September 13, 2026

अमेरिका ने चीन के जरिए टैरिफ बचाने के आरोपों में भारत समेत 40 से अधिक व्यापारिक साझेदारों को जोखिम वाले देशों में रखा

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नई दिल्ली ।अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव के बीच ट्रंप प्रशासन ने भारत समेत 40 से अधिक देशों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि चीन अमेरिकी टैरिफ से बचने के लिए कुछ तीसरे देशों के रास्ते अपने सामान को अमेरिकी बाजार तक पहुंचा सकता है। इस प्रक्रिया को ट्रांसशिपमेंट के तौर पर चिन्हित किया गया है।

अमेरिकी रिपोर्ट में भारत, कनाडा और यूरोपीय संघ के अलावा ताइवान, मैक्सिको, जापान, दक्षिण कोरिया और वियतनाम सहित कई व्यापारिक साझेदारों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इन देशों में कुछ ऐसे क्षेत्र हो सकते हैं जहां चीन से आने वाले सामान की मामूली प्रोसेसिंग, पैकेजिंग या लेबल बदलकर उसके मूल स्रोत को अलग तरीके से प्रदर्शित किया जा सकता है।

ट्रंप प्रशासन के मुख्य व्यापार सलाहकार पीटर नवारो की रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रांसशिपमेंट की गतिविधियों में 2018 के बाद बढ़ोतरी देखने को मिली। इसी अवधि में अमेरिका ने चीन के कथित अनुचित व्यापारिक तौर-तरीकों के खिलाफ सेक्शन 301 के तहत अतिरिक्त टैरिफ लागू किए थे। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि इन शुल्कों के प्रभाव से बचने के लिए चीनी सामान को तीसरे देशों के जरिए भेजने की कोशिशें बढ़ी हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे मामलों में चीन से तैयार या निर्मित वस्तुओं को किसी तीसरे देश में भेजकर उनका री-लेबलिंग, री-पैकेजिंग, री-इनवॉइसिंग या मामूली स्तर का प्रसंस्करण किया जा सकता है। इसके बाद सामान को उस देश का उत्पाद दिखाकर अमेरिका में भेजने की कोशिश की जा सकती है। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि इस तरह सामान पर लागू होने वाले टैरिफ में अंतर का लाभ उठाया जा सकता है।

अमेरिका ने इस पूरी व्यवस्था को अवैध ट्रांसशिपमेंट नेटवर्क से जोड़ते हुए कहा है कि इससे व्यापार नियमों और सीमा शुल्क व्यवस्था को नुकसान पहुंचता है। अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि चीनी कंपनियां ऐसे देशों और क्षेत्रों का इस्तेमाल कर सकती हैं जहां श्रम लागत अपेक्षाकृत कम हो, सीमा शुल्क निगरानी सीमित हो या मुक्त व्यापार क्षेत्रों में प्रक्रियात्मक लचीलापन उपलब्ध हो।

इस मामले में अमेरिकी सरकार अब तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दे रही है। रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस और यूएस कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन मिलकर सीमा पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणाली विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसका उद्देश्य संदिग्ध शिपमेंट की पहचान करना और यह पता लगाना है कि कहीं किसी वस्तु को तीसरे देश के माध्यम से भेजकर उसके वास्तविक मूल को छिपाने का प्रयास तो नहीं किया गया।

भारत का नाम इस सूची में आने से अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक संबंधों को लेकर भी चर्चा बढ़ सकती है। हालांकि किसी देश का रिपोर्ट में उल्लेख होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि वहां से होने वाला प्रत्येक व्यापार या शिपमेंट गैरकानूनी है। अमेरिकी प्रशासन ने मुख्य रूप से संभावित जोखिम और निगरानी की जरूरत पर जोर दिया है।

ट्रंप प्रशासन का यह कदम ऐसे समय सामने आया है जब वैश्विक व्यापार व्यवस्था में टैरिफ, सप्लाई चेन और चीन से जुड़े आयात को लेकर अमेरिकी नीतियां लगातार सख्त हो रही हैं। आने वाले समय में अमेरिकी सीमा शुल्क जांच और एआई आधारित निगरानी बढ़ने से उन देशों के निर्यातकों पर भी अतिरिक्त जांच का दबाव पड़ सकता है, जिनका नाम जोखिम वाले व्यापारिक साझेदारों में शामिल किया गया है।

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