September 13, 2026

युवा, बेरोजगारी और महंगाई को लेकर कांग्रेस का केंद्र पर हमला, इमरान मसूद और रेणुका चौधरी ने उठाए सवाल हेडलाइन 2:

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नई दिल्ली । 
राष्ट्रगीत, झंडा फहराने और राष्ट्रगान को लेकर राजनीतिक बहस के बीच कांग्रेस ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा है। कांग्रेस नेताओं ने देशभक्ति से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ युवाओं की बेरोजगारी, बढ़ती महंगाई, टैक्स का बोझ और महंगी होती ईएमआई जैसे विषयों को प्रमुखता से उठाते हुए सरकार से इन पर चर्चा करने की मांग की है।

कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने राष्ट्रगीत को लेकर बीजेपी पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी को राष्ट्रगीत के मुद्दे पर अचानक इतना जोर देने की जरूरत क्यों महसूस हो रही है। मसूद ने कहा कि देश में जब राष्ट्रगीत गाने को लेकर विरोध और कार्रवाई की स्थिति बनी थी, तब बीजेपी के लोग इस तरह सामने नहीं आए थे।

उन्होंने आजादी के बाद के राजनीतिक इतिहास का उल्लेख करते हुए बीजेपी पर आरोप लगाया कि उसके लोगों ने लंबे समय तक राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान और झंडा फहराने जैसे विषयों को लेकर वह भूमिका नहीं निभाई, जिसका दावा अब किया जा रहा है। मसूद ने कहा कि देश की जनता शिक्षित है और राजनीतिक दलों के पुराने रुख तथा उनके वर्तमान बयानों के बीच अंतर को समझती है।

मसूद ने यह भी कहा कि आज सूचना तकनीक के दौर में लोगों के पास पुराने घटनाक्रमों और बयानों को जानने के कई साधन मौजूद हैं। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का जिक्र करते हुए कहा कि किसी भी पुराने तथ्य की जानकारी हासिल की जा सकती है। उनके अनुसार देशभक्ति से जुड़े इतिहास को किसी एक संगठन या विचारधारा तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए।

कांग्रेस नेता ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन का इतिहास व्यापक रहा है और इसमें अलग-अलग विचारधाराओं तथा समुदायों से जुड़े लोगों ने योगदान दिया था। इसलिए देशभक्ति पर किसी एक संगठन या राजनीतिक विचारधारा का अधिकार नहीं माना जा सकता। उनके इस बयान के जरिए कांग्रेस ने राष्ट्रवाद की मौजूदा राजनीतिक बहस को स्वतंत्रता आंदोलन के व्यापक इतिहास से जोड़ने की कोशिश की।

वहीं कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने सरकार और बीजेपी नेताओं से जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दों पर चर्चा करने की अपील की। उन्होंने रोजगार की स्थिति को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि देश के युवाओं के सामने नौकरियों की चुनौती बनी हुई है। चौधरी ने कहा कि राजनीतिक बहस को उन मुद्दों पर भी केंद्रित किया जाना चाहिए जिनका सीधा असर आम लोगों के जीवन पर पड़ता है।

रेणुका चौधरी ने बढ़ती महंगाई, टैक्स के बोझ और ईएमआई महंगी होने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि आम लोगों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है और ऐसे समय में सरकार को इन समस्याओं पर जवाब देना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रुपये की स्थिति में गिरावट का असर लोगों की आर्थिक परिस्थितियों पर पड़ रहा है।

कांग्रेस नेताओं के इन बयानों से स्पष्ट है कि पार्टी राष्ट्रगीत और देशभक्ति से जुड़ी बहस के समानांतर आर्थिक और रोजगार संबंधी मुद्दों को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में लाना चाहती है। पार्टी का कहना है कि युवाओं के लिए रोजगार, महंगाई से राहत और आम परिवारों पर बढ़ते आर्थिक बोझ जैसे विषयों पर सरकार को जवाब देना चाहिए।

दूसरी ओर, राष्ट्रगीत और राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़े मुद्दे को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह बहस केवल राष्ट्रगीत की स्वीकार्यता तक सीमित रहने के बजाय देशभक्ति की राजनीतिक व्याख्या और जनता से जुड़े आर्थिक मुद्दों तक भी फैल सकती है।

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