May 28, 2026

एजुकेशन लोन रिजेक्शन: मध्य प्रदेश के मेधावी छात्रों का भविष्य अधर में

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मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश से शिक्षा के क्षेत्र में चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। प्रदेश के मेधावी छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता देने के दावों के बावजूद शिक्षा ऋण एजुकेशन लोन के लिए आवेदन करने वाले लगभग आधे छात्र खाली हाथ रहे। लोकसभा में प्रस्तुत ताजा आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 22,728 छात्रों ने लोन के लिए आवेदन किया, लेकिन केवल 12,547 को ही लोन मिल सका। यानी करीब 45 प्रतिशत छात्रों के आवेदन रिजेक्ट हुए या लंबित रहे।

विशेष रूप से 8,065 छात्रों ने अपना आवेदन वापस ले लिया, जो जटिल प्रक्रिया, देरी या बैंक की शर्तों के कारण उम्मीद छोड़ देने का संकेत देता है। इसके अलावा, 1,032 आवेदन सीधे रिजेक्ट हो गए और 1,084 आवेदन अब भी लंबित हैं, जिससे छात्र और उनके परिवार अनिश्चितता में फंसे हुए हैं।

आंकड़ों के अनुसार कम आय वर्ग के परिवारों के छात्रों को सबसे ज्यादा लाभ मिला है। 4.5 लाख रुपये तक की आय वाले परिवारों के 9,505 छात्रों को लोन स्वीकृत किया गया। 4.5 लाख से 8 लाख की आय वाले 1,118 छात्रों और 8 लाख से अधिक आय वाले 1,924 छात्रों को ही लोन मिला। यह दर्शाता है कि उच्च आय वर्ग के लिए बैंक अपेक्षाकृत कम लोन देते हैं।

सरकार ने कम आय वर्ग के छात्रों के लिए विशेष योजना भी बनाई है। केंद्रीय क्षेत्र ब्याज सब्सिडी योजना CSIS के तहत 4.5 लाख तक की आय वाले छात्रों को 100 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी दी जाती है। वहीं, नई पीएम विद्यालक्ष्मी योजना के अंतर्गत 8 लाख रुपये तक की आय वाले मेधावी छात्रों को 10 लाख रुपये तक के ऋण पर 3 प्रतिशत ब्याज छूट मिलती है।

बैंकों द्वारा आवेदन रिजेक्ट करने के पीछे कई कारण हैं। इसमें मुख्य कारण हैं छात्र के अभिभावक का खराब क्रेडिट स्कोर, कॉलेज या पाठ्यक्रम का QHEI मानक में न होना, आय प्रमाण पत्र या KYC दस्तावेजों में खामियां। हालांकि अब 7.5 लाख तक के लोन के लिए गारंटी जरूरी नहीं है, बैंक अक्सर सुरक्षा की मांग करते हैं।

विश्लेषण से पता चलता है कि गरीब और कम आय वर्ग पर इसका सबसे अधिक असर पड़ता है। देश भर में सबसे ज्यादा लोन आवेदन इसी वर्ग से आते हैं, लेकिन बैंक की कड़ी शर्तें और तकनीकी कमियां उनके लिए चुनौती बन जाती हैं।

लोकसभा में चर्चा के दौरान यह भी स्पष्ट हुआ कि बैंक छोटे लोन देने में हिचकते हैं क्योंकि इनमें जोखिम और रिकवरी की चुनौती अधिक होती है। छात्रों के लिए यह स्थिति उनकी उच्च शिक्षा और करियर योजना के लिए गंभीर बाधा बन रही है।

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