सौंसर में मल्टी प्रोडक्ट एसईजेड को मिली नई दिशा, वन विभाग ने 9.5 करोड़ रुपये एनपीवी जमा कराने और नए फॉरेस्ट क्लीयरेंस की रखी शर्त
करीब आठ हजार एकड़ अधिगृहित भूमि पर प्रस्तावित इस परियोजना में अब राज्य की औद्योगिक प्रोत्साहन नीति के तहत विभिन्न प्रकार की सुविधाएं और प्रोत्साहन देने की योजना बनाई गई है। इसके लिए राज्य के औद्योगिक निवेश एवं प्रोत्साहन विभाग ने विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर कैबिनेट की स्वीकृति के लिए आगे बढ़ाया है। सरकार का मानना है कि मल्टी प्रोडक्ट एसईजेड का स्वरूप निवेशकों को अधिक आकर्षित करेगा और क्षेत्र में विविध उद्योगों की स्थापना का मार्ग प्रशस्त करेगा।
हालांकि परियोजना के नए स्वरूप के साथ ही वन विभाग ने महत्वपूर्ण शर्तें भी सामने रख दी हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि वैकल्पिक वृक्षारोपण के लिए नेट प्रेजेंट वैल्यू (एनपीवी) के रूप में 9 करोड़ 50 लाख रुपये जमा कराना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही भू-उपयोग में बदलाव होने के कारण परियोजना के लिए नए सिरे से वन स्वीकृति प्राप्त करनी होगी। वन विभाग का यह अभिमत परियोजना की आगे की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
जानकारी के अनुसार प्रस्तावित एसईजेड का एक बड़ा हिस्सा वन भूमि से जुड़ा हुआ है। पहले चरण में इस भूमि के उपयोग के लिए वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराकर प्रारंभिक वन स्वीकृति प्राप्त कर ली गई थी, लेकिन उस समय निर्धारित नेट प्रेजेंट वैल्यू की राशि जमा नहीं कराई गई थी। अब परियोजना का स्वरूप बदलने के बाद पूर्व में मिली स्वीकृतियां पर्याप्त नहीं मानी जाएंगी और पूरी प्रक्रिया को संशोधित नियमों के अनुरूप आगे बढ़ाना होगा।
इस नई स्थिति में परियोजना विकसित करने वाली कंपनी को वन विभाग की सभी शर्तों का पालन करते हुए आवश्यक दस्तावेज, स्वीकृतियां और वित्तीय दायित्व पूरे करने होंगे। इसके बाद ही परियोजना को अंतिम मंजूरी मिलने का रास्ता साफ हो सकेगा। प्रशासनिक स्तर पर भी विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सभी आवश्यक अनुमतियां समय पर मिल जाती हैं तो मल्टी प्रोडक्ट एसईजेड क्षेत्र के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इससे विनिर्माण, प्रसंस्करण और अन्य औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। साथ ही आसपास के क्षेत्रों में आधारभूत संरचना, परिवहन और व्यापारिक गतिविधियों का भी विस्तार हो सकता है।
फिलहाल परियोजना का भविष्य वन विभाग की शर्तों के पालन और राज्य सरकार की अंतिम स्वीकृति पर निर्भर है। यदि सभी औपचारिकताएं तय समय पर पूरी होती हैं तो लंबे समय से प्रतीक्षित यह औद्योगिक परियोजना एक नए स्वरूप के साथ आगे बढ़ सकती है और पांढुर्ना तथा आसपास के क्षेत्रों के औद्योगिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है।
