July 17, 2026

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: गणना टीम में शामिल होते ही मनीष बना गिरोह का सरगना, CCTV से खुल रहे राज

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अयोध्या। श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ ही आरोपियों की भूमिका को लेकर नए खुलासे सामने आ रहे हैं। जांच में सामने आया है कि रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू का भतीजा मनीष यादव गणना टीम में शामिल होने के बाद चोरी करने वाले गिरोह का अहम हिस्सा बन गया था।

एसआईटी जांच के मुताबिक, सीसीटीवी फुटेज में चढ़ावे की नोटों की गड्डियां ले जाते हुए तीन लोगों की भूमिका स्पष्ट रूप से सामने आई है। इनमें अविनाश शुक्ला, मनीष यादव और रमाशंकर मिश्रा शामिल हैं। आरोप है कि ये लोग चढ़ावे की रकम बाहर ले जाते थे, जबकि तीन अन्य लोग घेरा बनाकर सीसीटीवी कैमरों की नजर से बचाने में मदद करते थे।

भर्ती के कुछ ही दिनों बाद CCTV में कैद हुआ मनीष
एसआईटी रिपोर्ट के अनुसार, मनीष यादव की गणनाकर्मी पद पर नियुक्ति उसके ताऊ रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू की सिफारिश पर हुई थी। बताया गया है कि टिन्नू ने मनीष की भर्ती के लिए दस्तावेज एसबीआई के रत्नेश चतुर्वेदी को उपलब्ध कराए थे। इसके बाद सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज के माध्यम से संविदा प्रक्रिया पूरी की गई। रिकॉर्ड के अनुसार, मनीष यादव की भर्ती 15 अप्रैल 2026 को हुई थी। इसके करीब 50 दिन के भीतर ही 11 मई 2026 की सीसीटीवी फुटेज में वह चढ़ावे की गड्डियां ले जाते हुए दिखाई दिया।

50 दिन में मिली बड़ी भूमिका पर उठे सवाल
जांच में यह भी सामने आया है कि रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू को सीधे तौर पर चोरी करते हुए नहीं पकड़ा गया है, लेकिन आशंका जताई जा रही है कि उसने अपने भतीजे मनीष को इस काम में आगे किया। जांच एजेंसियों का कहना है कि सामान्य तौर पर किसी नए कर्मचारी को किसी व्यवस्था को समझने में समय लगता है, लेकिन मनीष के मामले में भर्ती के कुछ ही दिनों बाद चोरी की गतिविधियों में शामिल होने के आरोप सामने आए हैं। इसी वजह से उसकी नियुक्ति को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

अविनाश के पास मिली सबसे ज्यादा संपत्ति
एसआईटी को 27 अप्रैल से 5 जून तक की सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध हुई, जिसकी जांच के बाद चढ़ावा चोरी के कई पहलुओं का खुलासा हुआ। जांच के अनुसार, सबसे अधिक संपत्ति और नकदी अविनाश शुक्ला के पास से बरामद हुई।

बताया गया है कि मनीष यादव अविनाश के सहयोगी के रूप में काम कर रहा था, जबकि अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय पर भी मदद करने का आरोप है। एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, जांच से संकेत मिलते हैं कि मनीष को गणना कक्ष की जिम्मेदारी मिलने के बाद गिरोह में शामिल किया गया और कुछ समय बाद उसने चोरी की गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू कर दी।

टिन्नू की भूमिका भी जांच के दायरे में
जांच के मुताबिक, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां पहले रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू के पास थीं। परिवारिक संबंधों के कारण मनीष की गणना कक्ष में पहुंच आसान हुई और पहले से सक्रिय आरोपियों के संपर्क में आने के बाद वह कथित तौर पर गिरोह का हिस्सा बन गया।

टिन्नू और मनीष की पुलिस रिमांड की मांग
अब पुलिस ने रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू और मनीष यादव की सात दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड मांगी है। मामले के विवेचक और अयोध्या क्षेत्राधिकारी आशुतोष तिवारी ने विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की अदालत में विशेष अभियोजन अधिकारी के माध्यम से आवेदन दिया है। पुलिस का कहना है कि दोनों आरोपियों से पूछताछ के दौरान मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्यों और संभावित बरामदगी की जानकारी मिल सकती है। अदालत ने इस आवेदन पर सुनवाई के लिए शुक्रवार की तारीख तय की है।

79 लाख बरामदगी और 3 करोड़ की आशंका के बीच सवाल
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बरामद रकम को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। शुरुआती जानकारी में करीब 79 लाख रुपये बरामद होने की बात सामने आई थी, जिसे पुलिस को सौंपा गया था। वहीं, राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने बाद में करीब 3 करोड़ रुपये की चोरी की आशंका जताई थी। अब जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि तीन करोड़ रुपये के अनुमान का आधार क्या था।

जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह आंकड़ा दानपात्र की गिनती, ऑडिट रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज, आरोपियों से पूछताछ या किसी अन्य साक्ष्य के आधार पर सामने आया था। इस मामले में आगे की जांच के बाद ही पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।

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