सावन 2026 की तारीखों को लेकर दूर हुआ भ्रम, जानिए कब शुरू होगा पवित्र महीना और कितने होंगे सोमवार
पंचांग के अनुसार सावन का पहला सोमवार 3 अगस्त को होगा। इसके बाद दूसरा सोमवार 10 अगस्त, तीसरा सोमवार 17 अगस्त और चौथा तथा अंतिम सावन सोमवार 24 अगस्त को पड़ेगा। इन चारों सोमवार को शिव भक्त बड़ी संख्या में मंदिरों में पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे और व्रत रखकर विशेष पूजा करेंगे। सावन पूर्णिमा 28 अगस्त को होने के साथ ही इस पवित्र महीने का समापन होगा।
हर वर्ष सावन की शुरुआत और सोमवार की संख्या को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति बन जाती है। इसका प्रमुख कारण देश में प्रचलित दो अलग-अलग पंचांग पद्धतियां हैं। उत्तर भारत में पूर्णिमांत पंचांग का पालन किया जाता है, जबकि दक्षिण और पश्चिम भारत के कई हिस्सों में अमांत पंचांग मान्य है। दोनों पंचांगों की गणना पद्धति अलग होने के कारण सावन की तिथियों और सोमवारों की संख्या में अंतर दिखाई देता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार सावन का प्रत्येक सोमवार भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु प्रातःकाल स्नान कर शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं। कई श्रद्धालु दिनभर उपवास रखकर शिव मंत्रों का जाप और रुद्राभिषेक भी करते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
सावन सोमवार के व्रत का विशेष महत्व अविवाहित और विवाहित दोनों के लिए बताया गया है। धार्मिक विश्वास के अनुसार अविवाहित युवक-युवतियां मनचाहे जीवनसाथी की कामना से यह व्रत रखते हैं, जबकि विवाहित दंपति परिवार की सुख-शांति, वैवाहिक जीवन की खुशहाली और समृद्धि के लिए भगवान शिव का पूजन करते हैं। कई स्थानों पर पूरे सावन महीने में शिवालयों में विशेष धार्मिक आयोजन और भजन-कीर्तन भी आयोजित किए जाते हैं।
सावन का महीना केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं माना जाता, बल्कि यह संयम, श्रद्धा और आध्यात्मिक साधना का भी प्रतीक है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु नियमित रूप से मंदिरों में दर्शन करते हैं और भगवान शिव की आराधना में समय बिताते हैं। वर्ष 2026 में उत्तर भारतीय पंचांग के अनुसार सावन के चार सोमवार शिव भक्तों को विशेष पूजा और व्रत का अवसर प्रदान करेंगे, जबकि अलग-अलग क्षेत्रों में स्थानीय पंचांग के अनुसार तिथियों में कुछ अंतर देखने को मिल सकता है।
