August 3, 2026

E20 पेट्रोल को लेकर सरकार ने किया बड़ा स्पष्टिकरण, पुरानी BS-III गाड़ियों में बदलने पड़ सकते हैं कुछ रबर पार्ट्स

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नई दिल्ली । देश में वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने और पेट्रोल पर निर्भरता कम करने की दिशा में E20 पेट्रोल का उपयोग तेजी से बढ़ाया जा रहा है। इसी बीच पुराने पेट्रोल वाहनों के मालिकों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या E20 ईंधन के इस्तेमाल से उनकी गाड़ियों में बड़ी तकनीकी खराबी आ सकती है या महंगे पार्ट्स बदलवाने पड़ेंगे। इस संबंध में सरकार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया है कि कुछ पुराने BS-III पेट्रोल वाहनों में केवल फ्यूल सिस्टम से जुड़े कुछ रबर के पुर्जों को बदलने की आवश्यकता पड़ सकती है, जबकि इंजन में किसी बड़े बदलाव की जरूरत नहीं होगी।

E20 एक मिश्रित ईंधन है, जिसमें 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत सामान्य पेट्रोल शामिल होता है। एथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से किया जाता है। सरकार का उद्देश्य इस ईंधन के माध्यम से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, पर्यावरण प्रदूषण में कमी लाना और किसानों की आय बढ़ाने में सहायता करना है। इसी रणनीति के तहत देशभर में चरणबद्ध तरीके से E20 पेट्रोल उपलब्ध कराया जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार E20 का प्रभाव मुख्य रूप से उन BS-III पेट्रोल वाहनों पर पड़ सकता है, जिन्हें इस प्रकार के ईंधन को ध्यान में रखकर विकसित नहीं किया गया था। ऐसे वाहन सामान्यतः वर्ष 2005 से 2016 के बीच निर्मित हुए थे। लंबे समय तक E20 के उपयोग से इन वाहनों के फ्यूल सिस्टम में लगे कुछ रबर आधारित पुर्जों पर अतिरिक्त प्रभाव पड़ सकता है, जिससे समय के साथ उनमें घिसावट या क्षति की संभावना बढ़ सकती है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐसी स्थिति में इंजन बदलने या किसी बड़े मैकेनिकल संशोधन की आवश्यकता नहीं होगी। जरूरत पड़ने पर केवल फ्यूल पाइप, रबर होज, रबर सील, गैस्केट, ओ-रिंग और अन्य रबर फिटिंग जैसे पुर्जों को बदला जा सकता है। ये सभी सामान्य सर्विस के दौरान आसानी से बदले जा सकते हैं और इसके लिए इंजन खोलने जैसी बड़ी मरम्मत की जरूरत नहीं पड़ती।

वाहन विशेषज्ञों का कहना है कि E20 पेट्रोल के उपयोग से कुछ पुराने मॉडलों में माइलेज में मामूली कमी या इंजन की कार्यक्षमता में हल्का अंतर महसूस हो सकता है। हालांकि सामान्य उपयोग के दौरान यह अंतर बहुत अधिक नहीं होता और अधिकांश चालक इसे आसानी से संभाल सकते हैं। परीक्षणों में भी इंजन की दीर्घकालिक क्षमता पर कोई गंभीर नकारात्मक प्रभाव सामने नहीं आया है।

दूसरी ओर, वर्तमान समय में लॉन्च होने वाली अधिकांश नई पेट्रोल कारें और दोपहिया वाहन E20-रेडी तकनीक के साथ तैयार किए जा रहे हैं। इन वाहनों के इंजन और फ्यूल सिस्टम को इस मिश्रित ईंधन के अनुरूप विकसित किया गया है, इसलिए इनमें किसी अतिरिक्त बदलाव की आवश्यकता नहीं होती। इससे भविष्य में E20 के व्यापक उपयोग का रास्ता और आसान होने की उम्मीद है।

यदि आपके पास BS-III श्रेणी का पुराना पेट्रोल वाहन है, तो विशेषज्ञ अगली नियमित सर्विस के दौरान फ्यूल सिस्टम की जांच कराने की सलाह देते हैं। यदि फ्यूल पाइप, रबर होज, सील या गैस्केट में घिसावट दिखाई दे, तो उन्हें समय रहते बदलवा लेना बेहतर रहेगा। इससे वाहन की कार्यक्षमता बनी रहेगी और E20 पेट्रोल के उपयोग के दौरान संभावित तकनीकी समस्याओं से भी बचाव हो सकेगा।

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