September 13, 2026

PoJK Unrest: अधिकार मांगने वालों का दमन, खौफनाक हालात में बेबस मां ने सुनाई पीड़ा, पीओके पर भारत ने क्या कहा?

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नई दिल्ली ।
पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर अर्थात पीओके में अपने बुनियादी अधिकारों की मांग कर रहे आम नागरिकों पर वहां की सुरक्षा बलों द्वारा किए जा रहे दमन और अत्याचार की खौफनाक तस्वीरें सामने आ रही हैं। रावलकोट में एक 15 वर्षीय निर्दोष किशोर की गोली मारकर हत्या किए जाने के बाद परिजनों की बेबसी और चीत्कार ने क्षेत्र में व्याप्त भयावह स्थिति को उजागर कर दिया है।

पीओके की जनता पिछले काफी समय से सस्ता आटा, किफायती बिजली और मूलभूत जनसुविधाओं की मांग को लेकर शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन कर रही है। हालांकि जवाब में पाकिस्तानी प्रशासन और सुरक्षा बल नागरिकों पर अंधाधुंध गोलियां चला रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकारों की आवाज उठाने के एवज में युवाओं को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे दर्जनों परिवारों के चिराग बुझ चुके हैं।

क्षेत्र में इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह ठप कर दिया गया है और सड़कों पर कड़ा पहरा लगा दिया गया है, ताकि हिंसा की खबरें बाहर न आ सकें। स्थानीय अस्पतालों की स्थिति भी अत्यंत दयनीय बनी हुई है। डॉक्टरों के अनुसार प्राथमिक इलाज की पर्याप्त सामग्री उपलब्ध नहीं है और इलाज कराने आने वाले घायल युवाओं में डर का माहौल है। लोगों को भय है कि अस्पताल जाने पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा या फिर मार दिया जाएगा।

दूसरी ओर भारत ने पीओके में हाल ही में आयोजित कराए गए चुनावों को पूरी तरह से एक ढोंग और छलावा करार दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान लोकतंत्र का दिखावा करके वहां चल रहे जनविरोध और हत्याओं के कड़वे सच को छिपाने का प्रयास कर रहा है। फर्जी चुनावों के जरिए अपनी अवैध वैधता साबित करने की यह कोशिश अंतरराष्ट्रीय समुदाय को धोखा देने जैसी है।

विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार जून 2026 से लेकर अब तक वहां पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कम से कम 90 बेगुनाह नागरिकों की जान जा चुकी है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों से मांग की है कि वैश्विक समुदाय को पाकिस्तान द्वारा नागरिकों पर किए जा रहे इन अत्याचारों, संचार प्रतिबंधों और मानवाधिकारों के दोहरे रवैये के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए उसे जवाबदेह ठहराना चाहिए।

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