September 13, 2026

सह-राष्ट्रपति पत्नी के साथ मिलकर ओर्टेगा ने खत्म की चुनावी प्रक्रिया, अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भारी चिंता..

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नई दिल्ली। मध्य अमेरिकी देश निकारागुआ के राजनीतिक घटनाक्रम ने वैश्विक स्तर पर हलचल मचा दी है। वर्ष 2007 से लगातार सत्ता पर काबिज राष्ट्रपति डैनियल ओर्टेगा ने देश में भविष्य में किसी भी प्रकार के चुनाव न कराने का एकतरफा ऐलान कर दिया है। इस अप्रत्याशित घोषणा के बाद देश में अगले वर्ष कार्यकाल समाप्त होने पर होने वाली चुनावी प्रक्रिया और किसी भी तरह की राजनीतिक चुनौती की संभावना पूरी तरह समाप्त हो गई है। इस निर्णय से ओर्टेगा और उनकी पत्नी सह-राष्ट्रपति रोसारियो मुरिलो का शासन पर एकछत्र नियंत्रण और अधिक मजबूत हो गया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मानवाधिकार संगठनों में भारी चिंता व्याप्त है।

सैंडिनिस्टा क्रांति की वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित एक समारोह के दौरान दो महीने बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आते हुए ओर्टेगा ने अपने फैसले को स्पष्ट किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि अब देश में सरकार या सत्ता पर कब्जा करने के उद्देश्य से कोई चुनाव आयोजित नहीं किए जाएंगे। उन्होंने विदेशी ताकतों और विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि पुरानी व्यवस्था के समर्थक दलों के सत्ता में लौटने के दरवाजे अब पूरी तरह से बंद हो चुके हैं। इस ऐलान के साथ ही ओर्टेगा ने देश के विपक्षी राजनीतिक दलों के अस्तित्व और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को लगभग समाप्त कर दिया है।

निकारागुआ का राजनीतिक परिदृश्य पिछले कई वर्षों से लगातार विवादों और मानवाधिकार उल्लंघनों के घेरे में रहा है। वर्ष 2021 में हुए पिछले राष्ट्रपति चुनाव के दौरान भी ओर्टेगा प्रशासन पर प्रमुख विपक्षी नेताओं, उद्योगपतियों और आलोचकों को हिरासत में लेने के गंभीर आरोप लगे थे। इसके बाद हाल के वर्षों में किए गए संवैधानिक संशोधनों के जरिए राष्ट्रपति का कार्यकाल बढ़ाने के साथ-साथ ओर्टेगा की पत्नी को सह-राष्ट्रपति का आधिकारिक पद प्रदान किया गया था। वर्तमान में यह दंपति देश के सशस्त्र बलों, न्यायपालिका और संपूर्ण प्रशासनिक व्यवस्था पर पूर्ण नियंत्रण रखता है।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद सहित कई अंतरराष्ट्रीय निकायों ने निकारागुआ सरकार की कार्यशैली पर कड़ा ऐतराज जताया है। वैश्विक संगठनों का मानना है कि देश को पूर्णतः एक दमनकारी शासन तंत्र में बदल दिया गया है, जहां नागरिक स्वतंत्रताओं और मानवाधिकारों का लगातार उल्लंघन हो रहा है। वर्ष 2018 के भीषण सरकार-विरोधी प्रदर्शनों के बाद से ही निकारागुआ में राजनीतिक अस्थिरता बनी हुई है। चुनाव रद्द करने के इस ताजा ऐलान ने देश के लोकतांत्रिक ढांचे को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया है, जिसकी चौतरफा आलोचना की जा रही है।

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