August 3, 2026

सरकार ने मेटा और इंस्टाग्राम की शीर्ष लीडरशिप को तलब किया, आईटी नियमों के पालन पर मांगा जवाब

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नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म मेटा और इंस्टाग्राम की शीर्ष वैश्विक लीडरशिप को आईटी नियमों के अनुपालन और प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित होने वाले कंटेंट के प्रबंधन से जुड़े मामलों में जवाब देने के लिए तलब किया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ा एक वीडियो फेसबुक प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के बाद व्यापक चर्चा का विषय बन गया था। वीडियो बाद में दोबारा बहाल कर दिया गया, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और नियामकीय अनुपालन को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

बताया गया है कि इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने मेटा के ग्लोबल अफेयर्स प्रेसिडेंट जोएल कपलन और इंस्टाग्राम प्रमुख एडम मोसेरी को इस मामले में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के लिए कहा है। मंत्रालय की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि चर्चा केवल प्रधानमंत्री के वीडियो तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि प्लेटफॉर्म पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अथवा सिंथेटिक तरीके से तैयार किए गए कंटेंट, कंटेंट मॉडरेशन प्रणाली और सूचना प्रौद्योगिकी नियमों के प्रभावी अनुपालन जैसे व्यापक विषय भी बैठक का हिस्सा होंगे।

सरकारी सूत्रों के अनुसार मंत्रालय यह समझना चाहता है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भारत में लागू डिजिटल नियमों का पालन किस प्रकार सुनिश्चित कर रहे हैं। इसके साथ ही यह भी समीक्षा की जाएगी कि संवेदनशील या सार्वजनिक महत्व वाले कंटेंट को हटाने अथवा प्रतिबंधित करने की प्रक्रिया में किन मानकों का पालन किया जाता है और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कंपनियों ने क्या व्यवस्था बनाई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संबंधित वीडियो हटाए जाने के बाद मेटा की ओर से सफाई दी गई थी कि यह कार्रवाई किसी नीतिगत निर्णय का परिणाम नहीं थी, बल्कि तकनीकी त्रुटि के कारण वीडियो प्लेटफॉर्म से हट गया था। कंपनी ने बाद में संबंधित कंटेंट को बहाल कर दिया और इसे अनजाने में हुई गलती बताया। हालांकि सरकार इस स्पष्टीकरण से पूरी तरह संतुष्ट दिखाई नहीं दे रही है और पूरे मामले की विस्तृत समीक्षा करना चाहती है।

बताया जा रहा है कि मंत्रालय विशेष रूप से यह जानना चाहता है कि स्वचालित कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम किस प्रकार काम करते हैं और यदि किसी तकनीकी गड़बड़ी के कारण सार्वजनिक महत्व का कंटेंट प्रभावित होता है तो उसे सुधारने के लिए कंपनियों के पास क्या प्रक्रिया मौजूद है। साथ ही जेनरेटेड और सिंथेटिक कंटेंट की पहचान, लेबलिंग और निगरानी से जुड़े प्रावधानों पर भी विस्तार से चर्चा होने की संभावना है।

हाल के वर्षों में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फर्जी, भ्रामक और एआई से तैयार किए गए कंटेंट को लेकर सरकार लगातार सतर्क रुख अपनाती रही है। सूचना प्रौद्योगिकी नियमों के तहत सोशल मीडिया कंपनियों से अपेक्षा की जाती है कि वे पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी कंटेंट मॉडरेशन प्रणाली बनाए रखें तथा आवश्यक होने पर संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करें।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस वीडियो को साझा किया था, उसमें उन्होंने नीट पेपर लीक के मुद्दे पर युवाओं को संबोधित करते हुए दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई और मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए फास्ट-ट्रैक व्यवस्था विकसित करने की बात कही थी। उसी वीडियो के अस्थायी रूप से हटने के बाद यह विवाद सामने आया। अब सरकार और मेटा के बीच प्रस्तावित बैठक को डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही, आईटी नियमों के अनुपालन और कंटेंट मॉडरेशन व्यवस्था के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मामले में होने वाली चर्चा पर सभी संबंधित पक्षों की नजर बनी रहेगी।

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