July 20, 2026

महोबा में एसडीएम और अधिवक्ता विवाद ने पकड़ा तूल कलेक्ट्रेट में वकीलों का प्रदर्शन कार्रवाई नहीं हुई तो कोर्ट बहिष्कार की चेतावनी

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महोबा । उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में प्रशासन और अधिवक्ताओं के बीच विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। सदर एसडीएम पर एक अधिवक्ता से फोन पर अभद्र व्यवहार करने तथा कथित रूप से उन्हें कोर्ट में न आने और वकालत का लाइसेंस रद्द कराने की धमकी देने के आरोपों के बाद जिला मुख्यालय का माहौल गरमा गया। मामले के विरोध में जिला अधिवक्ता समिति के बैनर तले बड़ी संख्या में वकीलों ने कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए निष्पक्ष कार्रवाई की मांग उठाई।

विवाद की शुरुआत बीजानगर निवासी अधिवक्ता परशुराम कुशवाहा के रास्ते से जुड़े विवाद से हुई। अधिवक्ता का आरोप है कि समस्या का समाधान कराने के बजाय सदर एसडीएम ने उनसे फोन पर अनुचित भाषा का प्रयोग किया और कथित तौर पर गंभीर धमकियां दीं। उनका कहना है कि उन्होंने प्रशासनिक लापरवाही की शिकायत जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज कराई थी जिसके बाद उनके साथ यह व्यवहार किया गया। अधिवक्ता ने दावा किया है कि बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी मौजूद है और इसी आधार पर उन्होंने पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

घटना के बाद जिला अधिवक्ता समिति ने इसे अधिवक्ताओं के सम्मान से जुड़ा मामला बताते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि अधिवक्ताओं के साथ इस प्रकार का व्यवहार किया जाएगा तो न्यायिक व्यवस्था की गरिमा प्रभावित होगी। प्रदर्शन के दौरान वकीलों ने मांग की कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाएं तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

अधिवक्ता समिति के पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि यदि पीड़ित अधिवक्ता की समस्या का शीघ्र समाधान नहीं हुआ और आरोपों पर उचित कार्रवाई नहीं की गई तो वे एसडीएम न्यायालय का पूर्ण बहिष्कार करने के साथ व्यापक आंदोलन शुरू करेंगे। उनका कहना है कि अधिवक्ताओं को दबाव में लेने या डराने का कोई भी प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा।

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन की ओर से अतिरिक्त जिला अधिकारी ने अधिवक्ताओं से मुलाकात कर उनका ज्ञापन प्राप्त किया। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और तहसील स्तर पर लंबित समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। प्रशासन का कहना है कि किसी भी पक्ष के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर जिले में प्रशासन और अधिवक्ताओं के बीच तनाव बना हुआ है। दोनों पक्ष अपने अपने रुख पर कायम हैं। एक ओर अधिवक्ता संगठन कार्रवाई की मांग पर अड़ा है तो दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच के बाद ही तथ्यों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं क्योंकि यही तय करेगी कि यह विवाद जल्द सुलझेगा या आगे और गहराएगा।

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