August 3, 2026

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सोनम ने किया आत्मसमर्पण, अब तेज होगी राजा रघुवंशी हत्याकांड की सुनवाई

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इंदौर । इंदौर के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। मामले की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद मेघालय के शिलॉन्ग स्थित अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। कोर्ट में पेशी के बाद उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने 23 जुलाई को उसकी जमानत रद्द करते हुए तीन सप्ताह के भीतर संबंधित अदालत में सरेंडर करने का आदेश दिया था। निर्धारित समय सीमा पूरी होने से पहले ही सोनम ने अदालत पहुंचकर आत्मसमर्पण कर दिया।

सोनम के सरेंडर के बाद मृतक राजा रघुवंशी के भाई विपिन रघुवंशी ने इसे न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने मेघालय सरकार और जांच एजेंसियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद और मजबूत हुई है।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा था कि हाईकोर्ट और ट्रायल कोर्ट ने केवल तकनीकी आधार पर जमानत देकर गलती की थी। अदालत ने माना कि गिरफ्तारी के दौरान कारणों की जानकारी दिए जाने में यदि कोई सीमित कमी रही भी हो तो केवल उसी आधार पर आरोपी को जमानत देना उचित नहीं माना जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 22 के तहत गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के कारण बताना आवश्यक है लेकिन इस मामले में यह नहीं कहा जा सकता कि आरोपी को पूरी तरह से जानकारी नहीं दी गई थी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी के आधार बिल्कुल न बताना और कुछ जानकारियों में तकनीकी कमी होना दोनों अलग-अलग परिस्थितियां हैं। इसलिए केवल प्रक्रिया संबंधी आपत्तियों के आधार पर जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।

सर्वोच्च अदालत ने यह भी कहा कि सोनम ने मजिस्ट्रेट के समक्ष गिरफ्तारी के कारणों और संबंधित दस्तावेज प्राप्त होने की पुष्टि की थी। यदि जांच प्रक्रिया में किसी प्रकार की कमी भी हो तो कानून जांच एजेंसी को दोबारा कार्रवाई करने का अधिकार देता है। ऐसे में तकनीकी पहलुओं के आधार पर जमानत देना न्यायोचित नहीं माना जा सकता।

जस्टिस एमएम सुंदरेशन और जस्टिस पीबी वरेले की पीठ ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि मामले की सुनवाई शुरू हो चुकी है और आरोपी की मेरिट के आधार पर जमानत याचिकाएं पहले ही खारिज हो चुकी हैं। इस चरण में आरोपी का जेल से बाहर रहना ट्रायल को प्रभावित कर सकता है। इसी कारण अदालत ने हाईकोर्ट का जमानत आदेश रद्द करते हुए सोनम को तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय पुलिस को यह भी निर्देश दिया है कि राजा रघुवंशी हत्याकांड की सुनवाई छह महीने के भीतर पूरी करने का प्रयास किया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित अवधि में ट्रायल पूरा नहीं होता है तो आरोपी कानून के तहत दोबारा जमानत के लिए आवेदन कर सकती है।

सोनम के आत्मसमर्पण के साथ अब इस बहुचर्चित हत्याकांड की कानूनी प्रक्रिया एक नए चरण में पहुंच गई है। जांच एजेंसियों और पीड़ित परिवार की नजर अब इस बात पर टिकी है कि अदालत में सुनवाई तय समय सीमा के भीतर पूरी हो और मामले में न्यायिक प्रक्रिया जल्द अपने अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचे।

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