नाना पाटेकर ने किसानों के परिवारों के लिए छोड़ दी थी 1.5 करोड़ की कार, मदद के लिए बांटने को दिए थे चेक
रणबीर पुष्प के मुताबिक, एक दिन नाना पाटेकर न्यूज देख रहे थे। इस दौरान उन्होंने किसानों की आत्महत्या से जुड़ी खबर देखी, जिसमें एक पूरा परिवार शोक में डूबा हुआ था। उस समय नाना अगले दिन करीब 1.5 करोड़ रुपये की लग्जरी कार खरीदने वाले थे और खरीदारी से जुड़ी सभी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं। लेकिन किसानों के परिवार की स्थिति देखने के बाद उन्होंने अपना फैसला बदल दिया। उन्होंने तुरंत अपने दोस्त को फोन किया और कहा कि 15-15 हजार रुपये के चेक बनवाकर सभी किसानों को बांट दिए जाएं। इस किस्से के जरिए उनके किसानों के प्रति लगाव और जरूरतमंद परिवारों की मदद करने की सोच का उल्लेख किया गया था।
नाना पाटेकर सामाजिक कार्यों से भी जुड़े रहे और उन्होंने NAAM फाउंडेशन की स्थापना की थी। किसानों की परेशानियों और उनके परिवारों की स्थिति को लेकर उनकी चिंता का जिक्र कई बार किया गया है। रणबीर पुष्प ने इसी संदर्भ में कहा था कि जो व्यक्ति किसानों के दुख को देखकर अपनी 1.5 करोड़ रुपये की कार खरीदने का फैसला बदल सकता है, वह किसी का बुरा कैसे सोच सकता है। किसानों के परिवारों की मदद से जुड़ा यह किस्सा नाना पाटेकर के सामाजिक सरोकारों को सामने रखता है।
नाना पाटेकर के गुस्से से जुड़ा एक और किस्सा भी इसी बातचीत में बताया गया था। रणबीर पुष्प के मुताबिक, एक बार नाना ने किसी व्यक्ति को कार से प्लास्टिक की बोतल बाहर फेंकते हुए देखा। उन्होंने अपनी कार रोककर उस बोतल को उठाया। इसके बाद उन्होंने उस व्यक्ति की कार रुकवाई और शीशा नीचे करने को कहा। नाना ने उससे सवाल किया कि देश को साफ रखने की जिम्मेदारी किसकी है। उन्होंने गांधीजी का जिक्र करते हुए कहा था कि गांधीजी चले गए हैं, लेकिन लोग अब भी इस धरती पर हैं और एक नागरिक के तौर पर देश को साफ रखना उनकी जिम्मेदारी है। इस घटना में उनका गुस्सा सार्वजनिक जगहों पर स्वच्छता और नागरिक जिम्मेदारी को लेकर था।
नाना पाटेकर ने 75 साल की उम्र में आखिरी सांस ली। गुरुवार सुबह गोवा स्थित उनके आवास पर उन्हें गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया, जिसके बाद उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की कोशिश की और करीब 45 मिनट तक लगातार सीपीआर दिया गया, लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ और उन्हें पुनर्जीवित नहीं किया जा सका। उनके निधन के साथ हिंदी और मराठी सिनेमा के एक चर्चित अभिनेता का करियर समाप्त हुआ। नाना पाटेकर का असली नाम विश्वनाथ पाटेकर था। उन्होंने 1978 में फिल्म ‘गमन’ से अभिनय की शुरुआत की और आगे चलकर हिंदी तथा मराठी फिल्मों में पहचान बनाई। उन्होंने अपने करियर में तीन नेशनल अवॉर्ड जीते थे और 2013 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। ‘परिंदा’, ‘तिरंगा’, ‘वेलकम’, ‘अपहरण’ और ‘अब तक छप्पन’ जैसी फिल्मों में उनके काम को जाना जाता है।
