September 13, 2026

970 किलो मेफेड्रोन केस में बड़ा अपडेट, वीरेंद्र बसोया दुबई से भारत लाया गया; अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क की जांच तेज

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नई दिल्ली ।
ड्रग्स तस्करी से जुड़े एक बड़े मामले में भारतीय जांच एजेंसियों को अहम सफलता मिली है। 970 किलो मेफेड्रोन की बरामदगी से जुड़े मामले में वांछित आरोपी वीरेंद्र सिंह बसोया को दुबई से भारत लाया गया है। उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी था और भारत सरकार की पहल के बाद संयुक्त अरब अमीरात से उसे डिपोर्ट करने की प्रक्रिया पूरी की गई।

वीरेंद्र बसोया पर पुणे से जुड़े एक बड़े कथित ड्रग्स नेटवर्क में शामिल होने का आरोप है। जांच में सामने आए मामले की अनुमानित कीमत करीब 6,000 करोड़ रुपये बताई गई है। आरोप है कि इस नेटवर्क के जरिए बड़ी मात्रा में मेफेड्रोन की खेप तैयार कर उसे विदेश भेजने की योजना बनाई गई थी।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बसोया की भारत वापसी को लेकर जानकारी साझा करते हुए कहा कि विदेशों में छिपे ड्रग्स तस्करों के खिलाफ कार्रवाई जारी है। उन्होंने नशीले पदार्थों के नेटवर्क को खत्म करने की दिशा में एजेंसियों की कार्रवाई और सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति पर जोर दिया।

मामले की जांच के दौरान 21 फरवरी 2024 को दिल्ली में कार्रवाई की गई थी। इस कार्रवाई में दिवेश चरंजीत भूतानी और संदीपकुमार राजपाल बैसोया को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई थी। उनके कब्जे से करीब 970 किलो मेफेड्रोन बरामद होने का दावा किया गया था।

जांच में आरोप लगाया गया कि गिरफ्तार किए गए आरोपी कथित तौर पर वीरेंद्र सिंह बसोया के निर्देश पर काम कर रहे थे। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया और कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तथा विदेश में मौजूद संदिग्धों की भूमिका की पड़ताल शुरू हुई।

जांच एजेंसियों के अनुसार मेफेड्रोन की खेप को विदेश भेजने के लिए लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का इस्तेमाल किए जाने की योजना थी। इस सिलसिले में डेल्टा लॉजिस्टिक्स से जुड़े कुछ लोगों पर भी कार्रवाई की गई। संदीप हनुमानसिंह यादव और देवेंद्र रामफुल यादव को मामले में गिरफ्तार किए जाने की जानकारी है।

मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ वीरेंद्र बसोया के बेटे ऋषभ का नाम भी सामने आया। उसके खिलाफ भी रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए जाने की जानकारी है। वह फिलहाल विदेश में बताया जा रहा है। जांच एजेंसियां अब कथित ड्रग्स नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और इसकी अंतरराष्ट्रीय कड़ियों की जानकारी जुटाने में लगी हैं।

वीरेंद्र बसोया की भारत वापसी को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वह लंबे समय से देश से बाहर था और उसके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तलाश की प्रक्रिया चल रही थी। उसके भारत आने के बाद जांच एजेंसियों को मामले की कथित साजिश, नेटवर्क के संचालन और विदेशों तक नशीले पदार्थ पहुंचाने की योजना से जुड़े कई सवालों के जवाब हासिल करने का अवसर मिल सकता है।

जांच एजेंसियां अब बसोया से मामले में उसकी कथित भूमिका और अन्य आरोपियों से संबंधों को लेकर पूछताछ कर सकती हैं। साथ ही बरामद मेफेड्रोन की खेप, उसके स्रोत, तैयार करने की प्रक्रिया और कथित अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े पहलुओं की भी जांच आगे बढ़ सकती है।

हालांकि, जांच में लगाए गए आरोपों को अदालत में अंतिम रूप से साबित किया जाना बाकी है। किसी भी आरोपी की कानूनी जिम्मेदारी का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगा। फिलहाल बसोया की भारत वापसी के बाद इस मामले में जांच और कानूनी कार्रवाई के अगले चरण पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

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