September 13, 2026

हाथ में नहीं ठेले पर तिरंगा और साथ में सफाई का जज्बा, 70 साल के भोला ने पेश की देशभक्ति की मिसाल

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इंदौर। इंदौर में गुरुवार को निकली राष्ट्रपथ तिरंगा यात्रा में हजारों लोग देशभक्ति के रंग में नजर आए। हाथों में तिरंगा लेकर लोग देशभक्ति के गीतों पर आगे बढ़ रहे थे। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के तक्षशिला परिसर से शुरू हुई यह यात्रा भंवरकुआं से राजीव गांधी चौराहे की ओर बढ़ रही थी। सड़कों पर जगह जगह तिरंगे दिखाई दे रहे थे और पूरा माहौल देशभक्ति से सराबोर था। लेकिन इस विशाल यात्रा के पीछे चल रहे एक बुजुर्ग ने अपने अलग अंदाज से लोगों का ध्यान खींच लिया।

यात्रा का आखिरी हिस्सा भंवरकुआं चौराहा पार कर चुका था। इसी दौरान 70 साल से अधिक उम्र के भोला बाबूलाल शिंदे अपना ठेला लेकर धीरे धीरे यात्रा के पीछे चलते दिखाई दिए। उनके ठेले पर तिरंगा लगा हुआ था। एक हाथ ठेले के हत्थे पर था और उनकी नजर लगातार सड़क पर पड़ी खाली प्लास्टिक की बोतलों पर थी। जहां भी उन्हें बोतल दिखाई देती वे ठेला रोकते और झुककर उसे उठाकर ठेले में रख लेते। इसके बाद वे फिर आगे बढ़ जाते।

तिरंगा यात्रा में शामिल लोगों के लिए रास्ते में जगह जगह पानी और जीरू की छोटी बोतलों की व्यवस्था की गई थी। लोग पानी और जीरू पीकर आगे बढ़ते गए लेकिन कई खाली बोतलें सड़क पर ही छूट गईं। भोला इन बोतलों को एक एक करके उठाते रहे। यात्रा आगे बढ़ती रही और उनके पीछे पीछे ठेला भी चलता रहा। ठेले पर लगा तिरंगा और उसमें जमा होती प्लास्टिक की बोतलें एक साथ आगे बढ़ती रहीं।

भोला किसी संस्था की ओर से सफाई करने नहीं निकले थे और न ही किसी ने उन्हें ऐसा करने की जिम्मेदारी दी थी। उन्होंने सड़क पर गंदगी देखी तो खुद ही बोतलें उठाना शुरू कर दिया। भंडारी ब्रिज इलाके में रहने वाले भोला बाबूलाल शिंदे भंगार बीनने और उसे बेचने का काम करते हैं। लोगों ने जब उन्हें इस तरह बोतलें बटोरते देखा तो उनसे बातचीत की। उन्होंने बताया कि वे यात्रा के पीछे पीछे राजीव गांधी चौराहे तक जाएंगे और रास्ते में सड़क पर पड़ी बोतलें उठाते रहेंगे।

जब उनसे पूछा गया कि वह ऐसा क्यों कर रहे हैं तो उन्होंने बेहद सहज अंदाज में कहा कि अपने देश में सफाई अच्छी होना चाहिए इसलिए सफाई कर रहा हूं। उनकी यह बात वहां मौजूद लोगों को भी प्रभावित कर गई। हजारों लोग तिरंगा लेकर देशभक्ति का संदेश दे रहे थे और यात्रा के सबसे पीछे एक बुजुर्ग अपने काम से स्वच्छता का संदेश दे रहे थे।

भोला के लिए सड़क से उठाई जा रही ये बोतलें केवल कचरा नहीं थीं। इनमें उनकी रोजी रोटी भी छिपी थी। जब उनसे पूछा गया कि इन बोतलों का क्या करेंगे तो उन्होंने बताया कि इन्हें दुकानदार को बेच देंगे और उससे मिलने वाले पैसे से रोटी का इंतजाम करेंगे। यानी जिस कचरे को लोग सड़क पर छोड़कर आगे बढ़ गए थे वही भोला के लिए मेहनत और कमाई का जरिया भी था।

इस पूरे दृश्य में देशभक्ति का एक अलग रूप दिखाई दिया। तिरंगा यात्रा में शामिल हजारों लोग राष्ट्रप्रेम का उत्सव मना रहे थे जबकि भोला अपने छोटे से ठेले के साथ उसी भावना को सफाई और मेहनत से जोड़ रहे थे। उनके ठेले पर लगा तिरंगा और सड़क से उठाई जा रही प्लास्टिक की बोतलें यह संदेश देती नजर आईं कि देश के प्रति जिम्मेदारी केवल नारों और आयोजनों तक सीमित नहीं है। अपने आसपास की जगह को साफ रखना और ईमानदारी से मेहनत करना भी देश के प्रति सम्मान का एक तरीका हो सकता है।

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