October 9, 2026

किसी के 100 तो किसी के 14 बच्चे: अरबपतियों की दुनिया में बड़े परिवारों का चलन, जानिए इसके पीछे की सोच

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नई दिल्ली: दुनिया के अति-अमीर लोगों की जीवनशैली में कई ऐसी बातें देखने को मिलती हैं, जो आम लोगों की जिंदगी से काफी अलग हैं। इनमें बड़ी संख्या में बच्चे पैदा करना और उनकी देखभाल के लिए सहायकों की पूरी टीम रखना भी शामिल है। जहां बहुत से परिवारों के लिए एक बच्चे की परवरिश का खर्च और जिम्मेदारी बड़ी चुनौती होती है, वहीं कुछ अरबपति दर्जनों बच्चों के माता-पिता बन रहे हैं। इस चलन ने परिवार, संपत्ति, सामाजिक प्रतिष्ठा और बच्चों के पालन-पोषण को लेकर नई चर्चा शुरू की है। कुछ मामलों में बच्चों की संख्या इतनी अधिक है कि उनकी देखभाल के लिए कई नैनी और सहायक नियुक्त किए जाते हैं। ऐसे परिवारों में बच्चों की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए अलग-अलग लोगों की जिम्मेदारी तय रहती है। इससे यह सवाल भी उठता है कि आर्थिक संपन्नता के बावजूद माता-पिता अपने बच्चों के साथ कितना समय बिता पाते हैं और उनके भावनात्मक विकास में उनकी व्यक्तिगत भागीदारी कितनी रहती है।

कारोबारी और मनोरंजन जगत की चर्चित हस्ती किम कार्दशियन का उदाहरण इस व्यवस्था को समझने में मदद करता है। उनके पूर्व पति से चार बच्चे हैं और उनकी देखभाल के लिए पांच नैनी नियुक्त होने की जानकारी सामने आई है। बताया गया है कि इन सहायकों की ड्यूटी अलग-अलग पालियों में चलती है। एक समय में एक नैनी बच्चों की देखभाल करती है, जबकि अन्य अपनी निर्धारित पाली के अनुसार जिम्मेदारी संभालती हैं। इस तरह बच्चों की दिनचर्या, उनकी जरूरतों और देखभाल के लिए एक व्यवस्थित व्यवस्था बनाई गई है। आर्थिक रूप से संपन्न परिवारों में घरेलू सहायकों की मदद लेना असामान्य नहीं है। बच्चों की देखभाल के लिए प्रशिक्षित लोगों की सहायता से माता-पिता अपने काम और निजी जीवन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर सकते हैं। लेकिन जब बच्चों की संख्या अधिक हो और उनकी देखभाल का बड़ा हिस्सा सहायकों के जिम्मे हो, तो माता-पिता की व्यक्तिगत भागीदारी को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

तकनीक क्षेत्र के कारोबारी पावेल दुरुव का मामला भी बड़ी संख्या में बच्चों को लेकर चर्चा में रहा है। रूस में जन्मे दुरुव के बारे में बताया गया है कि शुक्राणु दान के माध्यम से दुनिया के 12 देशों में उनके 100 से अधिक जैविक बच्चे हैं। इस मामले में बच्चों का जन्म पारंपरिक पारिवारिक व्यवस्था से अलग माध्यम के जरिए हुआ है। चीन के उद्योगपति शू बो के बारे में भी सरोगेसी के माध्यम से 100 से अधिक बच्चे होने का विवरण सामने आया है। इन उदाहरणों से पता चलता है कि प्रजनन तकनीकों और आर्थिक संसाधनों की उपलब्धता ने कुछ संपन्न लोगों के लिए परिवार बनाने के विकल्पों का दायरा बढ़ाया है। हालांकि, ऐसे मामलों में बच्चों की परवरिश, उनके साथ संबंध और पारिवारिक जिम्मेदारियों का स्वरूप व्यक्ति तथा परिवार की परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।

अत्यधिक संपन्नता के बीच बड़े परिवारों का चलन सामाजिक प्रतिष्ठा से भी जोड़कर देखा जा रहा है। कुछ लोगों के लिए अधिक संतान होना परिवार की निरंतरता या व्यक्तिगत पसंद का विषय हो सकता है, जबकि अन्य मामलों में इसके पीछे अलग-अलग विचार और परिस्थितियां हो सकती हैं। हालांकि, केवल बच्चों की संख्या के आधार पर किसी व्यक्ति की मंशा तय नहीं की जा सकती। बड़ी संख्या में बच्चों की परवरिश के लिए आर्थिक संसाधनों के साथ समय, भावनात्मक सहयोग और नियमित देखभाल की भी जरूरत होती है। नैनी और दूसरे सहायकों की मदद से बच्चों की दैनिक जरूरतें पूरी की जा सकती हैं, लेकिन माता-पिता के साथ उनका व्यक्तिगत संबंध भी उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।

बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास पर परिवार के माहौल, देखभाल की निरंतरता और माता-पिता के साथ संबंधों का प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में बड़ी संख्या में बच्चों वाले परिवारों के सामने यह चुनौती रहती है कि प्रत्येक बच्चे को पर्याप्त ध्यान और व्यक्तिगत समय कैसे दिया जाए। दूसरी ओर, यह भी महत्वपूर्ण है कि किसी परिवार की परिस्थितियों को समझे बिना बच्चों के विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने का निष्कर्ष नहीं निकाला जाए। हर बच्चे की जरूरतें और पारिवारिक अनुभव अलग हो सकते हैं। अंततः संपत्ति और सुविधाएं बच्चों के जीवन को आसान बनाने में मदद कर सकती हैं, लेकिन उनके पालन-पोषण में भावनात्मक जुड़ाव और जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण हैं। अरबपतियों के बड़े परिवारों के उदाहरण इसी व्यापक बहस को सामने लाते हैं कि आधुनिक समाज में परिवार का आकार, आर्थिक क्षमता और बच्चों की परवरिश के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

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