October 8, 2026

बर्फ के नीचे छिपे मायावी न्यूट्रिनो से ब्रह्मांड के रहस्य खोलने वाले फ्रांसिस हाल्जन को भौतिकी का नोबेल

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नई दिल्ली: रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने 2026 का भौतिकी नोबेल पुरस्कार फ्रांसिस हाल्जन को देने का फैसला किया है। उन्हें यह सम्मान आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी में योगदान और खगोलीय मूल के हाई एनर्जी न्यूट्रिनो की खोज के लिए दिया गया है। हाल्जन ने दक्षिण ध्रुव की बर्फ का इस्तेमाल न्यूट्रिनो नामक बेहद मायावी कणों को पकड़ने और ट्रैक करने के लिए करने का दृष्टिकोण विकसित किया। उनके वैज्ञानिक नेतृत्व और विचारों ने ऐसी वेधशाला के निर्माण का रास्ता तैयार किया, जिसके जरिए दूर ब्रह्मांड से आने वाले अत्यधिक ऊर्जावान न्यूट्रिनो का अध्ययन संभव हुआ।

आइसक्यूब ऑब्जर्वेटरी एक घन किलोमीटर बर्फ में लगाए गए प्रकाश सेंसरों का विशाल नेटवर्क है। जब कोई न्यूट्रिनो किसी परमाणु नाभिक से टकराता है तो प्रकाश की चमक पैदा होती है। साफ ग्लेशियर बर्फ में लगाए गए सेंसर इस चमक को दर्ज कर सकते हैं और उसके आधार पर न्यूट्रिनो के बारे में जानकारी हासिल की जाती है। दक्षिण ध्रुव की बर्फ इस प्रयोग के लिए कई फायदे देती है। यह क्षेत्र भूगर्भीय रूप से स्थिर है और यहां प्रयोग के दौरान कई तरह के व्यवधान कम होते हैं। इसी आधार पर न्यूट्रिनो का पता लगाने की यह तकनीक आगे विकसित होती गई।

फ्रांसिस हाल्जन ने वर्ष 1988 में दक्षिण ध्रुव पर न्यूट्रिनो पकड़ने का अपना दृष्टिकोण पहली बार प्रस्तुत किया था। उनके विचार को दूसरे शोधकर्ताओं का समर्थन मिला और कुछ वर्षों के भीतर बर्फ में सेंसर लगाने के शुरुआती परीक्षण शुरू हुए। समय के साथ यह परियोजना बड़े वैज्ञानिक प्रयास में बदलती गई और आइसक्यूब दुनिया की सबसे बड़ी न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी बन गई। इसके जरिए वैज्ञानिक उन कणों का अध्ययन कर पा रहे हैं, जो ब्रह्मांड की अत्यंत ऊर्जावान घटनाओं और दूरस्थ स्रोतों से पृथ्वी तक पहुंचते हैं।

न्यूट्रिनो को ब्रह्मांड के सबसे मायावी कणों में गिना जाता है, क्योंकि वे पदार्थ के साथ बहुत कम प्रतिक्रिया करते हैं और आसानी से उसके आर-पार गुजर सकते हैं। अन्य कणों की तुलना में न्यूट्रिनो अपनी दिशा बदले बिना और ऊर्जा खोए बिना पृथ्वी तक पहुंच सकते हैं। इसी वजह से वे ब्रह्मांड के उन हिस्सों और घटनाओं की जानकारी दे सकते हैं, जिन्हें दूसरे तरीकों से समझना मुश्किल होता है। वैज्ञानिक लंबे समय से जानते हैं कि ब्रह्मांड में प्राकृतिक स्रोत ऐसे कण पैदा करते हैं जिनकी ऊर्जा पृथ्वी की प्रयोगशालाओं में हासिल की जा सकने वाली ऊर्जा से लाखों गुना अधिक हो सकती है। इन स्रोतों की प्रकृति और उनके भीतर चलने वाली प्रक्रियाएं अब भी कई सवाल खड़े करती हैं।

आइसक्यूब के जरिए हाई एनर्जी वाले खगोलीय न्यूट्रिनो की पुष्टि ने ब्रह्मांड के अध्ययन का नया क्षेत्र खोला है। ऐसे न्यूट्रिनो सुपरनोवा विस्फोट, ब्लैक होल के आसपास होने वाली प्रक्रियाओं और गामा रे बर्स्ट जैसी अत्यंत ऊर्जावान घटनाओं को समझने में मदद कर सकते हैं। न्यूट्रिनो खगोल विज्ञान के जरिए वैज्ञानिक दृश्य प्रकाश और अन्य तरंगों से अलग एक नए नजरिए से ब्रह्मांड को देख पा रहे हैं। दक्षिण ध्रुव की कठिन परिस्थितियों में इतनी विशाल ऑब्जर्वेटरी विकसित करने में हाल्जन के वैज्ञानिक नेतृत्व और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रही। यह सम्मान कण भौतिकी और खगोल भौतिकी के संगम में उनके योगदान को मान्यता देता है।

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