July 20, 2026

ईरान का सख्त संदेश परमाणु कार्यक्रम पर नहीं होगा समझौता विदेश मंत्री बोले होर्मुज हमारी सबसे बड़ी ताकत

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नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक बार फिर बेहद कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजरायल ईरान को न तो धमकी देकर झुका सकते हैं और न ही किसी तरह का लालच देकर उसकी नीतियां बदलवा सकते हैं। अराघची ने जोर देकर कहा कि ईरान अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रम को लेकर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया अब समझ चुकी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान की सबसे बड़ी रणनीतिक ताकतों में से एक है।

अराघची ने युद्ध के शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि हालात इतने गंभीर थे कि सरकार और सेना के शीर्ष अधिकारियों के बीच संपर्क पूरी तरह टूट गया था। संचार व्यवस्था बाधित हो गई थी और कई घंटों तक यह स्पष्ट नहीं था कि कौन सुरक्षित है और कौन नहीं। उनके अनुसार उस समय पूरे नेतृत्व तंत्र के सामने सबसे बड़ी चुनौती हालात को समझना और प्रशासनिक नियंत्रण बनाए रखना था।

विदेश मंत्री ने दावा किया कि संघर्ष शुरू होने से पहले कई अंतरराष्ट्रीय माध्यमों से ईरान पर दबाव बनाने और उसे परमाणु कार्यक्रम रोकने के लिए मनाने की कोशिश की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि बातचीत के दौरान विभिन्न प्रस्तावों और प्रलोभनों के जरिए ईरान को अपने रुख से पीछे हटाने का प्रयास हुआ लेकिन तेहरान ने इसे पूरी तरह अस्वीकार कर दिया। अराघची ने कहा कि ईरान का यूरेनियम संवर्धन किसी सौदे का विषय नहीं है क्योंकि इसके लिए देश ने वर्षों तक आर्थिक प्रतिबंध झेले हैं और कई परमाणु वैज्ञानिकों ने अपनी जान गंवाई है।

होर्मुज जलडमरूमध्य का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल एक समुद्री मार्ग नहीं बल्कि ईरान की रणनीतिक क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस व्यापार इसी मार्ग से होकर गुजरता है इसलिए इसकी सुरक्षा और नियंत्रण का वैश्विक ऊर्जा बाजार पर सीधा प्रभाव पड़ता है। अराघची के अनुसार हालिया संघर्ष ने यह दिखा दिया कि इस क्षेत्र में ईरान की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

ईरान के भीतर चल रही राजनीतिक बहस पर भी विदेश मंत्री ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि युद्ध और संघर्ष के बावजूद देश की मूल नीतियों में कोई बदलाव नहीं आया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि मित्र और विरोधी दोनों यह स्वीकार कर रहे हैं कि हालिया घटनाओं के बाद ईरान पहले की तुलना में अधिक मजबूत होकर उभरा है। उनके अनुसार कठिन परिस्थितियों ने देश की सैन्य और राजनीतिक क्षमता को और मजबूती दी है।

हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर लंबे समय से चिंता बनी रहती है क्योंकि यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर व्यापक असर डाल सकता है। इसी कारण अमेरिका और उसके सहयोगी देश इस क्षेत्र की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए रखते हैं।

अराघची के ताजा बयान से साफ है कि ईरान अपनी रणनीतिक और परमाणु नीतियों पर फिलहाल किसी नरमी के संकेत नहीं दे रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति और अमेरिका ईरान संबंधों पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए कूटनीतिक संवाद और तनाव कम करने के प्रयास पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण होंगे।

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