अंतर्राष्‍ट्रीय Archives - aajkhabar.in https://aajkhabar.in/category/international/ News website Mon, 20 Jul 2026 09:31:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0.2 https://aajkhabar.in/wp-content/uploads/2026/03/cropped-cropped-aajkhabar-Logo04-32x32.png अंतर्राष्‍ट्रीय Archives - aajkhabar.in https://aajkhabar.in/category/international/ 32 32 हर्मुज जलडमरूमध्य से परमाणु ठिकानों तक बढ़ा युद्ध का दायरा, अमेरिकी हमलों और ईरानी जवाबी कार्रवाई ने क्षेत्रीय सुरक्षा पर गहरा संकट खड़ा किया https://aajkhabar.in/the-scope-of-the-conflict-has-expanded-from-the-strait-of-hormuz-to-nuclear-sites-us-strikes-and-iranian-retal/ https://aajkhabar.in/the-scope-of-the-conflict-has-expanded-from-the-strait-of-hormuz-to-nuclear-sites-us-strikes-and-iranian-retal/#respond Mon, 20 Jul 2026 09:31:00 +0000 https://aajkhabar.in/international/the-scope-of-the-conflict-has-expanded-from-the-strait-of-hormuz-to-nuclear-sites-us-strikes-and-iranian-retal/ नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष अब ऐसे दौर में...

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नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष अब ऐसे दौर में पहुंच गया है, जहां इसका असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रह गया है। पश्चिम एशिया के कई देशों में बढ़ती सैन्य गतिविधियों, समुद्री मार्गों पर सुरक्षा चुनौतियों और लगातार हो रहे हमलों ने पूरे क्षेत्र की स्थिरता को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। सोमवार को ओमान के तट के पास स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हर्मुज जलडमरूमध्य के निकट एक व्यावसायिक जहाज में आग लगने की घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार को लेकर आशंकाओं को और बढ़ा दिया।

हर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति होती है। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में जहाज में आग लगने की घटना के बाद विभिन्न देशों ने हालात पर नजर तेज कर दी है। फिलहाल आग लगने के कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन क्षेत्र में पहले से जारी सैन्य तनाव के बीच इस घटना को गंभीर सुरक्षा चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

इसी दौरान अमेरिका ने ईरान के भीतर अपने सैन्य अभियान को और तेज कर दिया है। अमेरिकी कार्रवाई लगातार कई दिनों से जारी है और इसमें केवल सैन्य ठिकानों ही नहीं बल्कि रणनीतिक महत्व वाले ढांचों को भी निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि इन अभियानों का उद्देश्य उन क्षमताओं को कमजोर करना है जिनका उपयोग क्षेत्र में व्यावसायिक जहाजों, सैन्य प्रतिष्ठानों और नागरिक हितों के खिलाफ किया जा सकता है।

संघर्ष के बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी एक निर्माणाधीन परियोजना भी हमलों की चपेट में आ गई। ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन ने दावा किया कि दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में स्थित दारखोविन परमाणु ऊर्जा परियोजना की निर्माण साइट पर हवाई हमला किया गया। हालांकि संबंधित अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसी ने स्पष्ट किया कि यह परियोजना अभी शुरुआती चरण में थी और वहां किसी प्रकार की परमाणु सामग्री मौजूद नहीं थी। इसके बावजूद इस घटना ने परमाणु सुरक्षा और क्षेत्रीय तनाव को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

सैन्य टकराव का असर अमेरिकी सैनिकों पर भी लगातार दिखाई दे रहा है। हालिया घटनाओं में एक अमेरिकी सैनिक की मौत की पुष्टि हुई है। बताया गया कि यह घटना इराक में एक ड्रोन अभियान के दौरान नियंत्रित विस्फोट के समय हुई। इससे पहले भी संघर्ष के दौरान कई अमेरिकी सैनिकों के हताहत होने की खबरें सामने आ चुकी हैं, जिससे अभियान की गंभीरता और जोखिम दोनों बढ़ गए हैं।

अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने भी अपनी सैन्य प्रतिक्रिया तेज कर दी है। जॉर्डन, कुवैत और आसपास के क्षेत्रों की ओर मिसाइलों तथा ड्रोन से हमले किए जाने की जानकारी सामने आई है। जॉर्डन ने दावा किया कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने कई मिसाइलों को बीच रास्ते में ही नष्ट कर दिया। वहीं कुवैत में ऊर्जा और जल आपूर्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण संयंत्र पर लगातार दूसरे दिन हमला होने से वहां आवश्यक सेवाओं को लेकर चिंता बढ़ गई है।

इन घटनाओं के बाद खाड़ी क्षेत्र के देशों ने भी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल ने नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों की निंदा करते हुए क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर गंभीर चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि बिजली, पानी और अन्य नागरिक सुविधाओं को निशाना बनाए जाने से मानवीय संकट गहरा सकता है। लगातार बढ़ती सैन्य कार्रवाई, समुद्री सुरक्षा पर मंडराता खतरा और क्षेत्रीय देशों की सक्रिय भागीदारी यह संकेत दे रही है कि यदि हालात जल्द नहीं संभले तो पश्चिम एशिया का यह संघर्ष व्यापक अंतरराष्ट्रीय चुनौती का रूप ले सकता है।

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ईरान पर अमेरिका की नई बमबारी से बढ़ा तनाव, तबरीज, बुशेहर और चाबहार बने निशाना, होर्मुज स्ट्रेट और बहरीन तक सुरक्षा अलर्ट से मचा हड़कंप https://aajkhabar.in/tensions-have-escalated-following-fresh-us-strikes-on-iran-with-tabriz-bushehr-and-chabahar-targeted-security/ https://aajkhabar.in/tensions-have-escalated-following-fresh-us-strikes-on-iran-with-tabriz-bushehr-and-chabahar-targeted-security/#respond Mon, 20 Jul 2026 09:23:00 +0000 https://aajkhabar.in/international/tensions-have-escalated-following-fresh-us-strikes-on-iran-with-tabriz-bushehr-and-chabahar-targeted-security/ नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव लगातार अधिक गंभीर होता...

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नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव लगातार अधिक गंभीर होता जा रहा है। अमेरिका ने लगातार नौवीं रात ईरान के विभिन्न हिस्सों में नए हवाई हमले किए, जिससे पश्चिम एशिया में पहले से मौजूद तनाव और बढ़ गया। इस अभियान के दौरान ईरान के कई रणनीतिक क्षेत्रों में विस्फोटों की खबरें सामने आईं, जबकि होर्मुज स्ट्रेट में एक व्यापारिक जहाज में आग लगने और बहरीन में सुरक्षा अलर्ट जारी होने से पूरे क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति पर नए सवाल खड़े हो गए हैं।

अमेरिकी सैन्य अभियान के तहत उत्तर-पश्चिमी ईरान के तबरीज सहित कई स्थानों को निशाना बनाया गया। इसके अलावा दक्षिणी प्रांतों होरमोज़गान और बुशेहर में भी तेज धमाकों की सूचना मिली। दक्षिण-पूर्वी शहर चाबहार में कई विस्फोट दर्ज किए गए, जिसके बाद आसपास के कोनारक क्षेत्र में ईरान ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम को सक्रिय कर दिया। इससे स्पष्ट संकेत मिले कि संभावित नए हमलों की आशंका को देखते हुए ईरान अपनी सुरक्षा तैयारियों को लगातार मजबूत कर रहा है।

अमेरिकी सैन्य अधिकारियों का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है, जिनके जरिए वाणिज्यिक जहाजों और नागरिक नाविकों के लिए खतरा पैदा होने की आशंका जताई जा रही है। इसी रणनीति के तहत लगातार कई दिनों से हवाई अभियान जारी रखा गया है। हालांकि इन हमलों के बाद ईरान की ओर से भी सुरक्षा व्यवस्था को उच्च स्तर पर बनाए रखा गया है।

इसी दौरान होर्मुज स्ट्रेट से एक और चिंताजनक खबर सामने आई। ओमान के तट के निकट एक बड़े व्यापारिक जहाज में भीषण आग लग गई, जिससे समुद्री गतिविधियों को लेकर चिंता बढ़ गई। जहाज की पहचान और आग लगने के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति मार्गों की सुरक्षा को लेकर नई आशंकाएं पैदा कर दी हैं। होर्मुज स्ट्रेट विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है और यहां किसी भी प्रकार की अस्थिरता का असर वैश्विक बाजारों पर पड़ सकता है।

क्षेत्रीय हालात को देखते हुए बहरीन की राजधानी मनामा स्थित अमेरिकी दूतावास ने भी सुरक्षा अलर्ट जारी किया है। दूतावास ने अपने नागरिकों को सतर्क रहने, भीड़भाड़ वाले इलाकों से बचने और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है। संभावित सुरक्षा जोखिमों को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त एहतियाती कदम भी उठाए जा रहे हैं।

लगातार बढ़ते सैन्य अभियानों और सुरक्षा तैयारियों के बीच पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के संकेत फिलहाल दिखाई नहीं दे रहे हैं। दोनों पक्ष अपनी-अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत करने में लगे हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस बात पर बनी हुई है कि आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में आगे बढ़ते हैं। यदि सैन्य कार्रवाई का यह सिलसिला जारी रहता है तो इसका असर केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और कूटनीतिक संतुलन पर भी व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में पूरी दुनिया की निगाहें इस संघर्ष के अगले घटनाक्रम और संभावित राजनीतिक समाधान पर टिकी हुई हैं।

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उपराष्ट्रपति पद संभालने के दौरान चौथी बार पिता बने जेडी वेंस, बेटे एलेक नील वेंस के जन्म के साथ उषा वेंस ने बनाया ऐतिहासिक रिकॉर्ड https://aajkhabar.in/jd-vance-became-a-father-for-the-fourth-time-with-the-birth-of-son-alec-neil-vance-usha-vance-set-a-historic-r/ https://aajkhabar.in/jd-vance-became-a-father-for-the-fourth-time-with-the-birth-of-son-alec-neil-vance-usha-vance-set-a-historic-r/#respond Mon, 20 Jul 2026 09:20:00 +0000 https://aajkhabar.in/international/jd-vance-became-a-father-for-the-fourth-time-with-the-birth-of-son-alec-neil-vance-usha-vance-set-a-historic-r/ नई दिल्ली । अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और उनकी भारतीय मूल की पत्नी उषा...

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नई दिल्ली ।
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और उनकी भारतीय मूल की पत्नी उषा वेंस के परिवार में खुशियों का माहौल है। रविवार सुबह उषा वेंस ने एक बेटे को जन्म दिया, जिसके बाद वेंस परिवार में चौथे बच्चे का स्वागत हुआ। नवजात का नाम एलेक नील वेंस रखा गया है। इस खुशखबरी की जानकारी स्वयं जेडी वेंस ने सोशल मीडिया पर साझा करते हुए अपने परिवार की खुशी दुनिया के साथ बांटी। उन्होंने बताया कि मां और नवजात दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं तथा परिवार के अन्य बच्चे भी अपने छोटे भाई के आगमन से बेहद उत्साहित हैं।

जेडी वेंस और उषा वेंस पहले से तीन बच्चों के माता-पिता हैं। उनके बच्चों के नाम इवान, विवेक और मिराबेल हैं, जिनकी उम्र लगभग चार से नौ वर्ष के बीच है। चौथे बच्चे के जन्म के साथ परिवार का विस्तार हुआ है और यह अवसर उनके निजी जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। उपराष्ट्रपति ने अपने संदेश में चिकित्सकों और पूरे मेडिकल स्टाफ के प्रति विशेष आभार भी व्यक्त किया, जिन्होंने सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस जन्म के साथ उषा वेंस ने अमेरिकी राजनीतिक इतिहास में एक उल्लेखनीय रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया है। बताया जा रहा है कि 1870 के दशक के बाद पिछले डेढ़ सौ वर्षों में वह पहली ऐसी महिला बनी हैं, जिन्होंने अपने पति के अमेरिका के उपराष्ट्रपति पद पर रहते हुए बच्चे को जन्म दिया है। इस वजह से यह घटना केवल पारिवारिक खुशी तक सीमित नहीं रही, बल्कि ऐतिहासिक दृष्टि से भी चर्चा का विषय बन गई है।

जेडी वेंस ने अपने संदेश में लिखा कि उनके घर एक प्यारे बेटे का जन्म हुआ है और पूरा परिवार इस नए सदस्य के आगमन से बेहद प्रसन्न है। उन्होंने कहा कि उनके अन्य बच्चे अपने छोटे भाई से मिलने के लिए उत्साहित हैं। साथ ही उन्होंने वाशिंगटन स्थित वाल्टर रीड नेशनल मिलिट्री मेडिकल सेंटर के डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की सराहना करते हुए उनकी सेवाओं के लिए धन्यवाद व्यक्त किया।

इस वर्ष मार्च में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान जेडी वेंस ने हल्के-फुल्के अंदाज में चौथे बच्चे को लेकर अपनी और उषा वेंस के बीच हुई बातचीत का भी जिक्र किया था। उन्होंने बताया था कि उपराष्ट्रपति पद की जिम्मेदारी संभालने के दौरान उन्होंने अपनी पत्नी से चौथे बच्चे की इच्छा जताई थी। उस समय उषा ने मजाकिया अंदाज में कहा था कि या तो वह उपराष्ट्रपति बन सकते हैं या फिर चौथे बच्चे की योजना बना सकते हैं। बाद में जेडी वेंस ने मुस्कुराते हुए कहा था कि आखिरकार उन्हें दोनों खुशियां एक साथ मिल गईं।

बाद में उषा वेंस ने भी एक बातचीत में स्वीकार किया था कि तीसरे बच्चे के जन्म के बाद उन्हें लगा था कि उनका परिवार पूरा हो चुका है। हालांकि समय के साथ उन्होंने चौथे बच्चे के बारे में सकारात्मक सोच विकसित की और परिवार बढ़ाने के निर्णय पर सहमति जताई। इस फैसले के बाद अब उनका परिवार चार बच्चों के साथ नए अध्याय की शुरुआत कर रहा है।

भारतीय मूल की उषा वेंस का जन्म और पालन-पोषण अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य के सैन डिएगो में हुआ। उनके माता-पिता भारत से अमेरिका जाकर बसे थे। उनके पिता मैकेनिकल इंजीनियर हैं, जबकि मां मॉलिक्यूलर बायोलॉजिस्ट के रूप में कार्य कर चुकी हैं। उषा और जेडी वेंस की मुलाकात वर्ष 2010 में येल लॉ स्कूल में पढ़ाई के दौरान हुई थी। दोनों ने बाद में विवाह किया और अब चार बच्चों के साथ अपने पारिवारिक जीवन का नया अध्याय शुरू किया है।

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भारतीय नागरिकों से यात्रा टालने और उपलब्ध उड़ानों से जल्द देश छोड़ने की अपील.. https://aajkhabar.in/appeal-to-indian-citizens-to-defer-travel-and-leave-the-country-soon-via-available-flights/ https://aajkhabar.in/appeal-to-indian-citizens-to-defer-travel-and-leave-the-country-soon-via-available-flights/#respond Mon, 20 Jul 2026 09:13:00 +0000 https://aajkhabar.in/international/appeal-to-indian-citizens-to-defer-travel-and-leave-the-country-soon-via-available-flights/ नई दिल्ली । ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने क्षेत्र की सुरक्षा...

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नई दिल्ली । ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति को एक बार फिर गंभीर बना दिया है। लगातार हो रही सैन्य कार्रवाई और अस्थिर हालात के बीच भारत सरकार ने अपने नागरिकों के लिए अहम यात्रा सलाह जारी करते हुए उन्हें अतिरिक्त सतर्कता बरतने को कहा है। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए भारतीय नागरिक अनावश्यक रूप से ईरान की यात्रा करने से बचें और जब तक हालात सामान्य नहीं हो जाते, अपनी यात्रा स्थगित रखें।

भारतीय दूतावास की ओर से जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि हाल के दिनों में ईरान के विभिन्न हिस्सों में सुरक्षा जोखिम लगातार बढ़ा है। इसी कारण उन भारतीय नागरिकों को विशेष सलाह दी गई है जो किसी भी उद्देश्य से ईरान जाने की योजना बना रहे हैं। दूतावास का कहना है कि मौजूदा हालात में यात्रा टालना ही सबसे सुरक्षित विकल्प होगा। सुरक्षा स्थिति में सुधार होने के बाद ही यात्रा संबंधी निर्णय लेने पर विचार किया जाना चाहिए।

एडवाइजरी में उन भारतीय नागरिकों के लिए भी महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं जो पहले से ईरान में मौजूद हैं। दूतावास ने उन्हें उपलब्ध वाणिज्यिक उड़ानों का उपयोग करते हुए अस्थायी रूप से ईरान छोड़ने पर विचार करने की सलाह दी है। इसका उद्देश्य किसी भी संभावित सुरक्षा जोखिम से भारतीय नागरिकों को सुरक्षित रखना है। साथ ही यह भी कहा गया है कि यात्रा संबंधी निर्णय लेते समय उपलब्ध विकल्पों और स्थानीय परिस्थितियों का ध्यान रखा जाए।

जो भारतीय नागरिक फिलहाल ईरान में ही रहने का निर्णय लेते हैं, उन्हें अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। दूतावास ने कहा है कि सभी नागरिक स्थानीय घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए रखें और किसी भी प्रकार की सैन्य गतिविधि वाले क्षेत्रों से दूर रहें। विशेष रूप से ईरान के दक्षिणी तटीय इलाकों और संवेदनशील सैन्य क्षेत्रों में जाने से बचने की सलाह दी गई है। इसके अलावा स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी सभी सुरक्षा निर्देशों और प्रतिबंधों का पूरी तरह पालन करने को कहा गया है।

भारतीय दूतावास ने ईरान में मौजूद सभी भारतीय नागरिकों से जल्द से जल्द अपना पंजीकरण कराने की अपील भी की है। जिन लोगों ने अब तक दूतावास के पास अपना विवरण दर्ज नहीं कराया है, उन्हें तत्काल पंजीकरण कराने के लिए कहा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में उनसे आसानी से संपर्क किया जा सके और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा सके। साथ ही नागरिकों से दूतावास की आधिकारिक सूचनाओं पर नियमित नजर बनाए रखने की भी सलाह दी गई है।

क्षेत्र में जारी तनाव के कारण सुरक्षा एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। भारत सरकार भी अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए हालात की लगातार समीक्षा कर रही है। यदि क्षेत्रीय परिस्थितियों में कोई बड़ा बदलाव होता है तो उसके अनुरूप नई सलाह और आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं। फिलहाल सरकार का जोर भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, उन्हें जोखिम वाले क्षेत्रों से दूर रखने और आवश्यक होने पर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की तैयारी बनाए रखने पर है। ऐसी स्थिति में नागरिकों से अपील की गई है कि वे अफवाहों से बचें, केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें और जारी सुरक्षा निर्देशों का पूरी तरह पालन करें।

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पश्चिमी ईरान में 5.5 तीव्रता का भूकंप, 10 किलोमीटर गहराई में था केंद्र; फिलहाल बड़े नुकसान की सूचना नहीं, निगरानी जारी https://aajkhabar.in/55-magnitude-earthquake-in-western-iran-epicenter-at-a-depth-of-10-kilometers-no-reports-of-major-damage-so-fa/ https://aajkhabar.in/55-magnitude-earthquake-in-western-iran-epicenter-at-a-depth-of-10-kilometers-no-reports-of-major-damage-so-fa/#respond Mon, 20 Jul 2026 09:08:00 +0000 https://aajkhabar.in/international/55-magnitude-earthquake-in-western-iran-epicenter-at-a-depth-of-10-kilometers-no-reports-of-major-damage-so-fa/ नई दिल्ली । पश्चिमी ईरान में सोमवार को आए 5.5 तीव्रता के भूकंप ने एक...

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नई दिल्ली । पश्चिमी ईरान में सोमवार को आए 5.5 तीव्रता के भूकंप ने एक बार फिर क्षेत्र की भूकंपीय संवेदनशीलता को उजागर कर दिया। सुबह दर्ज किए गए इस भूकंप के झटके काहरिज और जावनरुद सहित आसपास के कई इलाकों में महसूस किए गए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार भूकंप का केंद्र जमीन से लगभग 10 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था। झटकों के बाद लोगों में कुछ समय के लिए दहशत का माहौल बना, हालांकि अब तक किसी बड़े जान-माल के नुकसान या व्यापक तबाही की पुष्टि नहीं हुई है।

यूरोपियन-मेडिटेरेनियन सीस्मोलॉजिकल सेंटर के अनुसार भूकंप का केंद्र काहरिज शहर से लगभग 54 किलोमीटर पश्चिम में स्थित था। वहीं जावनरुद शहर से यह लगभग 33 किलोमीटर दक्षिण की ओर दर्ज किया गया। दोनों क्षेत्रों में लोगों ने झटकों को स्पष्ट रूप से महसूस किया। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारी प्रभावित इलाकों की स्थिति का लगातार आकलन कर रहे हैं ताकि किसी भी संभावित नुकसान की सही जानकारी जुटाई जा सके।

भूकंप के तुरंत बाद कई स्थानों पर लोग एहतियात के तौर पर घरों और इमारतों से बाहर निकल आए। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। राहत एवं बचाव एजेंसियां भी सतर्क हैं और स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। फिलहाल किसी बड़े ढांचागत नुकसान, सड़क बाधित होने या जनहानि की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

भूकंप के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे भी सामने आए। कुछ पोस्ट में इस घटना को ईरान के परमाणु कार्यक्रम या भूमिगत गतिविधियों से जोड़ने की कोशिश की गई। हालांकि अब तक किसी भी अंतरराष्ट्रीय भूकंप निगरानी संस्था या वैज्ञानिक विशेषज्ञ ने ऐसे दावों की पुष्टि नहीं की है। विशेषज्ञों का कहना है कि उपलब्ध भूकंपीय आंकड़े इस घटना को एक सामान्य प्राकृतिक भूकंप के रूप में ही दर्शाते हैं और बिना वैज्ञानिक प्रमाण के किसी अन्य कारण से जोड़ना उचित नहीं होगा।

ईरान लंबे समय से दुनिया के सबसे अधिक भूकंप प्रभावित देशों में गिना जाता है। इसका प्रमुख कारण इसकी भौगोलिक स्थिति है। देश ऐसे क्षेत्र में स्थित है जहां अरब और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटें लगातार एक-दूसरे की ओर बढ़ रही हैं। इन प्लेटों के बीच बनने वाला दबाव समय-समय पर भूकंप के रूप में बाहर निकलता है, जिसके कारण यहां मध्यम से लेकर शक्तिशाली भूकंप आते रहते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे क्षेत्रों में भूकंप का पूरी तरह पूर्वानुमान लगाना संभव नहीं है, इसलिए मजबूत निर्माण, प्रभावी आपदा प्रबंधन और समय पर चेतावनी व्यवस्था ही नुकसान को कम करने का सबसे प्रभावी उपाय है। स्थानीय प्रशासन भी प्रभावित इलाकों में स्थिति की निगरानी कर रहा है और यदि किसी प्रकार की क्षति सामने आती है तो आवश्यक राहत कार्य तुरंत शुरू किए जाएंगे।

ताजा भूकंप ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता और आपदा तैयारियों का लगातार मजबूत रहना कितना आवश्यक है। फिलहाल संबंधित एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों का विस्तृत सर्वेक्षण कर रही हैं और स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

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जंग के साए में कूटनीति, ट्रंप के दूत से मुलाकात को लेकर ईरानी विदेश मंत्री ने किए चौंकाने वाले दावे https://aajkhabar.in/iran-united-states-abbas-araghchi-donald-trump-middle-east-crisi/ https://aajkhabar.in/iran-united-states-abbas-araghchi-donald-trump-middle-east-crisi/#respond Mon, 20 Jul 2026 07:31:00 +0000 https://aajkhabar.in/international/iran-united-states-abbas-araghchi-donald-trump-middle-east-crisi/ नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास...

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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका के साथ हुई बातचीत को लेकर बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के साथ वार्ता ऐसे माहौल में हुई जहां किसी भी समय बमबारी शुरू होने का खतरा बना हुआ था। अराघची के इस बयान ने यह संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद भले जारी रहा हो लेकिन जमीन पर हालात बेहद तनावपूर्ण और अस्थिर बने हुए थे।

एक साक्षात्कार में अराघची ने कहा कि उन्होंने बातचीत के दौरान विटकॉफ से सवाल किया था कि क्या वह कभी ऐसी वार्ता का हिस्सा बने हैं जहां हर पल हवाई हमले की आशंका बनी रहती हो। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह बातचीत किस स्थान या किस दौर की थी लेकिन उनके बयान से उस समय की गंभीर स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। ईरानी विदेश मंत्री का कहना था कि युद्ध जैसे माहौल में भी बातचीत का रास्ता खुला रखना आसान नहीं होता।

अराघची ने यह भी दोहराया कि ईरान किसी भी तरह के दबाव के सामने झुकने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि तेहरान अपने राष्ट्रीय हितों और परमाणु कार्यक्रम को लेकर किसी भी प्रकार का समझौता केवल दबाव या धमकी के आधार पर नहीं करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की स्थिति की तुलना वेनेजुएला से नहीं की जा सकती और उनका देश बाहरी दबाव में अपने फैसले नहीं बदलेगा।

रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच पिछले कई महीनों से अलग-अलग स्तर पर बातचीत होती रही है। औपचारिक बैठकों के अलावा दोनों पक्षों के बीच सीधे संदेशों के जरिए भी संपर्क बनाए रखने की कोशिश की गई ताकि तनाव को कम किया जा सके। इसके बावजूद दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी और क्षेत्रीय घटनाक्रम ने हालात को और अधिक जटिल बना दिया है।

इसी बीच क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। अमेरिका ने हाल के दिनों में ईरान से जुड़े कई रणनीतिक ठिकानों पर हवाई कार्रवाई की है। अमेरिकी सेना का कहना है कि यह कार्रवाई अपने सैनिकों पर हुए हमलों के जवाब में की गई। दूसरी ओर ईरान ने भी क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देशों और सैन्य हितों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है। कुवैत बहरीन और जॉर्डन जैसे देशों ने संभावित मिसाइल और ड्रोन हमलों को देखते हुए अपनी वायु रक्षा प्रणाली को हाई अलर्ट पर रखा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ती तनातनी अंतरराष्ट्रीय बाजार और तेल आपूर्ति के लिए भी चिंता का विषय बनी हुई है।

हालांकि कूटनीतिक संपर्क अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं लेकिन मौजूदा हालात यह संकेत देते हैं कि बातचीत और सैन्य टकराव समानांतर रूप से चल रहे हैं। ऐसे में पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या आने वाले दिनों में दोनों देश तनाव कम करने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाते हैं या फिर यह संकट और गहरा होता है।

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अस्पताल की कथित गलती ने बदल दी दो परिवारों की किस्मत 38 साल बाद डीएनए टेस्ट से खुला जन्म का सबसे बड़ा राज https://aajkhabar.in/dna-test-hospital-mix-up-north-dakota-medical-negligence-usa-news/ https://aajkhabar.in/dna-test-hospital-mix-up-north-dakota-medical-negligence-usa-news/#respond Mon, 20 Jul 2026 06:45:00 +0000 https://aajkhabar.in/international/dna-test-hospital-mix-up-north-dakota-medical-negligence-usa-news/ नई दिल्ली। अमेरिका के नॉर्थ डकोटा राज्य से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने...

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नई दिल्ली। अमेरिका के नॉर्थ डकोटा राज्य से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने चिकित्सा व्यवस्था और अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि वर्ष 1988 में एक अस्पताल की कथित लापरवाही के कारण जन्म के तुरंत बाद दो नवजात बच्चों की अदला-बदली हो गई और दोनों अपने जैविक माता-पिता की बजाय दूसरे परिवारों के साथ बड़े हुए। करीब 38 वर्ष तक किसी को इस गलती का पता नहीं चला। आखिरकार एक सामान्य डीएनए टेस्ट ने ऐसा सच उजागर किया जिसने दो परिवारों की पूरी दुनिया बदल दी।

रिपोर्ट के अनुसार यह मामला नॉर्थ डकोटा के ग्राफ्टन शहर स्थित यूनिटी मेडिकल सेंटर से जुड़ा है। परिवारों का कहना है कि 26 जनवरी 1988 को अस्पताल में केवल दो बच्चों का जन्म हुआ था। आरोप है कि अस्पताल से छुट्टी के समय दोनों नवजातों को गलत परिवारों के साथ भेज दिया गया। इसके बाद दोनों बच्चे अपने नए परिवारों में पले बढ़े और उन्हें कभी इस बात का अंदाजा नहीं हुआ कि उनके जैविक माता-पिता कोई और हैं।

समय के साथ दोनों ने सामान्य जीवन जिया। पढ़ाई की नौकरी की परिवार बसाया और अपने रिश्तों को उसी रूप में स्वीकार किया जैसा उन्हें बचपन से बताया गया था। हालांकि उनमें से एक व्यक्ति को बचपन से ही यह महसूस होता था कि उसका चेहरा और शारीरिक बनावट परिवार के अन्य सदस्यों से काफी अलग है। उस समय इसे सामान्य संयोग मान लिया गया लेकिन वर्षों बाद यही संदेह एक बड़े खुलासे की वजह बना।

करीब दो वर्ष पहले दूसरे व्यक्ति ने अपने पारिवारिक इतिहास के बारे में अधिक जानकारी हासिल करने के उद्देश्य से डीएनए टेस्ट कराया। जांच रिपोर्ट में सामने आए परिणाम पूरी तरह अप्रत्याशित थे। रिपोर्ट ने ऐसे जैविक रिश्तों की ओर संकेत किया जिनके बारे में उन्हें पहले कोई जानकारी नहीं थी। इसके बाद आगे की जांच और पारिवारिक रिकॉर्ड की पड़ताल में कथित अदला-बदली की पूरी कहानी सामने आने लगी। परिवारों का दावा है कि जन्म के समय अस्पताल की पहचान पट्टी में दर्ज विवरण भी उनकी आशंकाओं को मजबूत करता है।

सच्चाई सामने आने के बाद दोनों परिवारों के लिए भावनात्मक स्थिति बेहद कठिन हो गई। जिन लोगों को वे जीवनभर अपना माता-पिता और भाई-बहन मानते रहे थे उनके साथ रिश्ते तो बने रहे लेकिन अचानक यह जानना कि जैविक परिवार कोई और है किसी बड़े मानसिक आघात से कम नहीं था। दोनों पक्षों ने अपने वास्तविक परिवारों से मुलाकात की लेकिन लगभग चार दशक बाद नए रिश्तों को स्वीकार करना आसान नहीं रहा।

परिवारों का आरोप है कि उन्होंने पहले अस्पताल के साथ बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की कोशिश की लेकिन सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद अस्पताल के खिलाफ अदालत में मुकदमा दायर किया गया। उनका कहना है कि अस्पताल की कथित लापरवाही ने दो परिवारों का जीवन पूरी तरह बदल दिया और उन्हें दशकों तक अपने वास्तविक रिश्तों से दूर रखा।

वहीं अस्पताल ने इस मामले में परिवारों की भावनात्मक पीड़ा पर संवेदना जताई है लेकिन अपने ऊपर लगाए गए आरोपों से इनकार किया है। अस्पताल ने अदालत से मामला खारिज करने की मांग की है। अब अंतिम निर्णय न्यायालय में पेश किए जाने वाले सबूतों और सुनवाई के आधार पर होगा।

यह मामला केवल एक संभावित प्रशासनिक गलती का नहीं बल्कि पहचान रिश्तों और परिवार जैसी गहरी मानवीय भावनाओं का भी है। यदि अदालत में आरोप साबित होते हैं तो यह मामला चिकित्सा इतिहास के सबसे गंभीर लापरवाही के मामलों में गिना जा सकता है और भविष्य में अस्पतालों की सुरक्षा प्रक्रियाओं को और सख्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण उदाहरण भी बन सकता है।

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अमेरिका में हरी मिर्च के दाम सुनकर चौंके भारतीय एक छोटे पैकेट की कीमत ने सोशल मीडिया पर मचा दी बहस https://aajkhabar.in/green-chilli-usa-viral-video-grocery-prices-indian-food/ https://aajkhabar.in/green-chilli-usa-viral-video-grocery-prices-indian-food/#respond Mon, 20 Jul 2026 06:28:00 +0000 https://aajkhabar.in/international/green-chilli-usa-viral-video-grocery-prices-indian-food/ नई दिल्ली। भारतीय रसोई में हरी मिर्च का महत्व किसी से छिपा नहीं है। दाल...

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नई दिल्ली। भारतीय रसोई में हरी मिर्च का महत्व किसी से छिपा नहीं है। दाल सब्जी चटनी सलाद या पराठा लगभग हर व्यंजन में इसका इस्तेमाल आम बात है। देश के कई हिस्सों में तो सब्जी खरीदते समय दुकानदार कुछ हरी मिर्च बिना अतिरिक्त पैसे लिए ही थैले में रख देता है। लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने इसी हरी मिर्च को चर्चा का विषय बना दिया है। वीडियो में अमेरिका में रहने वाली एक भारतीय महिला वहां बिकने वाली हरी मिर्च की कीमत दिखाती है जिसे देखकर बड़ी संख्या में भारतीय हैरान रह गए।

वीडियो में महिला एक छोटा पैकेट दिखाती है जिसमें लगभग 114 ग्राम हरी मिर्च है। उसके अनुसार इस पैकेट में करीब 12 से 13 मिर्च हैं और इसकी कीमत भारतीय मुद्रा में लगभग 400 रुपये के बराबर पड़ती है। महिला का दावा है कि यदि इसी अनुपात से एक किलोग्राम की कीमत निकाली जाए तो यह करीब 3500 रुपये तक पहुंच सकती है। वीडियो में वह हल्के फुल्के अंदाज में कहती है कि भारत में इतनी मिर्च तो कई बार सब्जी वाला मुफ्त में दे देता है। यही तुलना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई और लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई।

वीडियो सामने आने के बाद भारतीय यूजर्स ने अलग अलग प्रतिक्रियाएं दीं। कई लोगों ने लिखा कि भारत के अधिकांश शहरों में 20 से 30 रुपये में अच्छी मात्रा में हरी मिर्च मिल जाती है। कुछ ने मजाक करते हुए कहा कि इतने पैसों में भारत में पूरे परिवार के लिए सब्जियां खरीदी जा सकती हैं। वहीं कुछ लोगों ने सलाह दी कि विदेश जाने वाले भारतीय अपने साथ हरी मिर्च ले जाया करें।

हालांकि कई यूजर्स ने इस तुलना को अधूरा भी बताया। उनका कहना था कि केवल डॉलर को रुपये में बदलकर किसी वस्तु की कीमत की तुलना करना सही तस्वीर पेश नहीं करता। अमेरिका में औसत आय भारत की तुलना में कहीं अधिक है और वहां की क्रय शक्ति भी अलग है। इसलिए किसी भी वस्तु की वास्तविक लागत को समझने के लिए वहां की आय जीवनयापन का खर्च कर व्यवस्था और स्थानीय बाजार की स्थिति को भी ध्यान में रखना जरूरी होता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका में भारतीय भोजन में इस्तेमाल होने वाली कुछ विशेष किस्म की हरी मिर्च हर जगह आसानी से उपलब्ध नहीं होती। कई बार इन्हें दूसरे क्षेत्रों या देशों से आयात किया जाता है। इसके अलावा पैकिंग परिवहन कोल्ड स्टोरेज और श्रम लागत जैसी कई वजहें भी कीमत बढ़ा देती हैं। यही कारण है कि कुछ भारतीय खाद्य सामग्री वहां अपेक्षाकृत महंगी दिखाई देती है।

यह भी ध्यान देने योग्य है कि अमेरिका के अलग अलग शहरों और स्टोर्स में कीमतें अलग हो सकती हैं। भारतीय ग्रॉसरी स्टोर एशियन मार्केट और बड़े सुपरमार्केट में एक ही वस्तु अलग कीमत पर मिल सकती है। इसी तरह मौसम और उपलब्धता के अनुसार दाम बदलते रहते हैं। इसलिए किसी एक वीडियो में दिखाई गई कीमत को पूरे अमेरिका का मानक नहीं माना जा सकता।

भारत में भी हरी मिर्च की कीमत पूरे साल एक जैसी नहीं रहती। मौसम फसल और आपूर्ति के अनुसार इसके दाम बदलते रहते हैं। कई बार यह बेहद सस्ती होती है तो कई बार कीमत काफी बढ़ जाती है। यह वायरल वीडियो केवल हरी मिर्च की कीमत का नहीं बल्कि भारत और विदेश की जीवनशैली तथा खर्च के अंतर पर भी चर्चा छेड़ रहा है। यही वजह है कि यह वीडियो लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो गया है।

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ईरान का सख्त संदेश परमाणु कार्यक्रम पर नहीं होगा समझौता विदेश मंत्री बोले होर्मुज हमारी सबसे बड़ी ताकत https://aajkhabar.in/iran-abbas-araghchi-strait-of-hormuz-us-iran-tensions-middle-east-news/ https://aajkhabar.in/iran-abbas-araghchi-strait-of-hormuz-us-iran-tensions-middle-east-news/#respond Mon, 20 Jul 2026 06:04:00 +0000 https://aajkhabar.in/international/iran-abbas-araghchi-strait-of-hormuz-us-iran-tensions-middle-east-news/ नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री...

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नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक बार फिर बेहद कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजरायल ईरान को न तो धमकी देकर झुका सकते हैं और न ही किसी तरह का लालच देकर उसकी नीतियां बदलवा सकते हैं। अराघची ने जोर देकर कहा कि ईरान अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रम को लेकर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया अब समझ चुकी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान की सबसे बड़ी रणनीतिक ताकतों में से एक है।

अराघची ने युद्ध के शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि हालात इतने गंभीर थे कि सरकार और सेना के शीर्ष अधिकारियों के बीच संपर्क पूरी तरह टूट गया था। संचार व्यवस्था बाधित हो गई थी और कई घंटों तक यह स्पष्ट नहीं था कि कौन सुरक्षित है और कौन नहीं। उनके अनुसार उस समय पूरे नेतृत्व तंत्र के सामने सबसे बड़ी चुनौती हालात को समझना और प्रशासनिक नियंत्रण बनाए रखना था।

विदेश मंत्री ने दावा किया कि संघर्ष शुरू होने से पहले कई अंतरराष्ट्रीय माध्यमों से ईरान पर दबाव बनाने और उसे परमाणु कार्यक्रम रोकने के लिए मनाने की कोशिश की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि बातचीत के दौरान विभिन्न प्रस्तावों और प्रलोभनों के जरिए ईरान को अपने रुख से पीछे हटाने का प्रयास हुआ लेकिन तेहरान ने इसे पूरी तरह अस्वीकार कर दिया। अराघची ने कहा कि ईरान का यूरेनियम संवर्धन किसी सौदे का विषय नहीं है क्योंकि इसके लिए देश ने वर्षों तक आर्थिक प्रतिबंध झेले हैं और कई परमाणु वैज्ञानिकों ने अपनी जान गंवाई है।

होर्मुज जलडमरूमध्य का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल एक समुद्री मार्ग नहीं बल्कि ईरान की रणनीतिक क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस व्यापार इसी मार्ग से होकर गुजरता है इसलिए इसकी सुरक्षा और नियंत्रण का वैश्विक ऊर्जा बाजार पर सीधा प्रभाव पड़ता है। अराघची के अनुसार हालिया संघर्ष ने यह दिखा दिया कि इस क्षेत्र में ईरान की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

ईरान के भीतर चल रही राजनीतिक बहस पर भी विदेश मंत्री ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि युद्ध और संघर्ष के बावजूद देश की मूल नीतियों में कोई बदलाव नहीं आया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि मित्र और विरोधी दोनों यह स्वीकार कर रहे हैं कि हालिया घटनाओं के बाद ईरान पहले की तुलना में अधिक मजबूत होकर उभरा है। उनके अनुसार कठिन परिस्थितियों ने देश की सैन्य और राजनीतिक क्षमता को और मजबूती दी है।

हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर लंबे समय से चिंता बनी रहती है क्योंकि यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर व्यापक असर डाल सकता है। इसी कारण अमेरिका और उसके सहयोगी देश इस क्षेत्र की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए रखते हैं।

अराघची के ताजा बयान से साफ है कि ईरान अपनी रणनीतिक और परमाणु नीतियों पर फिलहाल किसी नरमी के संकेत नहीं दे रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति और अमेरिका ईरान संबंधों पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए कूटनीतिक संवाद और तनाव कम करने के प्रयास पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण होंगे।

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FIFA फाइनल की ट्रॉफी सेरेमनी में डोनाल्ड ट्रंप की भारी फजीहत, जश्न के बीच मंच से किनारे किए गए https://aajkhabar.in/us-president-donald-trump-embarrassment-fifa-final-trophy-ceremony/ https://aajkhabar.in/us-president-donald-trump-embarrassment-fifa-final-trophy-ceremony/#respond Mon, 20 Jul 2026 03:56:00 +0000 https://aajkhabar.in/international/us-president-donald-trump-embarrassment-fifa-final-trophy-ceremony/ नई दिल्‍ली । फीफा मेन्स फुटबॉल वर्ल्ड कप का फाइनल मैच एक बड़े ड्रामे के...

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नई दिल्‍ली । फीफा मेन्स फुटबॉल वर्ल्ड कप का फाइनल मैच एक बड़े ड्रामे के साथ खत्म हुआ. न्यू यॉर्क न्यू जर्सी स्टेडियम में वर्ल्ड कप ट्रॉफी सेरेमनी के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लोगों की गुस्से भरी हूटिंग का सामना करना पड़ा. लोगों ने हताशा भरी आवाजों के साथ उनका वेलकम किया.

फीफा वर्ल्ड कप में इस बार स्पेन ने अर्जेंटीना को हराकर जीत का ताज अपने नाम किया. इस दौरान जैसे ही ट्रंप और फीफा प्रमुख जियानी इन्फेंटिनो खिलाड़ियों को सम्मानित करने के लिए मैदान पर उतरे, दर्शकों ने गुस्से में हूटिंग शुरू कर दी. हालांकि, ये हूटिंग ज्यादा देर नहीं चली. जब राष्ट्रपति ट्रंप और इन्फेंटिनो ने फाइनल खेलने वाले खिलाड़ियों और कोचों को मेडल पहनाना शुरू किया, तब तक दर्शकों का गुस्सा शांत हो चुका था और हूटिंग पूरी तरह रुक गई. इसके बाद दोनों नेताओं ने विनर टीम को वर्ल्ड कप ट्रॉफी सौंपी.

कैप्टन रोड्री के ट्रॉफी उठाने से पहले मंच पर रहे ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस ऐतिहासिक फाइनल मैच को देखने के लिए हेलीकॉप्टर से स्टेडियम पहुंचे थे. मैच के बाद वो पोडियम पर स्पेन के खिलाड़ियों के साथ ही खड़े रहे. इसके बाद, जब स्पेन के कप्तान रोड्री सैकड़ों फोटोग्राफरों और कैमरों के सामने वर्ल्ड कप की ट्रॉफी उठाने वाले थे, तब ट्रंप को फीफा चीफ ने मंच से एक किनारे किया.

ग्रुप स्टेज में ट्रंप के एक फोन कॉल से मचा था बवाल
दरअसल, ग्रुप स्टेज के एक मैच के दौरान अमेरिका का मुकाबला बोस्निया और हर्जेगोविना से था. इस मैच में अमेरिकी स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन को रेफरी ने रेड कार्ड दिखा दिया था. इस फैसले से नाराज होकर राष्ट्रपति ट्रंप ने सीधे फीफा प्रमुख जियानी इन्फेंटिनो को फोन लगा दिया था. ट्रंप ने इन्फेंटिनो से बालोगुन को दिए गए रेड कार्ड के फैसले का दोबारा रिव्यू करने को कहा था.

किसी देश के राष्ट्राध्यक्ष के खेल के नियमों और फैसलों में सीधे दखल देने की इस कोशिश की दुनिया भर के फुटबॉल विशेषज्ञों और फैन्स ने तीखी आलोचना की थी. ऐसे में इस विवाद की गूंज फाइनल की अवॉर्ड सेरेमनी में भी साफ दिखाई दी. यही वजह थी कि फाइनल के दिन स्टेडियम में मौजूद फुटबॉल लवर्स उनके खिलाफ हूटिंग कर रहे थे.

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