September 13, 2026

अभिजीत दीपके के खिलाफ दिल्ली पुलिस में शिकायत, सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर ने एफआईआर और गिरफ्तारी की मांग की

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नई दिल्ली । कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके के खिलाफ दिल्ली पुलिस में एक आवेदन प्रस्तुत किया गया है। सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर फैजान अंसारी ने राष्ट्रीय राजधानी पहुंचकर अभिजीत दीपके के विरुद्ध प्राथमिक दर्ज करने और उन्हें हिरासत में लेने की मांग उठाई है। शिकायत आवेदन में कई संगीन आरोप लगाए गए हैं, यद्यपि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और पुलिस प्रशासन की तरफ से अब तक कोई आधिकारिक वक्तव्य जारी नहीं हुआ है।

शिकायतकर्ता फैजान अंसारी ने दिल्ली पुलिस के उच्च अधिकारियों को सौंपे पत्र में कहा कि उन पर अभिजीत दीपके के समर्थकों द्वारा दो अलग-अलग मौकों पर हमला किया गया। उनके अनुसार पहली घटना पुणे में और दूसरी औरंगाबाद में घटित हुई, जिनके संदर्भ में स्थानीय थानों में पूर्व में ही सूचना दी जा चुकी है। उन्होंने इन घटनाओं से जुड़े साक्ष्य होने का दावा करते हुए दिल्ली पुलिस से त्वरित वैधानिक कदम उठाने का अनुरोध किया है।

आवेदन में अभिजीत दीपके पर कई अन्य गंभीर आक्षेप भी मढ़े गए हैं। इसमें उन्हें पाकिस्तान का एजेंट बताने के साथ-साथ उमर खालिद का समर्थन करने का आरोप लगाया गया है। इसके अतिरिक्त यह दावा भी किया गया है कि विगत आंदोलनों में कुछ नामचीन हस्तियों को धनराशि देकर आमंत्रित किया गया था। हालांकि, किसी भी प्रशासनिक या न्यायिक संस्था ने इन आरोपों का समर्थन नहीं किया है और न ही अभिजीत दीपके की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान आया है।

फैजान अंसारी ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे विशेष रूप से मुंबई से दिल्ली केवल इस आवेदन को सौंपने आए हैं। उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए चेतावनी दी कि समय पर उचित कार्रवाई न होने से स्थिति बिगड़ सकती है। मध्य प्रदेश समेत देशभर के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी इस पूरे घटनाक्रम की चर्चाएं तेज हो गई हैं, लेकिन यह पूरी तरह से एकपक्षीय आरोपों पर आधारित मामला है।

यह विवाद ऐसे वक्त सामने आया है जब सीजेपी और अभिजीत दीपके पूर्व में आयोजित आंदोलनों के कारण सार्वजनिक रूप से चर्चा का केंद्र रहे हैं। जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों के दौरान भी उनके संगठन की भूमिका पर बात हुई थी। फिलहाल दिल्ली पुलिस को प्राप्त शिकायत की समीक्षा की जा रही है और प्राथमिक जांच के पश्चात ही अगली विधिक प्रक्रिया तय होगी। जांच पूर्ण होने तक इन दावों को अंतिम तथ्य नहीं माना जा सकता।

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