अब घरों में रखा सोना आएगा अर्थव्यवस्था के काम, सरकार 'गोल्ड मोनेटाइजेशन 2.0' प्रस्ताव पर कर रही विचार
शुरुआती लक्ष्य 200 टन सोना बाजार में लाने का
सराफा संगठनों द्वारा सरकार को सौंपे गए प्रस्ताव के अनुसार, योजना के पहले चरण में देशभर के घरों में रखा करीब 200 टन सोना औपचारिक व्यवस्था में लाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे घरेलू मांग का कुछ हिस्सा देश के भीतर उपलब्ध सोने से पूरा किया जा सकेगा और विदेशों से सोना आयात करने की आवश्यकता कम हो सकती है। इसके परिणामस्वरूप विदेशी मुद्रा की बचत होने की संभावना भी जताई गई है।
पुरानी योजना से कैसे होगी अलग?
इससे पहले लागू की गई गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम को अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई थी, क्योंकि लोग सीधे बैंकों के माध्यम से प्रक्रिया अपनाने में सहज महसूस नहीं करते थे।
नए प्रस्ताव में व्यवस्था को अधिक आसान बनाने की बात कही गई है। इसके तहत ग्राहक अपने पुराने या अनुपयोगी आभूषण लेकर सीधे बैंक जाने के बजाय पंजीकृत ज्वेलर्स के पास पहुंच सकेंगे। ज्वेलर गहनों को गलाकर उनकी शुद्धता का आकलन करेगा और निर्धारित प्रक्रिया के तहत उन्हें बैंक में जमा कराया जाएगा।
ग्राहकों को मिल सकती हैं गोल्ड यूनिट्स
प्रस्ताव के मुताबिक, जमा किए गए सोने के बदले ग्राहक के बैंक खाते में उसी मूल्य के बराबर गोल्ड यूनिट्स क्रेडिट की जा सकती हैं। इससे लोग पुराने डिजाइनों के गहनों का बेहतर उपयोग कर सकेंगे और अपनी पसंद के नए आभूषण खरीदने का विकल्प भी मिलेगा। वहीं ज्वेलरी उद्योग को अपेक्षाकृत कम लागत पर कच्चे माल के रूप में सोना उपलब्ध होने की संभावना है।
टैक्स नियमों को लेकर भी राहत की उम्मीद
योजना के मसौदे में प्रक्रिया को पारदर्शी रखने और लोगों की टैक्स संबंधी आशंकाओं को कम करने पर भी जोर दिया गया है। मौजूदा आयकर नियमों के अनुसार, विवाहित महिला के पास 500 ग्राम, अविवाहित महिला के पास 250 ग्राम और पुरुष के पास 100 ग्राम तक सोना रखने पर सामान्य परिस्थितियों में राहत का प्रावधान है। हालांकि, अंतिम स्थिति संबंधित नियमों और प्रत्येक मामले के तथ्यों पर निर्भर करती है।
सरकार की मंजूरी का इंतजार
फिलहाल केंद्र सरकार ने इस प्रस्ताव को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। हालांकि, सराफा बाजार इस पहल को सकारात्मक मान रहा है। कारोबारियों का मानना है कि यदि यह योजना लागू होती है तो घरों में निष्क्रिय पड़े सोने को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा जा सकेगा। इससे न केवल गोल्ड मार्केट को नई गति मिल सकती है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिलने की संभावना है।
