September 13, 2026

नालसर लॉ यूनिवर्सिटी विवाद के बाद बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के खिलाफ विपक्ष ने खोला मोर्चा।

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नई दिल्ली । 
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद मनन कुमार मिश्रा एक नए प्रशासनिक और वित्तीय विवाद के केंद्र में आ गए हैं। कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने बीसीआई के आधिकारिक बजटीय खर्चों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हुए संगठन की कार्यप्रणाली और वित्तीय पारदर्शिता पर तीखा हमला बोला है।

यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब बीसीआई ने हैदराबाद स्थित प्रतिष्ठित नालसर यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के 2026 बैच के छात्रों के वकालत नामांकन पर अस्थायी रोक लगाने का प्रशासनिक आदेश जारी किया था। आदेश में कहा गया था कि विश्वविद्यालय के वार्षिक दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के आमंत्रण का विरोध करने वाले छात्र जिम्मेदारी से काम नहीं कर रहे हैं, इसलिए उनसे संबंधित विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई थी।

हालांकि, इस फैसले के सामने आते ही विधिक और शैक्षणिक क्षेत्रों में व्यापक प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। विभिन्न स्तरों पर हुए विरोध और वरिष्ठ अधिवक्ताओं की सलाह के बाद बीसीआई ने कुछ ही घंटों के भीतर अपना आदेश वापस ले लिया। बीसीआई अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि प्राप्त फीडबैक के आधार पर यह पाया गया कि छात्रों की सीधी संलिप्तता नहीं थी, जिसके बाद सभी कार्यवाहियां समाप्त कर दी गईं।

इस प्रशासनिक यू-टर्न के तुरंत बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने बीसीआई के वार्षिक आय-व्यय के आंकड़ों को सार्वजनिक करते हुए अध्यक्ष की घेराबंदी शुरू कर दी। प्रवक्ता सौरव दास ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के ऑडिटेड आंकड़ों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि बैठकों, सम्मेलनों और यात्रा-आवास मद में करोड़ों रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च की गई है।

सौरव दास ने मीडिया के सामने सवाल उठाया कि संस्था द्वारा इतनी बड़ी धनराशि खर्च किए जाने के बावजूद युवा वकीलों के कल्याण और देश भर के लॉ स्कूलों के बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए कोई ठोस योजना लागू नहीं की गई है। उन्होंने बीसीआई नेतृत्व के लंबे कार्यकाल पर सवाल उठाते हुए नैतिक आधार पर इस्तीफे की मांग की है।

देश के अन्य राज्यों की तरह मध्य प्रदेश के विधिक गलियारों और कानून के छात्रों के बीच भी इस पूरे घटनाक्रम की व्यापक चर्चा हो रही है। इंदौर, भोपाल और ग्वालियर के लॉ कॉलेजों में अध्ययनरत छात्र और युवा वकील बार काउंसिल की नीतियों तथा हालिया आदेशों पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं।

विधिक विशेषज्ञों का मानना है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया जैसी स्वायत्त और शीर्ष विधिक संस्था को अपने फैसलों में अधिक पारदर्शिता और संवेदनशीलता बरतने की आवश्यकता है। छात्रों पर प्रतिबंध लगाने और उसे तुरंत वापस लेने की घटना से संस्था की छवि पर असर पड़ा है, जिसकी भरपाई के लिए प्रशासनिक सुधार जरूरी हैं।

वर्तमान में इस विवाद के बाद बीसीआई नेतृत्व पर वित्तीय और प्रशासनिक जवाबदेही तय करने का दबाव लगातार बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बीसीआई प्रबंधन इन वित्तीय आरोपों और प्रशासनिक फैसलों पर क्या आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करता है।

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