September 13, 2026

पीएम मोदी का वीडियो हटने के विवाद पर महुआ मोइत्रा का बयान, मेटा और सरकार के बीच बढ़ा सियासी टकराव

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नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फेसबुक वीडियो कुछ समय के लिए हटाए जाने के बाद शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक और तकनीकी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। इस पूरे मामले में तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग के समर्थन में बयान देते हुए कहा है कि उन्हें किसी भी प्रकार के सरकारी दबाव में नहीं आना चाहिए और न ही इस मुद्दे पर माफी मांगनी चाहिए। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर और तेज हो गया है।

महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में आरोप लगाया कि भारत सरकार अक्सर अपनी आलोचना से जुड़े कंटेंट को हटवाने का प्रयास करती है। उन्होंने कहा कि किसी तकनीकी कारण से कुछ घंटों के लिए वीडियो हट जाना कोई ऐसा मामला नहीं है, जिससे बड़ा संकट पैदा हो जाए। उनका कहना था कि किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म को स्वतंत्र रूप से अपने नियमों के अनुसार काम करना चाहिए और दबाव में निर्णय नहीं लेने चाहिए।

यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो फेसबुक से अस्थायी रूप से हट गया था। वीडियो में उन्होंने युवाओं से संवाद करते हुए पेपर लीक जैसे मामलों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया था। बाद में मेटा ने इसे तकनीकी त्रुटि बताते हुए खेद व्यक्त किया और वीडियो को दोबारा बहाल कर दिया। हालांकि केंद्र सरकार ने इस स्पष्टीकरण को पर्याप्त नहीं माना और कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों से जवाब तलब किया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए संसदीय समिति की बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और कंटेंट मॉडरेशन व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक के दौरान सदस्यों ने सवाल उठाया कि यदि देश के प्रधानमंत्री का आधिकारिक वीडियो भी सुरक्षित नहीं रह सकता, तो आम नागरिकों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर क्या भरोसा किया जा सकता है। समिति में डीपफेक तकनीक की रोकथाम और एल्गोरिदम की प्रभावशीलता पर भी चर्चा की गई।

बैठक में उपस्थित मेटा अधिकारियों ने घटना पर खेद व्यक्त करते हुए समिति के सामने माफी मांगने की बात कही। कई सदस्यों ने केवल माफी को पर्याप्त नहीं बताते हुए जिम्मेदारी तय करने और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की मांग भी रखी। उनका कहना था कि डिजिटल प्लेटफॉर्म को अपनी तकनीकी और निगरानी प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाना होगा ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एआई तकनीक से तैयार किए गए कथित मॉर्फ्ड फोटो और वीडियो प्रसारित किए जाने के मामले में भी जांच तेज हो गई है। इस संबंध में हैदराबाद पुलिस ने फेसबुक, इंस्टाग्राम और मेटा इंडिया से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर आवश्यक जानकारी मांगी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि कथित रूप से भ्रामक सामग्री तैयार करने और प्रसारित करने में किन लोगों की भूमिका रही। केंद्र सरकार ने भी इस पूरे मामले में संबंधित अधिकारियों से विस्तृत जवाब मांगा है। ऐसे में तकनीकी प्लेटफॉर्म की जवाबदेही, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और डिजिटल सुरक्षा को लेकर बहस एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर तेज होती दिखाई दे रही है।

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