September 13, 2026

चीफ जस्टिस की कॉकरोच टिप्पणी के दुरुपयोग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और सीबीआई को भेजा नोटिस

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नई दिल्ली । 
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने वर्चुअल अदालती कार्यवाही के वीडियो को संपादित कर सोशल मीडिया पर गलत संदर्भ में प्रसारित करने और उसका व्यावसायिक उपयोग करने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने इस विषय पर केंद्र सरकार और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो से विस्तृत जवाब तलब किया है।

यह मामला मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत द्वारा तीन माह पूर्व एक सुनवाई के दौरान की गई कॉकरोच टिप्पणी से जुड़ा हुआ है। दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि अदालती कार्यवाही की चुनिंदा वीडियो क्लिप्स को चालाकी से एडिट कर सार्वजनिक किया गया जिसका मूल संदर्भ से कोई संबंध नहीं था।

याचिकाकर्ता के अनुसार 15 मई को फर्जी वकीलों और अदालती प्रक्रियाओं के दुरुपयोग पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह टिप्पणी की थी। हालांकि बाद में इस वक्तव्य को तोड़-मरोड़कर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर मीम्स और व्यावसायिक सामग्री के रूप में प्रचारित किया गया।

याचिका में दलील दी गई है कि न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाने और जजों की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से ऐसी गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा है। वर्तमान में अदालती कार्यवाहियों के अनधिकृत उपयोग और उससे होने वाली कमाई को रोकने के लिए कोई प्रभावी कानूनी तंत्र उपलब्ध नहीं है।

मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न विधिक हलकों में न्यायालयीन कार्यवाहियों की लाइव स्ट्रीमिंग के दुरुपयोग को लेकर चिंता जताई जा रही है। शीर्ष अदालत से मांग की गई है कि संस्थागत गरिमा की रक्षा के लिए ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए जाएं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों से इस प्रकार के दुरुपयोग को रोकने तथा संबंधित संस्थाओं की गतिविधियों की जांच करने के संबंध में रुख स्पष्ट करने को कहा है।

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