October 9, 2026

अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे पर सियासी घमासान, रामलला के दर्शन नहीं करने को लेकर संतों और भाजपा नेताओं ने उठाए सवाल

0
16-1791534062
नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक बयानबाजी तेज होती दिखाई दे रही है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे को लेकर भाजपा नेताओं और संतों ने सवाल उठाए हैं। अखिलेश यादव बीते दिन पूर्व मंत्री तेज नारायण पांडेय के आवास पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में शामिल होने अयोध्या पहुंचे थे। हालांकि, उनके राम मंदिर में रामलला के दर्शन नहीं करने को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर समेत भाजपा नेताओं ने अखिलेश यादव पर निशाना साधा।

उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जिस तरह की राजनीति की जा रही है, उससे खुद अखिलेश यादव के सशंकित होने का संकेत मिलता है। राजभर ने कहा कि यदि अखिलेश यादव अयोध्या गए थे, तो उन्हें हनुमानगढ़ी और भगवान राम के दर्शन भी कर लेने चाहिए थे। उनके मुताबिक, ऐसा करने से इस तरह के सवाल खड़े नहीं होते। राजभर ने श्रीमद्भागवत कथा के आयोजन स्थल पर नारेबाजी को लेकर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जहां भागवत कथा हो रही है, वहां अखिलेश यादव के लोग नारेबाजी कर रहे हैं। उन्होंने इस कृत्य की निंदा करते हुए कहा कि भागवत कथा के स्थान को राजनीतिक मंच बनाना अखिलेश यादव को ही शोभा देता है।

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी इस मामले में समाजवादी पार्टी को आत्मावलोकन करने की सलाह दी। भाजपा नेता ने सपा पर मुस्लिम तुष्टिकरण और जाति के नाम पर वोट मांगने की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ऐसी राजनीति करने वाले लोग उत्तर प्रदेश में सफल नहीं होंगे। पाठक ने अयोध्या में प्रचंड बहुमत के साथ जीत हासिल करने का दावा भी किया। उनके बयान से स्पष्ट है कि भाजपा नेता अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे को आगामी चुनावों के राजनीतिक संदर्भ में देख रहे हैं।

भाजपा नेता राकेश त्रिपाठी ने भी अखिलेश यादव के दौरे को लेकर पलटवार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव ने सत्ता में रहते हुए अयोध्या को भुला दिया था। त्रिपाठी ने कहा कि योगी सरकार के सत्ता में आने के बाद अयोध्या में 50 हजार से अधिक की परियोजनाएं आई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राम मंदिर भाजपा का मंदिर नहीं है, लेकिन अयोध्या पहुंचने के बावजूद अखिलेश यादव रामलला के दर्शन करने नहीं गए। उनके बयान में अयोध्या के विकास और राम मंदिर से जुड़े मुद्दों को लेकर सपा की भूमिका पर सवाल उठाए गए।

अखिलेश यादव के राम मंदिर में दर्शन नहीं करने को लेकर संतों ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। अयोध्या दौरे के दौरान अखिलेश यादव ने श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के मंच से भगवान कृष्ण और न्याय की बात की, लेकिन राम के बारे में कुछ नहीं कहा। यह बात संतों को खटकी और उनके दौरे को लेकर सवाल उठने लगे। इस तरह धार्मिक आयोजन में उनकी मौजूदगी और रामलला के दर्शन नहीं करने का मुद्दा राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।

उत्तर प्रदेश में कुछ महीनों बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में नेताओं के दौरे और बयानों को चुनावी राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी समाजवादी पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे पर उठे सवालों के बीच भाजपा नेताओं ने सपा की राजनीतिक रणनीति और धार्मिक मुद्दों पर उसके रुख को निशाने पर लिया है। वहीं, इस पूरे विवाद का केंद्र अखिलेश यादव का भागवत कथा में शामिल होना और रामलला के दर्शन नहीं करना बना हुआ है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed