October 12, 2026

मप्र हाईकोर्ट के न्यायाधीश भोजशाला पहुंचे, 53 मिनट तक किया परिसर का गोपनीय निरीक्षण

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इंदौर।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ के न्यायाधीश शनिवार को केंद्रीय पुरातत्व विभाग के अधीन धार जिला मुख्यालय स्थित ऐतिहासिक भोजशाला पहुंचे। उन्होंने करीब 53 मिनट तक भोजशाला परिसर का विस्तृत निरीक्षण किया। आगामी 2 अप्रैल को भोजशाला मामले की सुनवाई से पहले इस दौरे को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मप्र उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और आलोक अवस्थी शनिवार दोपहर एक बजकर 52 मिनट पर भोजशाला परिसर पहुंचे। उनके साथ कलेक्टर प्रियंक मिश्रा और पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी भी मौजूद रहे। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच उन्होंने करीब 53 मिनट तक परिसर में रहकर हर हिस्से का बारीकी से मुआयना किया। इस दौरान पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने संरचना के संरक्षण के लिए किए गए कार्यों की जानकारी दी।

गौरतलब है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा लगभग 98 दिनों तक भोजशाला परिसर में किए गए सर्वे की रिपोर्ट उच्च न्यायालय में प्रस्तुत की जा चुकी है और इसकी प्रतियां सभी पक्षकारों को उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। भोजशाला के कानूनी विवाद को लेकर गत 16 मार्च को इंदौर उच्च न्यायालय में हुई सुनवाई के दौरान पक्षकारों से दावे और आपत्तियां मांगी गई थीं, उसी दौरान न्यायमूर्ति ने स्वयं भोजशाला का निरीक्षण करने की इच्छा जताई थी। साथ ही दो अप्रैल की तारीख सुनवाई के लिए निर्धारित की थी।

मामले की सुनवाई से पहले न्यायाधीश शनिवार को धार पहुंचे। न्यायाधीशों के आगमन की सूचना मिलते ही सुबह से ही जिला प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया था। न्यायमूर्ति के दौरे को देखते हुए भोजशाला के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी।

निरीक्षण के दौरान न्यायमूर्ति शुक्ला ने भोजशाला परिसर के भीतर स्तंभों की नक्काशी, प्राचीन खंभों पर उकेरी गई आकृतियों और ऐतिहासिक शिलालेखों का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने दीवारों पर अंकित लिपियों को भी ध्यानपूर्वक देखा। साथ ही एएसआई द्वारा किए गए सर्वे के निशानों और चिन्हित स्थलों की जानकारी ली। प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा किए गए कार्यों और वर्तमान व्यवस्थाओं से भी अवगत कराया।

भोजशाला को लेकर चल रहे कानूनी विवाद और वैज्ञानिक सर्वेक्षण की मांगों के बीच अब इस दौरे के बाद सभी की निगाहें आगामी 2 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं, जहां मामले में महत्वपूर्ण दिशा मिल सकती है।

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