August 3, 2026

भोपाल के विधोदय तीर्थ में गूंजे ‘नमोस्तु’ के स्वर, आचार्य समय सागर बोले- सम्यक दर्शन ही मोक्ष की पहली सीढ़ी

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भोपाल । राजधानी भोपाल का रानी कमलापति जिनालय परिसर इन दिनों भक्ति, साधना और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बना हुआ है। निर्माणाधीन विधोदय तीर्थ धाम में राष्ट्रसंत आचार्य समय सागर महाराज के सान्निध्य में प्रस्तावित 20 मुनिराजों के मंगल चातुर्मास की तैयारियां पूरे श्रद्धाभाव के साथ चल रही हैं। परिसर में गूंजते श्रद्धालुओं के “हे स्वामी नमोस्तु… नमोस्तु… नमोस्तु…” के स्वर और साधु-संतों की तपस्या से वातावरण पूरी तरह धर्ममय हो गया है।

कार्यक्रम की शुरुआत भगवान आदिनाथ की पूजा-अर्चना और परम पूज्य आचार्य विद्यासागर महाराज की आराधना के साथ हुई। इस अवसर पर आचार्य समय सागर महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि धर्म का मूल उद्देश्य आत्मकल्याण है, न कि प्रदर्शन। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “दर्शन में प्रदर्शन नहीं होना चाहिए। सम्यक दर्शन ही मोक्ष मार्ग की प्रथम सीढ़ी है।” आचार्य श्री ने लोगों से बाहरी आडंबर से दूर रहकर आत्मचिंतन, संयम और सच्ची आस्था के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।

प्रवक्ता अंशुल जैन ने बताया कि चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन धार्मिक कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की जा रही है। सुबह गुरु वंदना के साथ दिन की शुरुआत होती है। इसके बाद पूजा-अर्चना, धार्मिक प्रवचन और साधना का क्रम चलता है। दोपहर में प्रतिक्रमण, तत्व चर्चा और आचार्य भक्ति का आयोजन किया जाता है, जबकि शाम को मंगल आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

आचार्य श्री की नवधा भक्ति पूर्वक आहार चर्या कराने का सौभाग्य इस बार पंचायत कमेटी ट्रस्ट के उपमंत्री ऋषभ जैन, मनीष जैन, निमिषा जैन एवं प्रगति परिवार को प्राप्त हुआ। इसके अलावा राकेश जैन, सुनीता जैन, सुधा जैन, सविता जैन और पी.सी. जैन सहित अनेक श्रद्धालुओं ने भी पूर्ण श्रद्धा और समर्पण के साथ आहार चर्या में भाग लिया। पूरे आयोजन के दौरान अनुशासन, सेवा और भक्ति का सुंदर समन्वय देखने को मिल रहा है।

आयोजकों के अनुसार आचार्य समय सागर महाराज के मंगल चातुर्मास की विधिवत कलश स्थापना 2 अगस्त को होगी। इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में जैन श्रद्धालुओं के भोपाल पहुंचने की संभावना है। इसे लेकर तीर्थ परिसर में व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।

निर्माणाधीन विधोदय तीर्थ धाम को भविष्य में जैन समाज के प्रमुख आध्यात्मिक और धार्मिक केंद्रों में शामिल करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। चातुर्मास के इस आयोजन ने न केवल श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक साधना का अवसर दिया है, बल्कि संयम, सेवा और आत्मशुद्धि के संदेश को भी जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया है।

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