September 13, 2026

सोनिया गांधी की किताब पर पेंगुइन ने क्यों खींचे हाथ? इन हिस्सों में बदलाव चाहता था प्रकाशक

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नई दिल्ली। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी की बहुप्रतीक्षित पुस्तक ‘बिलोंगिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ के भारतीय संस्करण के प्रकाशन से पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने हाथ खींच लिए हैं। सूत्रों के मुताबिक, प्रकाशक पांडुलिपि के एक खास हिस्से में संपादकीय बदलाव के साथ कुछ अंश हटाना चाहता था। सोनिया गांधी ने बदलाव या कटौती करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद प्रकाशन का समझौता आगे नहीं बढ़ सका।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पेंगुइन के पीछे हटने के बाद कई बड़े प्रकाशक इस पुस्तक के भारतीय संस्करण के अधिकार हासिल करने की कोशिश में हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि हार्पर कॉलिंस इंडिया किताब के प्रकाशन का समझौता अंतिम रूप देने के करीब है।

भारत को छोड़कर दुनिया के अन्य देशों में यह किताब 10 नवंबर को जारी होगी। पुस्तक के प्रकाशन की घोषणा सबसे पहले अमेरिकी प्रकाशक अल्फ्रेड ए. नोपफ ने की थी, जो पेंगुइन रैंडम हाउस का ही एक डिवीजन है। नोपफ के मुताबिक, किताब की शुरुआती एक लाख प्रतियां प्रकाशित की जाएंगी।

छह दशक की निजी कहानी

सोनिया गांधी पहले भी किताबें लिख चुकी हैं, लेकिन उनके करीबियों के अनुसार ‘बिलोंगिंग’ उनके जीवन का सबसे निजी और प्रामाणिक विवरण है। इसमें 1965 में कैम्ब्रिज में राजीव गांधी से उनकी पहली मुलाकात से लेकर नेहरू-गांधी परिवार का हिस्सा बनने तक के सफर को शामिल किया गया है।

किताब में संजय गांधी की मृत्यु और इंदिरा गांधी तथा राजीव गांधी की हत्या के दौरान झेले व्यक्तिगत दुखों का भी जिक्र है। इसके अलावा 2004 में कांग्रेस को जनादेश मिलने के बावजूद प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं करने के फैसले के पीछे की परिस्थितियों और कारणों पर भी सोनिया गांधी ने अपनी बात रखी है।

सोनिया गांधी ने पुस्तक के बारे में कहा कि उनके परिवार पर काफी कुछ लिखा गया है, लेकिन बहुत कम लेखन ऐसा है जो उनके परिवार के सदस्यों की भावनाओं, फैसलों और मानवीय कमजोरियों को वास्तविक रूप में सामने रखता है। उनके मुताबिक, यह किताब पिछले छह दशकों के सामाजिक और राजनीतिक बदलावों को भी एक अलग नजरिए से देखने का मौका देती है।

पेंगुइन के फैसले पर फिर उठे सवाल

पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया का किसी चर्चित पुस्तक से पीछे हटने का यह पहला मामला नहीं है। इसी साल प्रकाशक ने पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ को प्रकाशित करने से इनकार किए जाने की बात कही थी। हालांकि, राहुल गांधी ने संसद में इस किताब की हार्ड कॉपी दिखाई थी।

जून में पेंगुइन ने ग्राफिक उपन्यासकार जो सैको की मुजफ्फरनगर दंगों पर आधारित किताब ‘द वंस एंड फ्यूचर रायट’ का प्रकाशन भी रद्द कर दिया था। इसके पीछे कानूनी जांच और नक्शे में सीमाओं से जुड़े मुद्दों को वजह बताया गया था।

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