September 13, 2026

हनुमान जी को चोला चढ़ाते समय न करें ये गलतियां, जानें क्या चढ़ाएं और किन बातों का रखें खास ध्यान

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नई दिल्ली । हनुमान जी को चोला चढ़ाने की परंपरा सनातन धर्म में विशेष धार्मिक महत्व रखती है। भक्तों की मान्यता है कि श्रद्धा और विधि विधान के साथ बजरंगबली को चोला अर्पित करने से मन को शांति मिलती है और जीवन में आने वाली बाधाओं का सामना करने का आत्मबल मिलता है। विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार का दिन हनुमान जी की पूजा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इन्हीं दिनों भक्त बड़ी संख्या में मंदिरों में पहुंचकर भगवान हनुमान को सिंदूर का चोला चढ़ाते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंगलवार को सुबह स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर हनुमान मंदिर जाना शुभ माना जाता है। पूजा से पहले भगवान का ध्यान करते हुए अपनी श्रद्धा के अनुसार संकल्प लिया जा सकता है। इसके बाद हनुमान जी की प्रतिमा की पूजा की जाती है और चोला अर्पित करने की प्रक्रिया शुरू होती है। कई मंदिरों में चोला चढ़ाने की अलग परंपरा और व्यवस्था होती है इसलिए वहां के पुजारी के निर्देश के अनुसार ही चोला चढ़ाना उचित माना जाता है।

हनुमान जी को चोला चढ़ाने में सिंदूर और चमेली के तेल का विशेष महत्व बताया जाता है। मान्यता है कि सिंदूर को चमेली के तेल में मिलाकर भगवान को अर्पित करने से भक्त की श्रद्धा पूर्ण होती है। इसके साथ लाल फूल अर्पित किए जा सकते हैं और भगवान को गुड़ तथा चने का भोग लगाने की परंपरा भी कई जगह प्रचलित है। पूजा के दौरान हनुमान चालीसा का पाठ और राम नाम का स्मरण करना भी शुभ माना जाता है।

चोला चढ़ाने से पहले प्रतिमा की साफ सफाई और पूजा की तैयारी श्रद्धा के साथ की जाती है। चोला अर्पित करते समय मन में सकारात्मक विचार रखने और भगवान का ध्यान करने की परंपरा है। भक्त अपनी मनोकामना भगवान के सामने रखते हैं और उनसे परिवार की सुख शांति तथा जीवन में आने वाली परेशानियों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं।

शनिवार को भी हनुमान जी को चोला चढ़ाने की विशेष मान्यता है। शनि संबंधी परेशानियों से राहत पाने के लिए कई भक्त शनिवार को हनुमान जी की पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान हनुमान अपने भक्तों को भय और संकट से बचाने वाले माने जाते हैं। हालांकि चोला चढ़ाने की मान्यताएं अलग अलग क्षेत्रों और मंदिरों में अलग हो सकती हैं इसलिए स्थानीय परंपरा का सम्मान करना जरूरी है।

हनुमान जी को चोला चढ़ाते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। पूजा सामग्री साफ और शुद्ध होनी चाहिए। चोला चढ़ाने से पहले प्रतिमा को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी पदार्थ का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। मंदिर में यदि चोला चढ़ाने के लिए विशेष नियम निर्धारित हैं तो उनका पालन करना चाहिए। कई मंदिरों में भक्त स्वयं प्रतिमा पर चोला नहीं चढ़ाते बल्कि पुजारी के माध्यम से यह सेवा कराई जाती है।

धार्मिक दृष्टि से हनुमान जी की पूजा केवल बाहरी श्रृंगार तक सीमित नहीं मानी जाती। भगवान के प्रति सच्ची श्रद्धा के साथ सेवा दया संयम और अच्छे आचरण को भी महत्वपूर्ण माना गया है। मंगलवार या शनिवार को चोला चढ़ाने के साथ जरूरतमंदों की सहायता करना और सकारात्मक व्यवहार बनाए रखना भी पुण्यदायी माना जाता है।

कुल मिलाकर मंगलवार और शनिवार दोनों ही दिन हनुमान जी को चोला चढ़ाने के लिए विशेष माने जाते हैं। श्रद्धा और स्वच्छता के साथ पूजा करना तथा मंदिर की परंपराओं का पालन करना सबसे महत्वपूर्ण है। ये धार्मिक मान्यताएं आस्था और परंपराओं पर आधारित हैं इसलिए इन्हें उसी रूप में समझना चाहिए।

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