October 9, 2026

अगस्त में भारत का औद्योगिक उत्पादन 8 प्रतिशत बढ़ा; मैन्युफैक्चरिंग और कैपिटल गुड्स सेक्टर में मज़बूत प्रदर्शन दिखा।

0
33-1790597916
नई दिल्ली, 28 सितंबर। भारत के औद्योगिक उत्पादन में अगस्त के दौरान सालाना आधार पर 8 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक यानी आईआईपी में तीन-चौथाई से अधिक हिस्सेदारी रखने वाले मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के बेहतर प्रदर्शन ने इस वृद्धि को गति दी। अगस्त में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की वृद्धि दर 9 प्रतिशत रही और यह लगातार तीसरा महीना रहा, जब इस क्षेत्र ने 8 प्रतिशत या उससे अधिक की वृद्धि दर्ज की।

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के 23 प्रमुख उद्योग समूहों में से 18 ने अगस्त के दौरान सकारात्मक वृद्धि दर्ज की। इनमें मोटर वाहनों का विनिर्माण प्रमुख रहा, जिसमें उत्पादन 25.2 प्रतिशत बढ़ा। इलेक्ट्रिकल उपकरणों के विनिर्माण में 30.9 प्रतिशत और मशीनरी एवं उपकरणों के विनिर्माण में 25.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इन क्षेत्रों के बेहतर प्रदर्शन से औद्योगिक गतिविधियों में व्यापक मजबूती दिखाई दी।

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर देश के इंजीनियरिंग संस्थानों और विश्वविद्यालयों से पढ़ाई पूरी करने वाले युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण रोजगार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में इस क्षेत्र में लगातार उत्पादन बढ़ने से आगे रोजगार और आय से जुड़े अवसरों पर भी असर पड़ सकता है। औद्योगिक उत्पादन में आई तेजी को इसी व्यापक आर्थिक गतिविधि के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

औद्योगिक उत्पादन के अन्य प्रमुख क्षेत्रों में भी अगस्त के दौरान वृद्धि दर्ज की गई। बिजली और गैस आपूर्ति क्षेत्र में उत्पादन 12.3 प्रतिशत बढ़ा, जबकि जल आपूर्ति, सीवरेज और अपशिष्ट प्रबंधन क्षेत्र में 6.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई। हालांकि, खनन क्षेत्र का प्रदर्शन इसके विपरीत रहा और अगस्त में इसमें 5.6 प्रतिशत की नकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई।

उपयोग-आधारित वर्गीकरण के आंकड़ों में कैपिटल गुड्स के उत्पादन में भी मजबूत तेजी दिखाई दी। कारखानों और औद्योगिक इकाइयों में इस्तेमाल होने वाली मशीनों यानी कैपिटल गुड्स के उत्पादन में अगस्त के दौरान 16.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। इस श्रेणी को अर्थव्यवस्था में वास्तविक निवेश से जुड़ी गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है। मशीनरी के उत्पादन में बढ़ोतरी से आगे औद्योगिक क्षमता, रोजगार और आय के अवसरों पर असर पड़ सकता है।

अगस्त के दौरान कंज्यूमर ड्यूरेबल्स के उत्पादन में भी 11.1 प्रतिशत की दोहरे अंक की वृद्धि दर्ज की गई। इलेक्ट्रॉनिक सामान, रेफ्रिजरेटर और टीवी जैसी वस्तुओं के उत्पादन में तेजी उपभोक्ता मांग में बढ़ोतरी से जुड़ी रही। वहीं साबुन और कॉस्मेटिक्स जैसी कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स वस्तुओं के उत्पादन में 2.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई।

इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन गुड्स सेक्टर में अगस्त के दौरान 6.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई। हाईवे, बंदरगाह और रेलवे जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निवेश से इस क्षेत्र को गति मिली। इन परियोजनाओं से निर्माण गतिविधियों के साथ रोजगार के अवसर पैदा होने और व्यापक आर्थिक गतिविधियों को समर्थन मिलने की संभावना रहती है। कुल मिलाकर अगस्त के औद्योगिक उत्पादन के आंकड़ों में मैन्युफैक्चरिंग, कैपिटल गुड्स और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे क्षेत्रों की मजबूत वृद्धि प्रमुख रूप से सामने आई।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *