September 13, 2026

MP की सियासत में अजब गजब किस्से कहीं 80s के अंदाज में नेता तो कहीं अधिकारी का पुतला बचाने आग में कूदा कर्मचारी

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भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति और नौकरशाही में इन दिनों एक से बढ़कर एक दिलचस्प किस्से सामने आ रहे हैं। कहीं नेता सोशल मीडिया पर 80 के दशक के रेट्रो अंदाज में नजर आ रहे हैं तो कहीं अपने अधिकारी के सम्मान में कर्मचारी आग की लपटों तक पहुंच गया। दूसरी तरफ श्योपुर में विकास कार्यों का हिसाब बताने पहुंचे सांसद को पंच और सरपंचों के विरोध के बाद कार्यक्रम बीच में ही छोड़कर जाना पड़ा। यानी प्रदेश की सियासत में इन दिनों खबरों के साथ किस्से भी खूब बन रहे हैं।

सबसे पहले बात नेताओं के रेट्रो अंदाज की। सोशल मीडिया पर इन दिनों 80 के दशक का रंग छाया हुआ है। पुराने दौर के कपड़े पुराने गाने और उस जमाने की तस्वीरों जैसा अंदाज लोगों को खूब पसंद आ रहा है। अब इस ट्रेंड से मध्य प्रदेश की राजनीति भी अछूती नहीं रही। मुख्यमंत्री मोहन यादव से लेकर शिवराज सिंह चौहान तक और दिग्विजय सिंह से लेकर कमलनाथ तक कई नेताओं की रेट्रो स्टाइल वाली तस्वीरें सोशल मीडिया पर दिखाई दे रही हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया कैलाश विजयवर्गीय नरोत्तम मिश्रा और जीतू पटवारी जैसे नेताओं के फोटो भी पुराने दौर की झलक दिखा रहे हैं। किसी का अंदाज पुराने फिल्मी सितारे जैसा नजर आ रहा है तो किसी की तस्वीर देखकर 80 के दशक की यादें ताजा हो रही हैं।

अब बात नर्मदापुरम की जहां अधिकारी के प्रति कर्मचारी की वफादारी चर्चा का विषय बन गई। यहां आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता गंदगी और खराब सड़कों के विरोध में नगर पालिका के सीएमओ का पुतला जला रहे थे। इसी दौरान वहां मौजूद एक कर्मचारी पुतले को बचाने के लिए प्रदर्शनकारियों से भिड़ गया। पहले उसने हाथों से आग बुझाने की कोशिश की। जब आग नहीं बुझी तो पैरों से उसे हटाने लगा। इसके बाद कर्मचारी ने अपनी शर्ट उतारकर उससे आग बुझाने की कोशिश की। आखिरकार पानी डालकर पुतले को जलने से बचा लिया गया। इस दौरान कर्मचारी खुद भी झुलस गया। उसका कहना था कि जब उसके अधिकारी का पुतला जलाया जा रहा था तो वह चुप कैसे रह सकता था। अधिकारी के पुतले को बचाने के लिए कर्मचारी का इस तरह आग में उतरना अब चर्चा का विषय बना हुआ है।

उधर श्योपुर में भाजपा सांसद शिवमंगल सिंह तोमर को पंच और सरपंचों के विरोध का सामना करना पड़ा। सांसद विकास कार्यों का जिक्र कर रहे थे तभी कार्यक्रम में मौजूद पंच और सरपंचों ने इलाके में काम नहीं होने को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए। विरोध बढ़ा तो एक उप सरपंच सांसद के सामने पहुंच गया। स्थिति ऐसी बनी कि सांसद को कार्यक्रम बीच में ही छोड़कर जाना पड़ा। विकास कार्यों का बखान करने पहुंचे सांसद के सामने जब स्थानीय प्रतिनिधियों ने ही सवाल खड़े किए तो कार्यक्रम का माहौल बदल गया।

इसके बाद सागर से जुड़ी एक और चर्चा सामने आई है। जहरीली शराब कांड की जांच के लिए पहुंचे आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी को कथित तौर पर कई घंटे तक सर्किट हाउस में ही इंतजार करना पड़ा। बताया गया कि पुलिस विभाग के एक अधिकारी से घटना से जुड़े तथ्यों और सबूतों को लेकर जानकारी मांगी गई थी लेकिन प्रक्रिया में काफी समय लग गया। बाद में मौके पर पहुंचने पर जांच अधिकारी को महत्वपूर्ण सबूत नहीं मिले। अब इस मामले में शिकायत किए जाने की चर्चा है और आगे प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

कुल मिलाकर मध्य प्रदेश में इन दिनों राजनीति और प्रशासन से जुड़े ये किस्से खूब चर्चा बटोर रहे हैं। कहीं सोशल मीडिया का रेट्रो ट्रेंड नेताओं पर चढ़ा है तो कहीं अधिकारी के प्रति कर्मचारी की वफादारी सुर्खियों में है और कहीं जनता के प्रतिनिधियों के सवालों ने नेताओं के दावों की परीक्षा ले ली है।

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