September 13, 2026

MP में रजिस्ट्री सिस्टम में बड़ा बदलाव, अधिकारी खाली नहीं तो दूसरे जिले में जाएगी फाइल; घर बैठे दस्तावेज पंजीयन से घटेगा इंतजार

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मध्य प्रदेश।  मध्य प्रदेश में प्रॉपर्टी और अन्य दस्तावेजों की रजिस्ट्री कराने वालों के लिए बड़ी राहत की खबर है। सरकार ने फेसलेस रजिस्ट्री व्यवस्था को अधिक तेज और प्रभावी बनाने के लिए नियमों में बदलाव किया है। अब प्रदेश का कोई भी सब रजिस्ट्रार किसी भी जिले की फेसलेस रजिस्ट्री और अन्य फेसलेस दस्तावेजों का पंजीयन कर सकेगा। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि किसी एक जिले में अधिकारी पर काम का दबाव अधिक होने के कारण रजिस्ट्री अटकने की स्थिति कम होगी। सिस्टम जरूरत के अनुसार दस्तावेज को ऐसे सब रजिस्ट्रार के पास भेज सकेगा जहां काम का भार अपेक्षाकृत कम हो। इससे लंबित मामलों का निपटारा तेजी से होने और आम लोगों का इंतजार कम होने की उम्मीद है।

रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1908 की धारा 6 के तहत किए गए संशोधन के बाद पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग के क्षेत्रीय अधिकारियों का अधिकार क्षेत्र प्रदेश के सभी उपजिलों तक बढ़ा दिया गया है। हालांकि यह सुविधा केवल फेसलेस रजिस्ट्री और अन्य फेसलेस दस्तावेजों के पंजीयन के लिए लागू होगी। फरवरी 2026 में शुरू किए गए साइबर सब रजिस्ट्रार कार्यालय के माध्यम से अब तक प्रदेश में 10 हजार से अधिक दस्तावेजों का फेसलेस पंजीयन किया जा चुका है। नई व्यवस्था के बाद इस प्रक्रिया को और गति मिलने की उम्मीद है।

इस व्यवस्था में लोगों को सबसे बड़ा फायदा यह मिलेगा कि रजिस्ट्री के लिए बार बार कार्यालय जाने की जरूरत कम होगी। किसी जिले में काम अधिक होने पर संबंधित दस्तावेज दूसरे उपलब्ध सब रजिस्ट्रार को भेजा जा सकेगा। यानी अधिकारी की अनुपलब्धता या अधिक कार्यभार के कारण फाइल के लंबे समय तक अटके रहने की समस्या कम होगी। इससे रजिस्ट्री प्रक्रिया तेज होने के साथ सरकारी संसाधनों का भी बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा।

फेसलेस व्यवस्था के तहत रजिस्टर्ड लीज पट्टा विलेख प्रॉपर्टी एग्रीमेंट प्रशासन बंध पत्र शपथ पत्र दत्तक ग्रहण से जुड़े दस्तावेज बैंक गारंटी का नवीनीकरण विक्रय प्रमाण पत्र वसीयत से जुड़े दस्तावेज तलाक विलेख क्षतिपूर्ति बंध पत्र और शेयर आवंटन पत्र सहित करीब 75 प्रकार के दस्तावेजों का पंजीयन किया जा सकेगा। खास बात यह है कि इस प्रक्रिया के माध्यम से देश के किसी दूसरे जिले में बैठकर और विदेश से भी दस्तावेज पंजीकृत कराने की सुविधा उपलब्ध हो सकती है।

फेसलेस रजिस्ट्री के लिए सुरक्षा और पहचान सत्यापन की प्रक्रिया भी अनिवार्य रखी गई है। पक्षकारों को आधार नंबर देना होगा और वर्चुअल प्रक्रिया के दौरान एआई सिस्टम के जरिए वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी। इसमें व्यक्ति को सिर दाएं बाएं और ऊपर नीचे घुमाने के निर्देश दिए जाएंगे। इसके बाद वोटर आईडी पासपोर्ट पैन कार्ड या ड्राइविंग लाइसेंस जैसे पहचान पत्रों में से किसी एक की जानकारी ली जाएगी। एआई सिस्टम वीडियो आधार फोटो और पहचान पत्र की तस्वीर का मिलान करेगा। सभी जानकारी सही पाए जाने के बाद ही साइबर रजिस्ट्री की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

इसके अलावा पक्षकार को यह घोषणा भी करनी होगी कि वह किसी दबाव में नहीं है और अपनी इच्छा से इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों के जरिए पंजीयन करा रहा है। इसके लिए ई केवाईसी और ई साइन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से रजिस्ट्री कार्यालयों में भीड़ घटेगी और आम नागरिकों को ज्यादा तेज पारदर्शी और सुविधाजनक सेवा मिल सकेगी। प्रॉपर्टी लेनदेन बढ़ने के बीच संपदा 2.0 पोर्टल में किए गए बदलावों से रजिस्ट्री प्रक्रिया को डिजिटल बनाने की दिशा में भी इसे अहम कदम माना जा रहा है।

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