October 5, 2026

वेंटिलेटर पर थी 23 साल की दीक्षा, बोल नहीं पाई तो भाई के हाथ पर लिखे तीन नामों के संकेत, ससुराल पर गंभीर आरोप

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जबलपुर ।जबलपुर में 23 वर्षीय नवविवाहिता की इलाज के दौरान मौत के बाद मामला गंभीर हो गया है। मायके वालों ने दीक्षा पांडे की मौत को लेकर उसके पति अक्षय उर्फ सतीष मिश्रा सास उमा मिश्रा और ननद सोनम पर हत्या का आरोप लगाया है। परिवार का कहना है कि शादी के करीब डेढ़ साल बाद भी बच्चा नहीं होने को लेकर दीक्षा को लगातार ताने दिए जा रहे थे। हालत बिगड़ने के बाद उसे जबलपुर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां वह वेंटिलेटर पर थी। बोलने की स्थिति में नहीं होने के कारण उसने भाई से लिखकर बातचीत करने की कोशिश की।

दीक्षा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के मऊरानीपुर की रहने वाली थी। करीब डेढ़ साल पहले उसकी शादी छतरपुर निवासी अक्षय से हुई थी। अक्षय सीआरपीएफ में नागपुर में पदस्थ है। परिवार के मुताबिक 24 सितंबर को अक्षय दीक्षा को लेकर छतरपुर आया था। इसके बाद 27 सितंबर को परिवार के श्राद्ध कार्यक्रम में शामिल होने के लिए दोनों हटा थाना क्षेत्र के ग्राम पाटन स्थित चाचा ससुर के घर पहुंचे थे।

मायके पक्ष के अनुसार 29 सितंबर की दोपहर दीक्षा अपनी मां से फोन पर बातचीत कर रही थी। इसी दौरान उसकी ननद सोनम से विवाद होने की बात सामने आई। भाई भूपेंद्र का आरोप है कि सोनम दीक्षा को जबरन घर से बाहर ले जाने लगी। परिवार का दावा है कि फोन पर बातचीत के दौरान उसकी मां ने दीक्षा की आवाज सुनी थी। इसके बाद कथित तौर पर उसका मुंह दबाने और गला दबाने की बात कही जा रही है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

घटना के बाद दीक्षा की हालत गंभीर बताई गई और उसे जबलपुर के बड़ेरिया प्राइम अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने स्थिति नाजुक होने पर उसे वेंटिलेटर पर रखा। जानकारी मिलने के बाद उसका भाई भूपेंद्र झांसी से जबलपुर पहुंचा। दीक्षा बोल नहीं पा रही थी इसलिए भाई ने उससे लिखकर बातचीत करने की कोशिश की।

भूपेंद्र के मुताबिक इसी दौरान दीक्षा ने अपनी हथेली पर पेन से S U और A अक्षर लिखे। मायके वालों ने इन अक्षरों को सोनम उमा और अक्षय के नाम से जोड़ते हुए दावा किया कि दीक्षा ने अपनी हालत के बावजूद आरोपियों की ओर संकेत करने की कोशिश की थी। परिवार ने इसे घटना से जुड़ा अहम संकेत बताया है। हालांकि इन अक्षरों का वास्तविक अर्थ क्या था और इन्हें किस संदर्भ में लिखा गया था यह जांच का विषय है।

मायके पक्ष ने दीक्षा के गले पर निशान होने का भी दावा किया है। परिवार का आरोप है कि बच्चा नहीं होने की वजह से उसे ससुराल में मानसिक रूप से परेशान किया जाता था। परिजनों के मुताबिक लगातार तनाव के कारण दीक्षा कुछ समय अपने पति के साथ नागपुर में रहने लगी थी। उनका आरोप है कि वहां रहने के दौरान भी उसे फोन के जरिए परेशान किया जाता था।

दीक्षा को 30 सितंबर को अस्पताल में भर्ती कराया गया था और रविवार को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मौत के बाद तहसीलदार की मौजूदगी में पोस्टमार्टम कराया गया और शव परिजनों को सौंप दिया गया। परिवार सोमवार को झांसी में अंतिम संस्कार करेगा।

पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। गोहलपुर थाना प्रभारी रीतेश पांडे के अनुसार घटनास्थल हटा थाना क्षेत्र में आता है। गोहलपुर पुलिस ने जीरो पर मर्ग कायम किया है और मर्ग डायरी जांच के लिए हटा थाने भेजी जाएगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अब परिवार के आरोपों के साथ घटनास्थल और मेडिकल साक्ष्यों की भी जांच करेगी।

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