मंदिर समिति के अध्यक्ष के पूर्व निजी सहायक प्रमोद नौटियाल पर कसा शिकंजा, चोरी की रकम की बरामदगी के लिए रिमांड की तैयारी में जुटी पुलिस
चमोली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, जांच दल ने अब तक मंदिर परिसर में हुई दान की गिनती से संबंधित कई महत्वपूर्ण तिथियों की सीसीटीवी फुटेज का बारीकी से विश्लेषण किया है। इनमें मुख्य रूप से जून और जुलाई महीने के शुरुआती हफ्तों की रिकॉर्डिंग शामिल हैं, जहां आरोपी प्रमोद नौटियाल कथित तौर पर बड़ी ही चालाकी से नकदी को छिपाकर अपने पास रखते हुए दिखाई दे रहा है। हालांकि, तकनीकी सीमाओं के कारण जांच टीम के सामने एक बड़ी चुनौती भी खड़ी हो गई है। वर्तमान यात्रा सीजन के दौरान अब तक दर्जनों बार दान की गिनती की जा चुकी है, परंतु सीसीटीवी कैमरों का डिजिटल स्टोरेज फुल हो जाने की वजह से पुरानी फुटेज स्वतः ही डिलीट हो चुकी हैं। ऐसी स्थिति में पुलिस को अंदेशा है कि आरोपी पूर्व में भी इस तरह की वारदातों को अंजाम देता आ रहा होगा, जिसके साक्ष्य मिट चुके हैं।
गौरतलब है कि इस पूरे मामले का मुख्य आरोपी प्रमोद नौटियाल श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के शीर्ष नेतृत्व का बेहद करीबी और पूर्व निजी सहायक रह चुका है। वह लंबे समय से इस प्रतिष्ठित धार्मिक संस्थान से जुड़ा हुआ था और उसके पास वीआईपी प्रोटोकॉल के साथ-साथ मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गिनती की प्रत्यक्ष निगरानी करने की अत्यंत महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी थी। इस ऊंचे और जिम्मेदार पद पर रहने के कारण ही उसे नकदी की गिनती वाले संवेदनशील क्षेत्र में निर्बाध प्रवेश की अनुमति मिली हुई थी, जिसका उसने कथित तौर पर दुरुपयोग किया। आरोपी को पुलिस ने उसके देहरादून स्थित आवास से गिरफ्तार किया था, जिसके बाद अदालत ने उसे चौदह दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।
पुलिस और विशेष जांच दल की अब तक की पूछताछ में आरोपी ने अपने ऊपर लगे आरोपों को स्वीकार नहीं किया है और वह लगातार जांच अधिकारियों को गुमराह करने का प्रयास कर रहा है। वर्तमान में पुलिस के हाथ केवल एक शालिग्राम शिला लगी है, जबकि चोरी की गई नकद राशि अथवा सोने-चांदी के सिक्कों की बरामदगी अभी भी शेष है। इसी वजह से पुलिस अब उच्च न्यायालय अथवा सत्र अदालत के समक्ष दोबारा रिमांड का आवेदन प्रस्तुत करने की रणनीति बना रही है। इस प्रशासनिक विफलता और सुरक्षा में चूक के बाद मंदिर समिति ने भी कड़ा रुख अख्तियार करते हुए आंतरिक व्यवस्था में बड़े बदलाव किए हैं, जिसके तहत दान प्रबंधन से जुड़े कुछ अन्य अधिकारियों को भी उनके पदों से हटा दिया गया है। वर्तमान में इस पूरे प्रकरण की समानांतर जांच पुलिस की एसआईटी, मंदिर समिति की आंतरिक जांच कमेटी और राज्य सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति द्वारा अत्यंत गंभीरता से की जा रही है।
