October 8, 2026

यूपी के 5 शहर बाढ़ की चपेट में, लखनऊ में 40 हजार मकान जलमग्न, सड़कों पर नाव और कॉलोनी में मगरमच्छ

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नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में बाढ़ का संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। प्रदेश के पांच जिले इस समय भीषण बाढ़ की चपेट में हैं और छह प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर लगातार नौवें दिन बढ़ रहा है जिसके चलते शहर के कई निचले इलाकों में हालात बिगड़ गए हैं। नीम करोली तपोस्थली में भी बाढ़ का पानी पहुंच गया है जबकि खाटू श्याम और चंद्रिका देवी मंदिर भी जलमग्न हो गए हैं। फैजुल्लागंज इलाके में करीब 40 हजार मकानों में पानी भरने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कई सरकारी और निजी स्कूल भी पानी में डूब गए हैं और गलियों से लेकर मुख्य सड़कों तक जलभराव की स्थिति बनी हुई है।

फैजुल्लागंज में बाढ़ का पानी लगातार बढ़ने के कारण स्थानीय लोगों के सामने खाने पीने के पानी और सुरक्षित स्थान पर पहुंचने की चुनौती खड़ी हो गई है। कई परिवार अपने घरों को छोड़कर दूसरी जगह जाने को मजबूर हैं। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि पानी घरों के अंदर तक पहुंच चुका है। कई जगह सामान्य आवाजाही पूरी तरह प्रभावित है और लोगों को आने जाने के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है।

शाहजहांपुर में बाढ़ के पानी के साथ एक विशाल मगरमच्छ आबादी वाले इलाके में पहुंच गया। मंगलवार सुबह करीब 10 बजे करीब छह से सात फीट लंबा मगरमच्छ एक मकान के मुख्य दरवाजे तक पहुंच गया। दरवाजे पर ताला लगा होने के कारण वह घर के अंदर नहीं जा सका। मगरमच्छ को देखकर आसपास के लोगों में अफरा तफरी मच गई। सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद उसे पकड़ने की कोशिश शुरू की गई। आबादी के बीच मगरमच्छ पहुंचने की घटना ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।

सीतापुर में भी बाढ़ का असर कम नहीं हुआ है। सरायन और कठना नदियों का पानी अब भी रिहायशी इलाकों में बह रहा है। कई क्षेत्रों में लोगों के घरों और रास्तों तक पानी पहुंच गया है। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

गोंडा में घाघरा नदी का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। तरबगंज और कर्नलगंज तहसील के करीब 10 गांव अब भी बाढ़ से प्रभावित हैं। ब्योन्दा माझा दत्तनगर और नकहरा समेत कई गांवों के चारों तरफ पानी भरा हुआ है। प्रशासन ने लोगों की आवाजाही के लिए 50 से अधिक नावें लगाई हैं। घाघरा और सरयू नदियों के कटान के कारण नवाबगंज क्षेत्र में बीते 24 घंटे के दौरान 20 बीघा से अधिक जमीन और फसल नदी में समा गई है।

उन्नाव में गंगा का जलस्तर अब धीरे धीरे घटने लगा है लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं है। नदी का पानी अभी भी चेतावनी बिंदु से ऊपर है। गोताखोर कर्बला हुसैन नगर तेजीपुरवा और सैय्यद कंपाउंड जैसे इलाकों में जलभराव बना हुआ है। सड़कों पर पानी होने के कारण मोहल्लों में नावों से आवागमन किया जा रहा है।

यूपी में बाढ़ की यह स्थिति लगातार प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई है। नदियों के बढ़ते जलस्तर के साथ कई इलाकों में कटान और जलभराव से लोगों की परेशानी बढ़ रही है। प्रशासन राहत और बचाव व्यवस्था पर नजर बनाए हुए है लेकिन प्रभावित परिवारों के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चिंता सुरक्षित रहने के साथ भोजन पीने का पानी और सामान्य आवागमन की व्यवस्था है।

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