August 3, 2026

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए सीजेपी ने दिया दो दिनों में दूसरा अल्टीमेटम

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नई दिल्ली ।
देश में पेपर लीक मामले को लेकर पिछले दिनों चले बड़े जनांदोलन के बाद एक बार फिर सड़कों पर विरोध प्रदर्शन की आहट तेज हो गई है। जंतर-मंतर से संसद तक चले प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने केंद्र सरकार को दो दिनों के भीतर दूसरी बार कड़ा अल्टीमेटम जारी किया है। संगठन का साफ कहना है कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज पुलिस मुकदमे तुरंत वापस नहीं लिए गए, तो वे एक बार फिर देशव्यापी आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होंगे।

इस पूरे विवाद की ताजा वजह सुप्रीम कोर्ट में हुई हालिया सुनवाई बनी है। शीर्ष अदालत की चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ ने विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर हुए पुलिस बल प्रयोग से जुड़ी याचिकाओं पर विचार करते हुए पुलिस को मौजूदा प्राथमिकियों की जांच जारी रखने की इजाजत दी है। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया है कि जिन युवाओं का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और जिन्होंने केवल शांतिपूर्ण प्रदर्शन में हिस्सा लिया था, उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी और हिरासत में लिए गए ऐसे निर्दोष लोगों को रिहा किया जाए।

अदालत के इस रुख के सामने आते ही सीजेपी ने केंद्र सरकार पर अपनी सहमति और लिखित आश्वासनों से पीछे हटने का बड़ा आरोप लगाया है। संगठन के प्रतिनिधियों का कहना है कि पच्चीस जुलाई को सरकार के साथ हुई वार्ता के दौरान यह लिखित भरोसा दिया गया था कि सभी प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामले पूरी तरह रद्द किए जाएंगे और किसी भी छात्र के खिलाफ आगे कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाएगा। इसी ठोस आश्वासन के आधार पर ही राष्ट्रव्यापी आंदोलन को स्थगित करने का फैसला लिया गया था।

संगठन का आरोप है कि अदालत में सुनवाई के दौरान सरकारी तंत्र ने प्राथमिकियों को बनाए रखने का कड़ा विरोध नहीं किया, जिससे अब भाजपा शासित राज्यों की पुलिस को प्रदर्शनकारियों पर शिकंजा कसने का रास्ता मिल गया है। अगर सरकार की मंशा साफ होती, तो वह अपने प्रशासनिक अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए मुकदमों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर सकती थी। सरकार का यह ढुलमुल रवैया लाखों युवाओं के भविष्य और सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।

उल्लेखनीय है कि जून महीने में नई दिल्ली में शुरू हुआ यह आंदोलन जुलाई के मध्य तक बेहद उग्र रूप ले चुका था। संसद मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई भारी झड़प में कई छात्र और पुलिसकर्मी घायल हुए थे। स्थिति बिगड़ती देख सरकार ने दो दौर की द्विपक्षीय बातचीत की थी, जिसके बाद तत्कालीन शिक्षा मंत्री को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इसके अलावा मृतक छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को अभयदान देने का समझौता हुआ था। अब उस समझौते के टूटने की आशंका ने एक बार फिर देश के युवाओं और छात्रों को उद्वेलित कर दिया है।

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