ने कहा कि आशा जी की आवाज ने पीढ़ियों को गहराई से छुआ है और उनका संगीत समय से परे है। पूर्व ऑलराउंडर युवराज सिंह ने भावुक होते हुए कहा कि उनकी आवाज के साथ ही उनकी कई यादें जुड़ी हुई हैं और ऐसा लगता है जैसे बचपन का एक हिस्सा आज खामोश हो गया।

“हमेशा सदाबहार रहेंगी आशा जी”

पूर्व सलामी बल्लेबाज शिखर धवन ने कहा कि आशा भोसले की आवाज कभी पुरानी नहीं हुई और वह हमेशा सदाबहार रहेंगी। भारत की पूर्व तेज गेंदबाज झूलन गोस्वामी ने इसे भारतीय संगीत के लिए अपूरणीय क्षति बताया।

तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार ने लिखा कि उनकी आवाज जीवन के हर पड़ाव पर साथ रही, जबकि पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान ने उन्हें “सदाबहार विरासत” करार दिया।

अंतिम संस्कार की तैयारी

जानकारी के अनुसार, आशा भोसले का अंतिम संस्कार सोमवार शाम 4 बजे मुंबई के शिवाजी पार्क में किया जाएगा। शनिवार को तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनकी हालत में सुधार नहीं हो सका।

संगीत जगत की अमर आवाज

आशा भोसले ने अपने करियर की शुरुआत 1940 के दशक में की थी और दशकों तक अपनी सुरीली आवाज से श्रोताओं के दिलों पर राज किया। उन्होंने मोहम्मद रफी जैसे दिग्गजों के साथ कई यादगार गीत गाए। उनके लोकप्रिय गीतों में ‘चुरा लिया है तुमने जो दिल को’, ‘दो लफ्जों की है दिल की कहानी’ और ‘ये लड़का है अल्लाह’ आज भी लोगों की जुबां पर हैं।

करीब 20 भाषाओं में 12,000 से अधिक गीत गाने वाली आशा भोसले को दादा साहब फाल्के पुरस्कार और पद्म विभूषण जैसे देश के सर्वोच्च सम्मानों से नवाजा गया था।

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