July 13, 2026

हार्ट फेलियर के हर मरीज पर एक जैसी दवा नहीं करती असर नई स्टडी ने इलाज को लेकर बदली सोच

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नई दिल्ली । हार्ट फेलियर दुनिया की सबसे गंभीर हृदय संबंधी बीमारियों में से एक मानी जाती है और हर साल लाखों लोग इसकी चपेट में आते हैं। अब इस बीमारी के इलाज को लेकर सामने आई नई रिसर्च ने डॉक्टरों और मरीजों दोनों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अध्ययन में संकेत मिले हैं कि हार्ट फेलियर के सभी मरीजों पर एक जैसी दवा समान रूप से प्रभावी नहीं होती। यही वजह है कि भविष्य में मरीजों की स्थिति के अनुसार अलग अलग उपचार पद्धति अपनाने की जरूरत और भी अधिक महसूस की जा रही है।

हार्ट फेलियर ऐसी स्थिति होती है जब हृदय शरीर की जरूरत के अनुसार पर्याप्त मात्रा में रक्त पंप नहीं कर पाता। इसके कारण मरीज को सांस लेने में कठिनाई जल्दी थकान पैरों और टखनों में सूजन तथा सामान्य दैनिक कार्य करने में परेशानी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। समय रहते सही उपचार नहीं मिलने पर यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि हार्ट फेलियर के भी अलग अलग प्रकार होते हैं। एक स्थिति में हृदय की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और पर्याप्त ताकत से रक्त नहीं पंप कर पातीं। दूसरी स्थिति में हृदय की पंपिंग क्षमता सामान्य दिखाई देती है लेकिन उसकी मांसपेशियां कठोर हो जाती हैं जिससे हर धड़कन के बीच पर्याप्त मात्रा में रक्त नहीं भर पाता। इसी प्रकार के मरीजों पर नई रिसर्च केंद्रित रही।

अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ वर्मोंट के शोधकर्ताओं ने इस विषय पर विस्तृत अध्ययन किया। रिसर्च के दौरान हजारों मरीजों के मेडिकल रिकॉर्ड और उपचार के परिणामों का विश्लेषण किया गया। अध्ययन में पाया गया कि जिन मरीजों का हृदय कठोर हो चुका था और जो बीटा ब्लॉकर दवाएं ले रहे थे उनमें हार्ट फेलियर बिगड़ने के कारण अस्पताल में भर्ती होने का खतरा अपेक्षाकृत अधिक पाया गया। यह निष्कर्ष इस बात की ओर इशारा करता है कि कमजोर हृदय वाले मरीजों के लिए लाभकारी मानी जाने वाली दवाएं हर प्रकार के हार्ट फेलियर मरीज के लिए समान रूप से प्रभावी नहीं हो सकतीं।

विशेषज्ञों का मानना है कि बीटा ब्लॉकर दवाएं हृदय की धड़कन को धीमा कर दिल पर दबाव कम करती हैं लेकिन जिन मरीजों का हृदय पहले से कठोर हो चुका हो उनमें इससे हृदय के भीतर दबाव बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में शरीर में पानी जमा होना सांस फूलना और सूजन जैसी समस्याएं अधिक बढ़ सकती हैं।

हालांकि डॉक्टरों ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस अध्ययन का मतलब यह नहीं है कि मरीज अपनी दवा खुद बंद कर दें। बीटा ब्लॉकर दवाओं का उपयोग केवल हार्ट फेलियर ही नहीं बल्कि हाई ब्लड प्रेशर अनियमित धड़कन और हार्ट अटैक के बाद भी किया जाता है। इसलिए किसी भी प्रकार का बदलाव केवल विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह पर ही किया जाना चाहिए।

नई रिसर्च ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में हार्ट फेलियर के इलाज में व्यक्तिगत चिकित्सा पद्धति यानी हर मरीज की स्थिति के अनुसार दवा और उपचार तय करना अधिक महत्वपूर्ण होगा। इससे बेहतर परिणाम मिलने की संभावना बढ़ेगी और मरीजों की जीवन गुणवत्ता में भी सुधार आ सकेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच नियमित दवा स्वस्थ जीवनशैली और डॉक्टर की सलाह का पालन ही इस गंभीर बीमारी से बचाव और बेहतर उपचार की सबसे मजबूत कुंजी है।

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