September 13, 2026

पीएम मोदी का वीडियो हटाने के विवाद के बाद Meta पर कार्रवाई का दबाव बढ़ा, सरकार ने अवैध कंटेंट को लेकर मांगा जवाब

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नई दिल्ली । भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर गैरकानूनी सामग्री को लेकर सरकार का रुख लगातार सख्त होता जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े एक वीडियो को फेसबुक से हटाए जाने के विवाद के बाद Meta पर सरकार की निगरानी और दबाव बढ़ा था। इसी पृष्ठभूमि में अब कंपनी की ओर से बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी गैरकानूनी सामग्री यानी CSAM के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई है। इस पूरे घटनाक्रम ने भारत में सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही और उन्हें मिलने वाली सेफ हार्बर सुरक्षा को लेकर बहस को फिर तेज कर दिया है।

सरकारी रुख के अनुसार सोशल मीडिया कंपनियां यदि अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद गैरकानूनी सामग्री के खिलाफ जरूरी कदम नहीं उठाती हैं तो उन्हें कानूनी संरक्षण को लेकर मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। अधिकारियों का कहना है कि कानून का उल्लंघन करने वाली सामग्री के मामलों में सेफ हार्बर का लाभ स्वतः सुनिश्चित नहीं माना जा सकता। हालांकि किसी कंपनी ने कानून का उल्लंघन किया है या नहीं और उसे सेफ हार्बर सुरक्षा मिलेगी या नहीं इसका अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगा।

Meta के लिए यह मामला केवल CSAM सामग्री हटाने तक सीमित नहीं है। कंपनी के एल्गोरिदम, कंटेंट मॉडरेशन व्यवस्था और प्लेटफॉर्म पर सामग्री की पहुंच बढ़ाने वाली प्रणालियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सरकार की ओर से कंपनी से इस बात को लेकर जवाब मांगा गया है कि गैरकानूनी सामग्री को रोकने और बार बार सामने आने वाली ऐसी सामग्री पर कार्रवाई करने के लिए उसकी तकनीकी प्रणालियां किस तरह काम करती हैं।

प्रधानमंत्री मोदी का फेसबुक वीडियो कुछ समय के लिए हटाए जाने के बाद भारत में Meta की कार्यप्रणाली को लेकर विवाद काफी बढ़ गया था। इस घटनाक्रम के बाद कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों और सरकार के बीच बैठक भी हुई थी। Meta की ओर से वीडियो हटाए जाने को गलती बताया गया और कंपनी के प्रमुख मार्क जुकरबर्ग ने इस मामले पर माफी मांगी थी। इसके बाद सरकार ने प्लेटफॉर्म पर मौजूद अन्य गंभीर समस्याओं को लेकर भी कंपनी से जवाब तलब किया।

संसदीय स्तर पर भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को लेकर सख्त संदेश दिया गया था। समिति ने बाल यौन शोषण सामग्री, महिलाओं से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री और अन्य गैरकानूनी कंटेंट को हटाने की जिम्मेदारी को गंभीरता से लेने की बात कही थी। साथ ही चेतावनी दी गई थी कि कानून का पालन नहीं करने की स्थिति में संबंधित प्लेटफॉर्म के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

सरकार और Meta के बीच हुई चर्चाओं में CSAM के अलावा डीपफेक, वेरिफाइड अकाउंट की सुरक्षा, एल्गोरिद्मिक पक्षपात और भारतीय कानूनों के अनुपालन जैसे मुद्दे भी सामने आए। इससे स्पष्ट है कि भारत में सोशल मीडिया कंपनियों के लिए केवल कंटेंट हटाना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उन्हें अपनी मॉडरेशन व्यवस्था और तकनीकी प्रक्रियाओं को भी अधिक जवाबदेह बनाना पड़ सकता है।

दुनिया के दूसरे देशों में भी सोशल मीडिया से जुड़े नुकसान और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है। ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन सहित कई देशों में प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी और डिजिटल सामग्री की निगरानी को लेकर नियम कड़े किए जा रहे हैं। भारत में भी सरकार का मौजूदा रुख इसी व्यापक वैश्विक बहस के बीच सोशल मीडिया कंपनियों पर बढ़ती जवाबदेही का संकेत माना जा रहा है।

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