September 13, 2026

विमानन सुरक्षा पर मंडराया नशीले पदार्थों का खतरा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के क्रू मेंबर्स की डोप टेस्टिंग बढ़ाने की मांग

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नई दिल्ली । फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की उड़ान में हुई हालिया घटना के बाद देश के नागरिक उड्डयन क्षेत्र में सुरक्षा और जांच मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विमान के पायलट के नशीले पदार्थों के शुरुआती डोप टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने के बाद विमानन नियामक ने सख्त कदम उठाने के संकेत दिए हैं।

विमानन विशेषज्ञों के अनुसार थाईलैंड और नीदरलैंड जैसे देशों में कुछ पदार्थों की कानूनी सुलभता एयरलाइंस कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। शराब की उपस्थिति जांचने के लिए नियमित ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट उपलब्ध हैं, लेकिन अन्य साइकोएक्टिव पदार्थों का परीक्षण अपेक्षाकृत जटिल प्रक्रिया माना जाता है।

अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन के दिशा-निर्देशों के मुताबिक किसी भी नशीले पदार्थ के प्रभाव में विमान का संचालन यात्रियों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकता है। ऐसे पदार्थों का असर शरीर में लंबे समय तक बना रहता है जिससे चालक दल की निर्णय क्षमता प्रभावित हो सकती है।

वर्तमान में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के नियमों के तहत सभी अनुसूचित वाणिज्यिक एयरलाइंस को अपने कम से कम 10 प्रतिशत क्रू मेंबर्स और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स का वार्षिक रूप से रैंडम डोप टेस्ट कराना अनिवार्य है। मध्य प्रदेश सहित देश भर के प्रमुख हवाई अड्डों पर अब इन नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जा रहा है।

विमानन अधिकारियों का मानना है कि केवल स्व-घोषणा या नशामुक्ति अभियानों के भरोसे इस समस्या से नहीं निपटा जा सकता। इसके लिए रैंडम डोप जांच की आवृत्ति बढ़ाने और नियमों को अधिक कठोर बनाने की आवश्यकता जताई जा रही है ताकि उड़ानों के दौरान यात्रियों की सुरक्षा पूरी तरह से सुनिश्चित की जा सके।

नियामक संस्थाएं अब चिकित्सा अधिकारियों के साथ मिलकर परीक्षण प्रक्रियाओं को और अधिक सटीक बनाने की दिशा में काम कर रही हैं। संदिग्ध मामलों में कानूनी कार्रवाई और लाइसेंस निलंबन जैसे कड़े प्रावधान लागू करने पर भी विचार किया जा रहा है।

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