August 3, 2026

अवैध बैनर-होर्डिंग पर हाई कोर्ट सख्त: शिकायत मिलते ही 24 घंटे में कार्रवाई, जिम्मेदारों पर एफआईआर के निर्देश

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मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में अब अवैध राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक बैनर-होर्डिंग लगाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने इस मामले में अहम आदेश जारी करते हुए राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शिकायत मिलने के 24 घंटे के भीतर अवैध बैनर और होर्डिंग हटाए जाएं। इतना ही नहीं, नियमों का उल्लंघन करने वाले लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए।

न्यायमूर्ति संदीप एन. भट्ट की एकलपीठ ने यह आदेश वैध होर्डिंग पर बिना अनुमति राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक बैनर लगाए जाने से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान दिया। अदालत ने कहा कि जबलपुर हाई कोर्ट द्वारा वर्ष 2022 में दिए गए निर्देशों और 1 नवंबर 2019 के शासन परिपत्र का अक्षरशः पालन किया जाए। कोर्ट ने साफ किया कि सार्वजनिक स्थानों पर नियमों के विपरीत लगाए गए विज्ञापन और बैनर किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं।

इस फैसले का प्रभाव भोपाल सहित पूरे मध्य प्रदेश में देखने को मिलेगा। भोपाल नगर निगम के अधिकारियों ने भी संकेत दिए हैं कि अदालत के आदेश के अनुरूप विशेष अभियान चलाकर अवैध राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक होर्डिंग हटाए जाएंगे। नगर निगम के अनुसार पहले चरण में सर्वे कराया जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वाले सभी स्ट्रक्चर चिन्हित किए जाएंगे। अयोध्या बायपास क्षेत्र में पहले ही पांच अवैध यूनिपोल हटाए जा चुके हैं। साथ ही संबंधित संस्था की बैंक गारंटी जब्त करने और बकाया शुल्क वसूलने जैसी कार्रवाई भी की गई है।

आउटडोर मीडिया नियम-2017 के अनुसार बिना अनुमति लगाए गए फ्लेक्स, पोस्टर, कटआउट, सुरक्षा प्रमाणपत्र के बिना स्थापित विज्ञापन संरचनाएं, ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों के प्रतिबंधित दायरे में लगे होर्डिंग, ट्रैफिक संकेतों को ढंकने वाले विज्ञापन, फुटपाथ और सर्विस रोड पर लगाए गए यूनिपोल तथा निर्धारित मानकों से बड़े या असुरक्षित स्ट्रक्चर पूरी तरह अवैध माने जाते हैं।

भोपाल में वीआईपी रोड, एमपी नगर, लिंक रोड, होशंगाबाद रोड, रायसेन रोड, अयोध्या बायपास, बैरसिया रोड, लालघाटी और गांधी नगर सहित कई प्रमुख क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ऐसे होर्डिंग लगे होने की बात सामने आई है जो नियमों के अनुरूप नहीं हैं। अनुमान है कि शहर में लगभग 20 प्रतिशत होर्डिंग किसी न किसी रूप में नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।

दरअसल, यह मामला इंदौर की एक विज्ञापन कंपनी द्वारा दायर याचिका के बाद अदालत पहुंचा था। कंपनी का कहना था कि उसने नगर निगम से विधिवत अनुमति लेकर विज्ञापन संरचनाएं स्थापित की हैं, लेकिन उन पर बिना अनुमति राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक बैनर लगा दिए जाते हैं। इससे न केवल संरचनाओं को नुकसान पहुंचता है बल्कि कंपनी को आर्थिक हानि भी होती है।

अदालत के इस आदेश के बाद उम्मीद की जा रही है कि शहरों में अवैध बैनर और होर्डिंग पर प्रभावी अंकुश लगेगा। इससे यातायात व्यवस्था बेहतर होगी, सार्वजनिक स्थानों की सुंदरता बढ़ेगी, वैध विज्ञापन एजेंसियों के हित सुरक्षित रहेंगे और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का रास्ता भी साफ होगा

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