कारोबारियों के लिए आसान होगा जीएसटी सिस्टम? रिफंड का दायरा बढ़ाने और पंजीकरण प्रक्रिया सरल करने पर मंथन
बैठक में इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी आईटीसी से जुड़े नियमों में भी बदलाव पर विचार होने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक आईटीसी पर लगी कुछ मौजूदा पाबंदियों में ढील दी जा सकती है। सामान्य कारोबारी खर्चों को भी इनपुट टैक्स क्रेडिट के दायरे में शामिल करने का प्रावधान किया जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो कारोबारियों के लिए टैक्स क्रेडिट का इस्तेमाल करने की गुंजाइश बढ़ सकती है और कारोबारी खर्चों पर कर का बोझ कम करने में मदद मिल सकती है।
पंजीकरण को लेकर भी कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित हैं। एक राज्य में जीएसटी पंजीकरण कराकर पूरे देश में कारोबार करने की अनुमति देने के प्रस्ताव पर विचार किया जा सकता है। मौजूदा व्यवस्था में अलग अलग राज्यों में कारोबार करने वाले व्यवसायों के लिए पंजीकरण से जुड़ी प्रक्रियाएं अधिक जटिल हो सकती हैं। ऐसे में एकीकृत पंजीकरण की व्यवस्था लागू होने पर कारोबारियों के लिए अनुपालन प्रक्रिया आसान हो सकती है।
सरकार की ओर से जीएसटी पंजीकरण प्रक्रिया को लेकर भी आंकड़े सामने रखे गए हैं। सरकार का कहना है कि 61 प्रतिशत करदाताओं का पंजीकरण बिना अधिकारी के हस्तक्षेप के तीन कार्यदिवस के भीतर किया जा रहा है। इससे संकेत मिलता है कि पंजीकरण प्रक्रिया को डिजिटल और कम हस्तक्षेप वाली बनाने पर जोर दिया जा रहा है। प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य भी कारोबारियों के लिए प्रक्रिया को सरल और तेज बनाना बताया जा रहा है।
रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया में भी बदलाव की तैयारी है। प्रस्ताव के मुताबिक ऐसी व्यवस्था बनाई जा सकती है जिसमें खरीदार के लेजर में संबंधित बदलाव स्वतः दर्ज हो जाएं। इससे रिटर्न से जुड़ी प्रक्रियाओं में मानवीय हस्तक्षेप कम करने और लेनदेन से संबंधित जानकारी को अधिक व्यवस्थित तरीके से दर्ज करने में मदद मिल सकती है।
जीएसटी से जुड़े नोटिस को लेकर भी कारोबारियों को राहत मिल सकती है। प्रस्ताव के तहत एक तय सीमा से कम मामलों में नोटिस जारी नहीं करने की व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है। इससे छोटे मामलों में कारोबारियों को बार बार नोटिस और अनुपालन संबंधी प्रक्रिया से गुजरने की परेशानी कम हो सकती है। हालांकि किस सीमा तक के मामलों को इस प्रावधान में शामिल किया जाएगा यह काउंसिल के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगा।
रिफंड व्यवस्था में बदलाव भी बैठक के प्रमुख प्रस्तावों में शामिल है। रिफंड का दायरा सेवाओं के साथ साथ संयंत्र और मशीनरी पर चुकाए गए कर तक बढ़ाने का प्रस्ताव सामने आया है। अगर इसे मंजूरी मिलती है तो पात्र कारोबारियों के लिए रिफंड प्राप्त करने का दायरा बढ़ सकता है। इससे खास तौर पर ऐसे व्यवसायों को फायदा मिलने की उम्मीद है जिनमें मशीनरी और संयंत्र पर बड़ा निवेश किया जाता है।
जीएसटी काउंसिल की बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसमें टैक्स व्यवस्था को सरल बनाने के साथ कारोबारियों की अनुपालन संबंधी परेशानियों को कम करने पर चर्चा होगी। हालांकि ये सभी प्रस्ताव फिलहाल बैठक में विचार के स्तर पर हैं। अंतिम तस्वीर काउंसिल के फैसले के बाद ही साफ होगी। यदि प्रस्तावों को मंजूरी मिलती है तो रिफंड आईटीसी पंजीकरण और रिटर्न दाखिल करने जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में जीएसटी व्यवस्था में बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
