September 13, 2026

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को अंतरिम रिपोर्ट पेश करेगी SIT, सरकार से मांग सकती है और समय

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लखनऊ। राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अपनी अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। सूत्रों के मुताबिक, शीर्ष अदालत के निर्देशों के तहत यह रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की जाएगी। साथ ही, जांच पूरी करने के लिए एसआईटी उत्तर प्रदेश सरकार से अतिरिक्त समय की मांग भी कर सकती है।

जानकारी के अनुसार, जांच अभी कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर जारी है। एसआईटी चढ़ावा गणना प्रणाली, कथित वित्तीय अनियमितताओं, बैंकिंग लेनदेन, आरोपियों की भूमिका और संबंधित दस्तावेजों की विस्तार से जांच कर रही है। हाल में पुलिस कस्टडी रिमांड के दौरान हुई पूछताछ और बरामदगी से मिले नए सुरागों का भी सत्यापन किया जा रहा है। इन सभी बिंदुओं की जांच पूरी होने के बाद अंतिम रिपोर्ट अदालत में पेश की जाएगी।

23 जून को शासन को सौंपी गई थी प्रारंभिक रिपोर्ट


एसआईटी ने 23 जून को राम मंदिर की व्यवस्थाओं और दानराशि प्रबंधन से संबंधित अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी थी। सूत्रों के अनुसार, इस रिपोर्ट में मंदिर की प्रशासनिक, वित्तीय और संचालन व्यवस्था से जुड़ी पांच प्रमुख खामियों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में दानराशि की सुरक्षा, कर्मचारियों की नियुक्ति, खरीद प्रक्रिया, प्रसाद वितरण व्यवस्था और अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

दानराशि की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल


जांच में पाया गया कि श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई नकदी को मंदिर परिसर से बैंक तक पहुंचाने और गणना कक्ष में उसकी गिनती के दौरान पर्याप्त सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था नहीं थी। एसआईटी का मानना है कि इसी वजह से दानराशि प्रबंधन प्रणाली में कई स्तरों पर सुधार की आवश्यकता है।

सोने-चांदी के आभूषणों का रिकॉर्ड भी अधूरा


रिपोर्ट के अनुसार, श्रद्धालुओं की ओर से भेंट किए गए सोने और चांदी के आभूषणों का समुचित अभिलेखीकरण नहीं किया जा रहा था। जांच में ऐसे कई उदाहरण सामने आए, जहां मूल्यवान धातुओं के संग्रहण और रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई।

नियुक्तियों और खरीद प्रक्रिया पर भी सवाल


एसआईटी ने अपनी जांच में यह भी पाया कि कुछ पदों पर नियुक्तियां तय प्रक्रिया और योग्यता के बजाय सिफारिशों के आधार पर की गईं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही प्रभावित हुई। इसके अलावा सामग्री खरीद की प्रक्रिया को लेकर भी आपत्तियां दर्ज की गई हैं। रिपोर्ट में उल्लेख है कि कुछ मामलों में टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं थी और कुछ खरीद में कमीशनखोरी तथा निर्धारित नियमों के पालन में अनियमितताओं के संकेत मिले हैं।

प्रसाद वितरण और सीता रसोई में भी मिलीं कमियां


एसआईटी की जांच में प्रसाद वितरण व्यवस्था और सीता रसोई के संचालन में भी कई कमियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, खाद्य सामग्री और अन्य सामानों की खरीद कई बार बाजार मूल्य से अधिक दरों पर की गई, जिससे वित्तीय अनुशासन और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए हैं।

सुधारात्मक कदमों की सिफारिश


सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में वित्तीय व्यवस्थाओं को अधिक पारदर्शी बनाने, जवाबदेही तय करने और प्रशासनिक सुधार लागू करने की सिफारिश की है। राज्य सरकार रिपोर्ट का अध्ययन कर रही है और इसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

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