July 23, 2026

गाजीपुर घटना पर ओपी राजभर का अखिलेश यादव पर हमला, पुजारी और बच्चे पर हमले को लेकर साधे तीखे सवाल

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नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में मंदिर के पुजारी और उनके चार वर्षीय बेटे पर कथित हमले की घटना को लेकर राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओपी राजभर ने इस मामले को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी सार्वजनिक मंचों पर सामाजिक सम्मान की बात करती है, जबकि उसके कार्यकर्ताओं पर हिंसा और गुंडागर्दी के आरोप लगते रहे हैं। उनके बयान के बाद यह मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।

ओपी राजभर ने कहा कि गाजीपुर में बाबा गंगेश्वरनाथ मंदिर के पुजारी और उनके मासूम बेटे के साथ हुई कथित मारपीट अत्यंत गंभीर घटना है। उन्होंने दावा किया कि हमले में पुजारी को बुरी तरह पीटा गया और उनके चार वर्षीय बेटे को भी चोट पहुंचाई गई। राजभर ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की हिंसा लोकतांत्रिक व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द के लिए उचित नहीं मानी जा सकती।

उन्होंने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें अपने कार्यकर्ताओं को कानून का सम्मान करने और हिंसक गतिविधियों से दूर रहने की सलाह देनी चाहिए। राजभर ने आरोप लगाया कि यदि ऐसी घटनाएं लगातार होती रहीं तो जनता का भरोसा विपक्ष पर और कमजोर होगा। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष आवश्यक होता है, लेकिन इसके लिए राजनीतिक दलों को अनुशासन और जिम्मेदारी का परिचय देना चाहिए।

अपने बयान में राजभर ने समाजवादी पार्टी पर दोहरे राजनीतिक रवैये का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि एक ओर पार्टी विभिन्न समुदायों के सम्मान की बात करती है, वहीं दूसरी ओर विरोधियों का आरोप है कि जमीनी स्तर पर हिंसा की घटनाएं सामने आती रहती हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं के आचरण की जिम्मेदारी लेनी चाहिए तथा कानून के दायरे में रहकर राजनीति करनी चाहिए।

गाजीपुर की इस घटना के बाद प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। हालांकि, इस मामले में लगाए गए राजनीतिक आरोपों पर समाजवादी पार्टी की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे मामलों में अंतिम निष्कर्ष जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और पुलिस की कार्रवाई के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों को देखते हुए कानून-व्यवस्था, अपराध और सामाजिक मुद्दों पर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार तेज हो रहा है। ऐसे समय में किसी भी घटना को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं स्वाभाविक रूप से चर्चा का केंद्र बन जाती हैं। गाजीपुर की इस घटना ने भी प्रदेश की राजनीति में नई बहस को जन्म दिया है। अब इस मामले में पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर सभी की नजर रहेगी। वहीं सभी दलों की ओर से कानून का पालन, सामाजिक सौहार्द बनाए रखने और दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई की मांग भी लगातार उठाई जा रही है।

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