July 23, 2026

20% से अधिक एथेनॉल मिश्रण पर अभी निर्णय नहीं, सरकार बोली- वैज्ञानिक अध्ययन के बाद ही बढ़ेगा कदम

0
29-1784809307
नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ाने की अटकलों पर विराम लगाते हुए संसद में स्पष्ट किया है कि फिलहाल ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है। सरकार ने कहा कि यदि भविष्य में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाने पर विचार किया जाता है तो उससे पहले विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन, तकनीकी परीक्षण और सभी संबंधित पक्षों के साथ व्यापक परामर्श किया जाएगा। सरकार का कहना है कि किसी भी नए निर्णय का आधार केवल वैज्ञानिक प्रमाण और व्यावहारिक अनुभव होंगे।

लोकसभा में लिखित उत्तर के दौरान पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बताया कि ई85 ईंधन केवल फ्लेक्स फ्यूल वाहनों के लिए उपलब्ध कराया गया है। ऐसे वाहन विशेष रूप से इस ईंधन के उपयोग के लिए डिजाइन और प्रमाणित किए जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका अर्थ यह नहीं है कि सामान्य पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा 20 प्रतिशत से अधिक करने का निर्णय लिया जा चुका है।

सरकार ने बताया कि भारत में एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल कार्यक्रम को चरणबद्ध और वैज्ञानिक तरीके से लागू किया गया है। इस प्रक्रिया में नीति आयोग, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया, सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम, ऑटोमोबाइल कंपनियों और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों सहित विभिन्न संस्थानों की भागीदारी रही है। व्यापक परीक्षणों और फील्ड वैलिडेशन के बाद ही ई20 ईंधन को लागू किया गया।

सरकार के अनुसार उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययन और वास्तविक उपयोग के अनुभव बताते हैं कि निर्धारित मानकों के अनुरूप इस्तेमाल किए जाने पर ई20 पेट्रोल सुरक्षित और तकनीकी रूप से उपयुक्त ईंधन है। सरकार ने कहा कि यह निष्कर्ष केवल प्रयोगशाला परीक्षणों पर आधारित नहीं है, बल्कि देशभर में इसके व्यावहारिक उपयोग से प्राप्त अनुभवों से भी इसकी पुष्टि हुई है।

संसद को दी गई जानकारी के अनुसार देश में ई15 से अधिक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का उपयोग साढ़े तीन वर्षों से और ई19-ई20 ईंधन का उपयोग ढाई वर्षों से अधिक समय से किया जा रहा है। इस अवधि में करोड़ों दोपहिया वाहन और लाखों पेट्रोल कारें इस ईंधन पर संचालित हुई हैं, लेकिन एथेनॉल मिश्रण के कारण बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने या असामान्य तकनीकी समस्या का कोई सत्यापित मामला सामने नहीं आया है। वाहन निर्माताओं के सर्विस रिकॉर्ड में भी ई20 के कारण अतिरिक्त घिसावट या इंजन की आयु कम होने के प्रमाण नहीं मिले हैं।

सरकार ने यह भी बताया कि प्रमुख वाहन निर्माताओं के सर्विस डेटा में ई20 उपयोग करने वाले वाहनों में इंजन डैमेज या असामान्य खराबी की दर सामान्य ईंधन वाले वाहनों की तुलना में अधिक नहीं पाई गई। साथ ही कंपनियां ऐसे वाहनों पर सामान्य वारंटी भी जारी रख रही हैं। विभिन्न अनुसंधान संस्थानों द्वारा किए गए परीक्षणों में भी ई20 ईंधन को तकनीकी रूप से अनुकूल पाया गया है।

माइलेज को लेकर सरकार ने कहा कि ईंधन दक्षता कई कारकों पर निर्भर करती है, जिनमें वाहन की स्थिति, ड्राइविंग शैली और सड़क की परिस्थितियां शामिल हैं। कुछ पुराने ई10 आधारित वाहनों में माइलेज में सीमित कमी संभव है, लेकिन ई20 ईंधन बेहतर ऑक्टेन रेटिंग, साफ दहन, बेहतर एंटी-नॉक क्षमता और कम कार्बन उत्सर्जन जैसे लाभ भी प्रदान करता है। सरकार का दावा है कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम से विदेशी मुद्रा की बड़ी बचत, कच्चे तेल के आयात में कमी, कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय गिरावट और किसानों की आय बढ़ाने में भी सकारात्मक योगदान मिला है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *